हिमांशु कुमार
इस समय अमेरिका जिस आर्थिक ताकत के सामने पिछड़ रहा है वह है चीन, चीन से अमेरिका सीधे युद्ध नहीं कर सकता, इसलिए अमेरिका अब दक्षिण एशिया के इस इलाके में धर्मों की लड़ाईयां करवाएगा, मिडिल ईस्ट से लगा कर श्रीलंका धार्मिक इलाका है,यहाँ मुसलमान हैं, यहूदी हैं, हिन्दू हैं, बौद्ध हैं, नास्तिक कम्युनिस्ट हैं, सिंघली हैं,याद कीजिये अमेरिका पहले सोवियत संघ को अपने लिए चुनौती मानता था, तब उसने सोवियत संघ को तोड़ने के लिए मुजाहिदीनों अलकायदा को मदद दी, सोवियत संघ के चेचन्या के मुसलमानों को विद्रोह के लिए अफगानी मुजाहिदीन ने अमेरिकी मदद से ही भड़काया, सोवियत संघ के टुकड़े के दिए गये और अमेरिका का प्रतिद्वंदी खत्म हुआ
अब अमेरिका को चीन की ताकत खत्म करनी है, अभी भले ही चीन ने तालिबान को मान्यता दे दी है, लेकिन तालिबान का अगला निशाना चीन ही बनेगा, चीन में उइगर मुसलमानों के मुद्दे पर तालिबान चीन से भिड़ेगा, अमेरिका तालिबान को ऐसा करने के लिए उकसाएगा, ध्यान दीजिये अफगानिस्तान छोड़ कर जाने का समझौता अमेरिका ने अफगानिस्तान की सरकार या अफगानी सेना से नहीं किया, यह समझौता अमेरिका ने तालिबान से किया था,तालिबान और अमेरिकी सरकार मिलकर काम कर रहे हैं,अमेरिकी सरकार ने तालिबान से हुए समझौते के बाद अफगानिस्तान की सरकार या वहाँ की सेना की कोई मदद नहीं की, अब अफगानिस्तान की सेना के सारे हथियार और लोग तालिबान के कब्ज़े में हैं,यह हथियार अमेरिका के ही दिए हुए हैं, अब तालिबान के पास हवाई हमले करने की भी ताकत है, यह सब अमेरिका ने चीन को तोड़ने की अपनी योजना के तहत किया है ।
तालिबान को चीन पर हमले करने ही पड़ेंगे,अमेरिका इसी समझौते के तहत यहाँ से निकला है,सोवियत संघ की तरह चीन के भी टुकड़े हो सकते हैं,जैसे सोवियत संघ टुकड़े होने के बाद महाशक्ति नहीं रहा,वैसे ही चीन भी फिर महाशक्ति नहीं रहेगा,इस पूरे खेल में चीन का साथ ना भारत देगा ना पाकिस्तान,क्योंकि चीन के टूटने में भारत का फायदा है ! और पाकिस्तान की इतनी ताकत नहीं है की वो तालिबान से दुश्मनी मोल ले ले, इतना तय है की दक्षिण एशिया के इस इलाके को अगले युद्ध के लिए तैयार किया जा रहा है,युद्ध के बाद यह इलाका राजनैतिक तौर पर कमज़ोरर बंटा हुआ और आर्थिक तौर पर बर्बाद हो जाएगा, तब अमेरिका को इस इलाके में सस्ते मजदूर और कच्चा माल कौड़ियों के मोल हडपने से रोकने वाला कोई नहीं बचेगा और पूरी दुनिया में अमेरिका को चुनौती देने वाली एक भी ताकत नहीं बचेगी ।
हिमांशु कुमार ,सुप्रसिद्ध लेखक,गाँधीवादी चिंतक-,





