एस पी मित्तल, अजमेर
अजमेर विद्युत वितरण निगम (डिस्कॉम) के एमडी एनएस निर्वाण ने वादा किया है कि उनके अधीन आने वाले 13 जिलों में बिना कटौती के आठ घंटे लगातार बिजली सप्लाई की जाएगी ताकि किसान अपने खेतों में सिंचाई कर सके। करंट से मरे लोगों को बकाया मुआवजा राशि तुरंत दी जाएगी। नागौर के लिए 33 केवी के 15 जीएसएस भी स्वीकृत किए हैं। अजमेर डिस्कॉम के नेताओं ने ये घोषणा कांग्रेस या भाजपा के नेताओं के ज्ञापन पर नहीं की, बल्कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक सांसद हनुमान बेनीवाल और उनके समर्थकों के दबाव में की है। 20 जनवरी को बेनीवाल के नेतृत्व में आरएलपी के कार्यकर्ता पहले अजमेर कलेक्ट्रेट पर एकत्रित हुए और रात 10 बजे तक माकड़वाली रोड स्थित डिस्कॉम मुख्यालय का घेराव किया। हाड़ कंपाने वाली सर्दी के बावजूद सांसद बेनीवाल अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ डिस्कॉम दफ्तर के बाहर बैठे रहे। उनके समर्थकों ने बिजली इंजीनियरों पर जो आरोप लगाए, उसेस इंजीनियरों को सर्द रात में भी पसीने आ गए। इंजीनियरों को सांसद बेनीवाल से सड़क पर आकर ही बात करनी पड़ी। डिस्कॉम दफ्तर पर जब आरएलपी के कार्यकर्ता बैठे रहे, तब तक इंजीनियरों को सर्दी में भी गर्मी का अहसास होता रहा। बेनीवाल के समर्थक 20 जनवरी को सुबह 12 बजे कलेक्ट्रेट पर एकत्रित हुए और रात 10 बजे तक विरोध प्रदर्शन करते रहे। मांगे पूरी होने पर ही बेनीवाल ने बिजली इंजीनियरों को छोड़ा। बेनीवाल की स्टाइल ही थी कि किसानों की समस्याओं का समाधान हुआ। इससे कांग्रेस और भाजपा के नेताओं को सबक लेना चाहिए। सब देखते हैं कि जब कांग्रेस और भाजपा का कोई विरोध प्रदर्शन होता है, तब कुछ घंटों के लिए ही कार्यकर्ता एकत्रित होते हैं। यह विरोध प्रदर्शन भी दिन में होता है ताकि किसी कार्यकर्ता अथवा नेता को शारीरिक कष्ट न हो। भाजपा और कांग्रेस के धरना प्रदर्शन में तो सिर्फ फोटो खींचाने की होड़ लगी रहती है। नेताओं का प्रयास होता है कि किसी तरह उनका फोटो और नाम मीडिया में आ जाए। सत्तारूढ़ पार्टी के नेता तो अधिकारियों को बता कर ही अपना ज्ञापन देने के लिए आते हैं। ऐसे ज्ञापनों का प्रशासन पर ही कोई असर नहीं होता है। 20 जनवरी को जब बेनीवाल और उनके समर्थक अजमेर में रहे, तब जिला प्रशासन के अधिकारियों से लेकर डिस्कॉम तक के इंजीनियर अलर्ट रहे। बेनीवाल के विरोध को देखते हुए शहर के यातायात में भी तब्दीली की गई, जिसकी वजह से नागरिकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लेकिन प्रशासन को नागरिकों की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है।






