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कस्वाहा जंगल बचाने जंग हुई तेज

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सुसंस्कृति परिहार
बकस्वाहा की बंदर हीरा खदान हेतु तकरीबन सवा दो लाख वृक्षों को काटने के विरोध में यूं तो पूरे देश के पर्यावरणविदों ने असंतोष जाहिर किया है वे अपने तरीके से ऐतराज भी जता चुके हैं सुप्रीम कोर्ट में याचिका के अलावा एक हस्‍ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है जो वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के नाम है।म०प्र० के इंदौर ,भोपाल, छतरपुर ,पन्ना ,सागर,गरकमगढ़,निवाड़ी,अलीराजपुर,नरसिंहपुरऔर दमोह जिलों के अलावा उ०प्र०केबांदा,महोबा,चित्रकूट, हमीरपुर और फतहपुर में भी बराबर विरोध जारी है।कुछ जगह तो युवा जत्थे चिपको आंदोलन की तर्ज पर बक्स्वाहा में पेड़ बचाने चिपको का प्रशिक्षण भी ले चुके हैं।बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कोरोना कर्फ्यु से मिली छूट में इस आंदोलन को खुलकर समर्थन दिया है। जबलपुर, दमोह,कटनी में तो इस विषय पर बच्चों की चित्रकला , निबंध और कविता प्रतियोगिता भी हुई हैं।समर्थन में कई आडियो, वीडियो भी तैयार हुए हैं।लगता पूरे वेग जन गण  जंगल बचाने प्रतिबद्ध है।
इससे पहले छतरपुर में अलग-अलग तबकों की ओर से बक्‍सवाहा बचाने की अपील की गयी है। कोई दो सप्‍ताह पहले यहां उत्‍तराखंड के चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से लिपटने का एक अभियान शुरू किया गया था। चित्रकूट प्रमुख द्वार के महंत स्वामी मदन गोपाल दास ने बक्‍सवाहा के बम्हौरी गांव में पर्यावरण चौपाल लगायी थी और पेड़ कटाई को रोकने पर जोर देते हुए पेड़ों से लिपटकर उन्हें बचाने का संकल्प भी लिया था। अभी चार दिन पहले बिलकुल ऐसा ही अभियान अलीराजपुर के कटठीवाड़ा में युवाओं ने चलाया था।उधर महोबा जिले में बक्‍सवाहा को बचाने के लिए हवन पूजन का कार्यक्रम हुआ है। वहां के लोगों ने प्रधानमंत्री और दमोह के सांसद प्रहलाद सिंह पटेल को इससे पहले अपने खून से पत्र लिखा था। ऐसा पहली बार नहीं था। अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर 635 दिन तक अनशन कर चुके बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के संरक्षक तारा पाटकर, बुन्देलखण्ड राष्ट्र समिति के केन्द्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय , बीआरएस प्रमुख डालचंद ने अपने साथियों के साथ 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर 17वीं बार प्रधानमंत्री, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपने खून से खत लिखा था और बक्सवाहा जंगल को बचाने की मांग की थी। बांदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, फतेहपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी आदि जिलों में भी बुंदेलखंड के लोगों ने अपने खून से खत लिखकर बुंदेलखंड के इस जंगल को बचाने की गुहार लगायी थी।

पर्यावरण दिवस के आसपास ही नरसिंहपुर में कई कवियों और गीतकारों के फुटेज को मिलाकर बनाया गया एक वीडियो गीत भी जारी किया गया था जिसमें बक्‍सवाहा को बचाने का आह्वान था।मध्य प्रदेश की पर्यावरण विरोधी और पूंजीपतियों की रक्षक सरकार द्वारा प्रदेश के पर्यावरण और जंगल को नष्ट करने के फैसले के खिलाफ पूरे मध्यप्रदेश में राजनीतिक दलों ट्रेड यूनियनों और जन संगठनों द्वारा जोरदार आंदोलन हुआ।

उसी के तहत इंदौर में भी बारिश के बीच बकस्वाहा बचाओ समर्थक समूह ने पूर्व महाधिवक्ता आनंद मोहन माथुर के नेतृत्व बकस्वाहा जंगल बचाओ पर्यावरण बचाओ की मांग के समर्थन में संभाग आयुक्त कार्यालय के समक्ष मानव श्रृंखला बनायी गयी। जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों, ट्रेड यूनियनों, सामाजिक संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भागीदारी दी। इस दौरान संभाग आयुक्त कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम पर ज्ञापन दिया गया।

बकस्वाहा बचाओ समर्थक समूह इंदौर की ओर से रामस्वरूप मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि ऑक्सीजन को तरस रहे देश में छतरपुर स्थित बकस्वाहा के जंगलों में सवा दो लाख हरे भरे पेड़ों को काटने की तैयारी प्रदेश सरकार ने कर ली है। सरकार के इस फैसले के बाद देश भर के पर्यावरण प्रेमियों में रोष है।

इस दौरान प्रदर्शन में शामिल विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया के आदिवासियों और जंगलों के किनारे बसने वालों का दुर्भाग्य ही है कि उन्हें बार-बार उजड़ना पड़ता है, वह भी उनके अपने देशों के छद्म विकास के नाम पर। छद्म विकास इसलिए क्योंकि यह दुखद विस्थापन चंद पूंजीपतियों की तिजोरी भरने के लिए ही होता है । वक्ताओं ने कहा कि आप किसी भी स्थान के विस्थापन को देख सकते हैं। 

