सुसंस्कृति परिहार
तालिबान द्वारा अधिग्रहीत किए गए अफगानिस्तान पर अपना शासन स्थापित करने के बाद से जिस तरह वहां के लोग भाग रहे हैं उससे तो लगता है यही रफ्तार रही तो वहां सिर्फ वही बचेंगे जो तालिबान की नीतियों के समर्थक होंगे ।जो भाग कर दूसरे देश पहुंचे हुए हैं वे वहां पर भी संतुष्ट नहीं हैं अब भारत को ही ले लीजिए अफगानिस्तान से एयर लिफ्ट हुई महिलाएं साफ कह रही हैं कि वे भारत तो आ गई हैं पर यहां तो इतनी बेरोजगारी है कि उन्हें नौकरी नहीं मिल सकती तो यहां रहने का क्या मतलब ?याद आता है समुद्र के रास्ते आने वाले रोहिंग्याओं का जो बड़ी मुश्किल से भारत पहुंचे थे और रोटी पाकर खुश हो लिए थे क्योंकि वे नौकरी नहीं छोटे मोटे काम के ज़रिए पेट भरने का सामर्थ्य रखते थे हालांकि उनके यहां पहुंचने पर सोग जैसा माहौल था । वे चूंकि कमज़ोर वर्ग के सताए हुए ग़रीब मुसलमान थे। बहरहाल अब हवाई जहाज से आए अफ़ग़ानिस्तान के ये पढ़ें लिखे लोग , समझदार मुसलमान आए हैं जो वापस नहीं जाना चाहते क्योंकि तालिबान के शरीयत और बंदिशों से बाहर निकले नए युग के लोग हैं । उन्होंने बीस साल पहले तालिबान शासन का दंश झेला है।
उधर तालिबान भागते लोगों को देखकर घबराहट में है इसलिए एयरपोर्ट के बाहर एकत्रित भीड़ को हटाने उन पर गोलियां बरसाकर,उन्हें वापस खदेड़ने की कोशिश में लगा है। अमरीका की फौजों के वापसी के दिन करीब हैं अभी एयरपोर्ट उनके कब्ज़े में है उनके जाने के बाद ही तालिबान शासन की सही तस्वीर सामने आएगी। एयरपोर्ट पर हुए आज दो ब्लास्ट में कुछ अमेरिकियों के भी घायल होने की ख़बर है । अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन क्या रणनीति बनाते हैं तब तक स्थितियां समझ से बाहर है।भारत में भी तालिबान से बातचीत करने सम्बन्धी हलचल बढ़ी है क्योंकि हमारे भी कई लोग अभी वहां मौजूद है। की योजनाओं पर वहां भारत का काम चल रहा है।आज एयरपोर्ट पर दो बम धमाके हुए बताया गया है ये धमाके आई एस आई एस ने तालिबान को बदनाम करने किए हैं।ये आत्मघाती हमले थे।
आज तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में कामकाजी महिलाओं को तब तक घर पर रहने को कहा जब तक कि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो जाती, उन्होंने कहा, “यह एक बहुत ही अस्थायी प्रक्रिया है।”क्योंकि अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद से महिलाओं में डर और घबराहट बढ़ गई है। 20 साल बाद अब महिलाओं को फिर से डर है कि उनकी आजादी उनसे छीन ली जाएगी। इसी बीच तालिबान ने अब कहा है कि कामकाजी महिलाओं का अभी घर पर ही रहना चाहिए क्योंकि उनके लड़ाकों को महिलाओं का सम्मान करने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है।
इससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि लड़ाकों को महिलाओं के ख़िलाफ़ जो प्रशिक्षण दिया गया उससे तालिबान के नेतृत्वकर्ता अब असंतुष्ट लगते हैं और वे लड़ाकों को महिलाओं का सम्मान करने की टे्निंग भी देने की योजना बना सकते हैं। इसलिए महिलाओं से घर में रहने की बात कर रहे हैं तथा इसे अस्थायी व्यवस्था मान रहे हैं।प्रथय दृष्टया तो यही लगता है कि तालिबान झूठ बोल रहा है किंतु वर्तमान हालात पर गौर करें तो यह जाहिर है कि तालिबान ने अपने पिछले शासन से यह भली-भांति समझ लिया है कि सख़्ती और ज़ुल्म ज़्यादतियों से शासन कायम नहीं रखा जा सकता है।जनता का दिल जीतकर ही सफल हुआ जा सकता है ।भागते हुए लोगों ने उन्हें हिला कर रख दिया है।
तालिबान यदि वास्तव में अपने लोगों की वापसी चाहता है तो उसे अपने आचरण में परिवर्तन तो लाना ही होगा साथ ही साथ नये युग के अनुरुप अपनी संहिताओं को भी बदलना होगा। जैसा कई मुस्लिम देश कर चुके हैं ।अच्छी बात ये है उन्होंने उस बात को समझा है जिनसे अफगान महिलाएं त्रस्त और नाखुश हैं और वहां से निकलने की तैयारी में है।यह भी सच है वहां से लोगों को दूसरे देश ले जाना,बसाना सहज नहीं है।वे जहां रहेंगे उनके साथ गैरों सा सलूक होगा।अपना वतन सबको अच्छा लगता है।उम्मीद है तालिबान इस जिम्मेदारी को समझते हुए हम-वतन अफगानियों के लिए अपने दरवाज़े खोलकर एक नई इबारत लिखेगा ।आमीन।





