भोपाल। लॉकडाउन के दौरान जहां देश ही नहीं बल्कि विश्व की अधिकांश जनता इस महामारी से जूझ रही है और इस महामारी में भी कुछ अधिकारी व राजनेता अपने कारनामे दिखाने में लगे हुए हैं जिस महिला बाल विकास विभाग के द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों में बंटने वाले पोषण आहार में लॉकडाउन के दौरान पूरे प्रदेश में बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार उनके घरों तक पहुंचाने में जो कारनामे महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा किये गये यही नहीं उस दौरान जो विधानसभा सत्र कोरोना के नाम पर स्थगित कर दिया गया था उसमें सूत्रों के अनुसार कई विधायकों ने महिला बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बंटने वाले पोषण आहार के संबंध में तमाम प्रश्न लगाये थे। विधानसभा सूत्रों पर यदि भरोसा करें तो महिला बाल विकास विभाग जिसकी कमान जनप्रिय और कथित ईमानदार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों में है उसी विभाग के अधिकारियों द्वारा जो जानकारी विधायकों के प्रश्नों के जवाब में विधानसभा को भेजी गई थी हालांकि वह जानकारी विधानसभा के पटल पर विधानसभा का कारोना के चलते विधानसभा सत्र स्थगित होने के कारण नहीं आ सकी और आज भी पुस्तकालय में मौजूद है उसमें महिला बाल विकास विभाग द्वारा जवाब दिया गया था कि पूरे प्रदेश में महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित होने वाली आंगनबाडिय़ों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार उनके घर पर उपलब्ध कराया गया जबकि प्रदेश के अधिकांश जिलों के महिला बाल विकास के अधिकारियों द्वारा पोषण आहार वितरण के संबंध में जानकारी मांगी गई तो कोई भी जानकारी देने में हर कोई अधिकारी आनाकानी करता नजर आता है विभाग के मैदानी स्तर के जिले में तैनात अधिकारियों द्वारा इस तरह से पोषण आहार वितरण संबंधी जानकारी दिये जाने में आनाकानी करने से तमाम सवाल खड़े होते हैं यही नहीं सवाल यह भी उठता है कि जब आम दिनों में मुख्यमंत्री के अधीनस्थ महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाडिय़ों के माध्यम से विततिरत किये जाने वाले पोषण आहार का वितरण ठीक से नहीं हो पाता है तो कोरोना जैसी महाकारी के लॉकडाउन के दौरान वही महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित कार्यकर्ता जिनकी कार्यशैली और पोषण आहार वितरण में बरती जाने वाली हीलाहवाली को लेकर हमेशा समाचार सुर्खियों में रहे हैं वही कथित ईमानदार आंगनबाड़ी के कर्ताधर्ताओं ने लॉकडाउन के दौरान जब लोग अपने घरों से नहीं निकल रहे थे तो उस समय कैसे दूर-दराज और आदिवासी जिलों की फलियों और मजरे टोलों में रहने वाले हितग्राहियों को कैसे पोषण आहार वितरित किया गया होगा इसको लेकर भी तमाम तरह की चर्चाएं लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं जहां तक मुख्यमंत्री के अधीनस्थ विभाग महिला बाल विकास विभाग की कमान संभालने वाली स्वाती मीणा नायक की कार्यशैली को लेकर भी विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और इन्हीं की इसी तरह की कार्यशैली के चलते लॉकडाउन के दौरान पोषण आहार वितरण को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं अब उन्हें रफा-दफा करने के लिये अपनी कार्यशैली के लिये चर्चित स्वाती मीणा नायक अब पोषण आहार को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दे रही हैं, सवाल यह उठता है कि स्वाती मीणा नायक की कार्यशैली के बारे में जहां तक विभाग में जो चर्चाएं लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं उसी में अलीराजपुर जैसे आदिवसी बाहुल्य जिले के लॉकडाउन के दौरान तत्कालीन महिला बाल विकास विभाग के जिला परियोजना अधिकारी गोंडिया की कार्यशैली को लेकर जिले के एक जागरुक नागरिक ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत विभाग के प्रमुख सचिव अशोक दास को की थी और अशोक दास ने भी अपने यहां से १७ नवम्बर को उस शिकायती पत्र की जांच कराने और अपना प्रतिवेदन देने के लिये विभाग की संचालक स्वाती मीणा नायक को भेजा था लेकिन स्वाती मीणा नायक की अपनी चिर परिचित कार्यशैली के चलते अभी तक उस शिकायती पत्र की न तो जांच कराई गई और ना ही विभाग की संचालक द्वारा कोई प्रतिवेदन विभाग के प्रमुख सचिव अशोक दास की ओर प्रेषित किया गया। विभाग की प्रमुख स्वाती मीणा नायक की इस प्रकार की कार्यशैली को लेकर