सरकार के विकास के दावों पर नेताओं का कहना था कि प्रशासनिक पदाधिकारी, राजनेता और कंपनी इस परियोजना के लाभ के रूप में 400 स्थानीय युवकों के रोजगार को सामने रखकर विकास की बात कर रहे हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या 400 लोगों के रोजगार के लिए 3,20,000 लोगों का दैनिक उपयोग का पानी और 27000 लोगों की सांसें रोक दी जाए ।

उधर, बक्सवाहा जंगल बचाओ मुहिम से जुड़े युवाओं, सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय समिति बनाने की तैयारी भी शुरू की गई है। इसके लिए एक आनलाइन बातचीत के जरिये तदर्थ समिति का गठन किया गया है। मेधा पाटकर, डॉ सुनीलम, अरविंद श्रीवास्तव और राजकुमार सिन्हा के मार्गदर्शन में गठित इस तदर्थ समिति में शुरुआती तौर पर 15 युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। यह तदर्थ समिति देश—प्रदेश के विभिन्न संगठनों के जरिये युवाओं, छात्रों, आम जन तक पहुंचकर बक्सवाहा बचाओ अभियान को तेज करेगी ।

 छतरपुर जिले के बक्सवाहा के जंगल बचाने बुंदेलखंड में आंदोलन खड़ा होना शुरू हो गया है । केन्द्र और राज्य सरकार को खुले चैलेंज के साथ बुंदेलखंड के एक मीडिया संस्थान बुंदेली बौछार ने जनांदोलन में अपनी सहभागिता दिखाना शुरू कर दी है । जंगल बचाने  के लिए दिया गया चैलेंज ” हम चिपक हैं नोईं, हमतों चिपका देहें….”

दमोह में युवाओं का एक जत्था द्रगपाल सिंह के नेतृत्व में एक जुलाई को बक्स्वाहा की ओर पूरे जोश खरोश के साथ बकस्वाहा रवाना हुआ इसे जत्थे को दमोह के सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ विभिन्न राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों और नागरिकों ने तहसील ग्राउंड पहुंचकर आशीर्वाद  देकर रवाना किया है।जत्थे का शहर के अलावा रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोगों ने उत्साह पूर्वक स्वागत किया।ये जत्था रास्ते में पड़ने वाले गांवों के लोगों को जागरूक करते हुए नरसिंहगढ़ ,बटियागढ़ होते हुए कल बक्सवाहा पहुंचेगा ।इस जत्थे में पुणे से आए कलाकार युवा साथी जनगीत गाते चलते हैं । दिल्ली से आए युवा साथी भी साथ चल रहे हैं।बक्सवाहा में कल दमोह से कई साथियों के पहुंचने की उम्मीद है।

 दूसरी ओर बक्सवाहा  में हीरा खनन के लिए जंगल की कटाई को लेकर लगातार हो रहा विरोध रंग लाया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले को लेकर पर्यावरण प्रेमियों द्वारा एनजीटी में एक याचिका दायर की गई थी।

इस मामले पर गुरूवार को भोपाल में सुनवाई हुई और एनजीटी ने चीफ कन्जर्वेटर फॉरेस्ट को आदेश जारी किया है कि फॉरेस्ट कन्जर्वेशन एक्ट, इंडियन फॉरेस्ट एक्ट और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पूरी तरह पालन किया जाए। इससे पहले एनजीटी ने बिड़ला ग्रुप की माइंनिंग कंपनी को नोटिस जारी किया था और 15 दिन के भीतर जवाब मांगा था। अब NGT भोपाल में हुई सुनवाई का विस्तृत आदेश जारी हुआ है और याचिकाकर्ता को निर्देश दिए गए हैं कि खनन कम्पनी समेत अन्य पक्षकारों को याचिका से सम्बंधित दस्तावेज़ उपलब्ध करवाए। इसी के साथ कहा गया है कि वन विभाग की अनुमति के बगैर एक भी पेड़ बक्सवाहा में न कटे ये सुनिश्चित कराया जाए। एनजीटी ने खनन कम्पनी समेत अन्य पक्षकारों को चार सप्ताह में शपथ पत्र में जवाब देने के निर्देश भी दिए हैं। इस मामले पर अब अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

कुल मिलाकर देखा जाए तो यह आंदोलन निरंतर तीव्रतर होता जा रहा है NGT की कार्रवाई से थोड़ी बहुत तसल्ली तो मिलती नज़र आ रही है लेकिन सिर्फ इस कारण आंदोलन को कमज़ोर ना किया जाए बल्कि इसे और बढ़ाकर दबाव बनाना होगा क्योंकि सरकार इस मुद्दे पर आसानी से हटने वाली नहीं है वह पूंजीपतियों की कितनी हितैषी है ये किसी से छिपा नहीं है इसीलिए इस आंदोलन को और धारदार बनाने की ज़रूरत है ।लीज़ जब तक खारिज ना हो जंगल की सुरक्षा में मुस्तैद रहना होगा।

Ramswaroop Mantri

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