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मेरठ में  जुलूस निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया

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मुनेश त्यागी

  राष्ट्रीय हड़ताल के मौके पर  मेरठ में आज राष्ट्रीय जन संगठन मंच जो केंद्रीय सरकार राज्य सरकार बैंक बीमा ट्रेड यूनियन निगम किसान मजदूर समेत आम जनता के सभी हिस्सों का एक मंच एक संयुक्त मंच है, के द्वारा मजदूरों किसानों छात्रों ने जवानों समेत देश की आम जनता से संबंधित समस्याओं पर केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए देश के  10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों तथा स्वतंत्र फेडरेशनों द्वारा जुलूस निकालकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति महोदय को ज्ञापन दिया गया।
 ज्ञापन में कहा गया है पिछले कई वर्षों से यह अनुभव किया गया है कि भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार जो कि आठ वर्ष पूर्व सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ सत्ता में आई थी, उसका विकास चुने हुए कारपोरेट तक ही सीमित होकर रह गया है। इन्हीं नीतियों का परिणाम है 1% पूंजीपतियों ने 73% परिसमाप्तियों पर कब्जा बना लिया है तथा देश की बहुसंख्यक जनता आज भी अभाव और संकट में जीवन यापन कर रही है तथा वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में भारत का स्थान 118 देशों में 10वें स्थान पर पाकिस्तान बांग्लादेश और नेपाल से भी पीछे चला गया है।
 वर्तमान सरकार ने देश के युवाओं को हर वर्ष 2 करोड रोजगार उपलब्ध कराने का वादा किया था जबकि हकीकत यह है कि रोजगार मिलना तो दूर, रोजगार लगाता खत्म हो रहे हैं, उन्हें नौकरियों से निकाला जा रहा है,लोग बेरोजगार हो रहे हैं, उनके वेतन में कटौती की जा रही है। स्थिति यहां तक खराब है कि केन्द्रीय कार्यालयों में लगभग एक चौथाई पद खाली पड़े हैं तथा कमोबेश यही स्थिति राज्य सरकारों की है जिस कारण आजादी के बाद आज बेरोजगारी की दर अपनी चरम सीमा पर है। देश के 77 फ़ीसदी परिवारों के पास पक्की नौकरी और नियमित रोजगार नहीं है तथा उनकी आमदनी ₹20 प्रतिदिन से भी ज्यादा नहीं है।
   18-29 वर्ष के युवाओं के बीच बेरोजगारी दर 28 से बढ़कर 35% हो गई है। एनडीए सरकार द्वारा मूल्य नियंत्रण वृद्धि को नियंत्रित करने का वादा किया गया था लेकिन वास्तव में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं राशन वितरण प्रणाली फंड कटौती के चलते भ्रष्ट हो गई है, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को तय करने की सरकारी नियंत्रण को समाप्त करने के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि लगातार हो रही है। एनडीए सरकार राष्ट्रीय संपदा के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। 
रक्षा, रेलवे, बैंक, बीमा जैसे सामरिक एवं महत्वपूर्ण क्षेत्रों को विदेशी एवं घरेलू निगमों को बेचने का काम किया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना के अंतर्गत स्थित सरकारी संपत्तियों को देशी-विदेशी कारपोरेट को लीज पर देने के नाम पर बेचने का काम हो रहा है। मेक इन इंडिया और ईज आफ डूइंग के नाम पर राष्ट्रीय एवं विदेशी कारपोरेट घरानों को संसाधनों को बेचा जा रहा है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों के साथ श्रम भी शामिल हैं। श्रम कानूनों को पूंजीपतियों के हित में संशोधित किया जा रहा है जिसमें काम के घंटे सहित न्यूनतम मजदूरी सामाजिक सुरक्षा और यूनियन बनाने के अधिकार को समाप्त किया जा रहा है। हर कार्य क्षेत्र में संविदा या ठेका पद्धति वाले रोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है और अब सरकार द्वारा सभी क्षेत्रों के लिए फिक्स्ड टर्म रोजगार की योजना को लाने का प्रयास किया जा रहा है।
 सभी फसलों का न्यूनतम वेतन समर्थन मूल्य फसल की लागत मूल्य से 50% से ऊपर होगा, का लोकप्रिय वादा करने के बावजूद सरकार द्वारा इस विषय में कोई कार्य नहीं किया गया है। एनडीए सरकार के कार्यकाल में किसानों द्वारा आत्महत्या के मामलों में वृद्धि देखी गई है। एनडीए सरकार द्वारा कृषि मजदूरों का न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है । खुदरा व्यापार में 100% एफडीआई के चलते देश भर में छोटे व्यापारी और रेडी खोमचा पटरी वालों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
 ज्ञापन में मांग की गई है कि न्यूनतम वेतन कानून में संशोधन करते हुए इसे सबके लिए लागू किया जाए और न्यूनतम वेतन ₹26000 प्रतिमाह नियत किया जाए, मालिकान के पक्ष में बनाई गई  चारों श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए, सार्वजनिक उपक्रम बैंक बीमा सहित सार्वजनिक संसाधनों के निजी करण की योजना को रद्द किया जाए, एनपीएस योजना को रद्द किया जाए और पुरानी पेंशन स्कीम लागू की जाए, मजदूर  विरोधी कानूनों को वापस लिया जाए, असंगठित क्षेत्रों के मजदूरों के लिए सर्वव्यापी सामाजिक सुरक्षा कानून बनाए जाएं, सभी कामगारों को ₹6000 प्रति माह पेंशन सुनिश्चित की जाए, रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि देश के करोड़ों बेरोजगारों को काम दिया जा सके, केंद्र एवं राज्य की सार्वजनिक इकाइयों के विनिवेश पर रोक लगाई जाए, बैंक के एनपीए के लिए जिम्मेदार उद्योगपति एवं पूंजीपतियों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई करते हुए वसूली सुनिश्चित की जाए, ट्रेड यूनियन का पंजीकरण 45 दिनों की सीमा के अंदर अनिवार्य किया जाए, आंगनवाड़ी, स्कीम वर्कर्स, मिड डे मील, आशा, रोजगार सेवक, शिक्षामित्र, आदि को मानदेय की जगह न्यूनतम वेतन निश्चित किया जाए और इन्हें राज कर्मचारी घोषित किया जाए, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए धनकर आदि के माध्यम से अमीरों पर कर लगाकर कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपयोग में सार्वजनिक निवेश निवेश में वृद्धि की जाए, ठेका मजदूर योजना कर्मचारियों को नियमित किया जाए और सभी को समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए।
ज्ञापन में कहा गया है की सरकार द्वारा अधिकांश कार्यवाहियां किसान, मजदूर, नौजवानों, विद्यार्थियों और आम जनता के खिलाफ की जा रही हैं और दूसरी ओर सरकार पूंजीपतियों का पक्ष लेकर दिन प्रतिदिन उनके मुनाफे बढ़ा रही है। यह सब देश हित में नहीं है। देश को बचाने के लिए सरकार की नीतियों को बदलने के लिए उस पर दबाव डालना होगा और इसके लिए जनता को एकजुट होकर लडना होगा और संघर्ष करना होगा।
  ज्ञापन देने वालों में विनय गुप्ता, प्रशांत शर्मा, अनुराग शर्मा, सतपाल सिंह, धनंजय सिंह, नरेश पाल, वीरेंद्र गुप्ता,  रविपाल सिरोही आदि श्रमिक नेता शामिल थे और प्रदर्शन में सैंकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल थे।

Ramswaroop Mantri

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