तरह-तरह की चर्चायें लोग चटकारे लेकर करते नजर आते हैं ऐसी ही कार्यशैली के चलते प्रदेश के उस विभाग में जबकि प्रदेश की सत्ता के मुखिया के पास विभाग की कमान उनके पास ही उन्हीं के हाथों में प्रदेश की सत्ता की कमान भी है उन्हीं कथित ईमानदार मुख्यमंत्री के विभाग में उनके द्वारा ही निर्धारित ३० अप्रैल तक तबादलों में बैन लगे होने के बावजूद भी २१ विभाग के अधिकारियों के स्थानान्तरण की सूची शाम तक जारी होना और दूसरे दिन दोपहर तक उसी सूची में जिन रेखा अग्रवाल को दतिया का महिला बाल विकास विभाग का परियोजना अधिकारी बनाने का आदेश जारी हुआ था उस आदेश के दोपहर तक संशोधन किये जाने के साथ ही रेखा अग्रवाल का स्थानान्तरण दतिया की बजाए ग्वालियर कर देने को लेकर भी तमाम चर्चाओं का दौर विभाग में जारी है तो वहीं इन चर्चाओं के बीच यह भी चर्चा जोरों पर जारी है कि इस तरह का उस विभाग में भजकलदारम् का खेल चल रहा है जिसकी कमान इमरती देवी के महिला बाल विकास के मुखिया के पद से त्यागपत्र देने के बाद उस विभाग में जिसकी कमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथों में है और उस विभाग में यदि इस प्रकार की कार्यशैली चले तो यह तमाम तरह के संदेह पैदा होते हैं यही नहीं स्वाती मीणा नायक और अशोक दास की इस तरह की कार्यशैली के चलते लोग अब महिला बाल विकास विभाग में भजकलदारम् की प्रथा को जोर पकड़ते देख तमाम तरह की चर्चाएं चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं तो लोग यहां तक भी कहने से नहीं चूक रहे हैं कि आखिर जब मुख्यमंत्री के अधीनस्थ विभाग में तबादलों पर बैन होने के बाद २१ अधिकारियों का स्थानान्तरण आदेश निकलता और उसी आदेश में से रेखा अग्रवाल का रेखा अग्रवाल का स्थानान्तरण संशोधित होकर ग्वालियर होना भी तमाम शंकायें पैदा कर रहे हैं सवाल यह भी उठता है कि आखिर मुख्यमंत्री के अधीनस्थ इस विभाग की कमान मुख्यमंत्री के अलावा कौन देख रहा है जिसकी सांठगांठ से विभाग के अधिकारी अशोक दास और स्वाती मीणा नायक जैसे अधिकारी विभाग में पोषण आहार में गड़बड़ी करने से लेकर बैन के बाद २१ अधिकारियों के तबादला आदेश निकालने में भजकलदारम् की प्रथा को कौन जन्म दे रहा है इस सवाल का जवाब प्रदेश की जनता ही नहीं विभाग के वह अधिकारी जिनके संचालनालय में वर्षों से बने रहने के बाद बिना उनकी अनुमति के उनका स्थानान्तरण जिलों में उस स्थिति में बिना उनकी सहमति के आदेश निकालने को लेकर भी लोग तरह-तरह की चर्चाएं चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं कुल मिलाकर मुख्यमंत्री के अधीनस्थ महिला बाल विकास विभाग में शिवराज सिंह चौहान के चौथी बार ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके साथियों के बगावत करने के बाद भाजपा में शामिल होते ही जो भजकलदारम् का खेल महिला बाल विकास विभाग में चल रहा है उसको लेकर भी लोगों को मोदी मंत्रिमण्डल में केंद्रीय पर्यटन विकास मंत्री प्रहलाद पटेल जिन्होंने २००७ में तत्कालीन भारतीय जनशक्ति के महामंत्री के तौर पर २८ सितम्बर २००७ को जो पत्र लिखा था उस पत्र में शिवराज सिंह की कार्यशैली और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना ङ्क्षसह द्वारा अपनी पहचान छुपाकर खरीदे गये डम्परों के मामले को उजागर करते समय शिवराज सिंह की कार्यशैली को लेकर जो सवाल उठाये थे वही सब सवाल आज मुख्यमंत्री के अधीनस्थ महिला बाल विकास विभाग में बदस्तूर जारी हो रहे हैं और उन्हें देखकर अब लोग यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि क्या इसी तरह का खेल मुख्यमंत्री के १५ वर्षों के शासनकाल में भी चला था और अब भी बदस्तूर जारी है कुल मिलाकर महिला बाल विकास विभाग के अशोक शाह और स्वाती मीणा नायक की कार्यशैली जिस प्रकार से चल रही है उसे देखते हुए यही नजर आता है कि या तो यह मुख्यमंत्री की कथित ईमानदार होने की छवि को बदनाम करने की साजिश है या फिर विभाग में मुख्यमंत्री से जुड़े किसी शक्तिशाली व्यक्ति के दबाव में आकर महिला बाल विकास विभाग में भजकलदारम् का खेल खेला जा रहा है मजे की बात तो यह है कि मुख्यमंत्री के अधीनस्थ महिला बाल विकास विभाग में इस तरह से खेले जा रहे खेल से मुख्यमंत्री क्यों अनजान बने हुए हैं इसको लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं?
पोषण आहार में घपला कर सरकार और प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है स्वाति मीणा नायक






