इतिहास साक्षी है
घटनाएं संकेत दे रही हैं
कि अबयुद्ध की शुरूआत बहुत जरूरी है
क्योंकि अब तख्त के नीचे की
सख्त संवेदनहीन चट्टानें सरकने लगी हैं
खौलने लगा हैलाल लाल लावा
और उसके नीचे धधक रही है आग।
जी हाँ ! यह आम आदमी के मन मस्तिष्क में लगी आग है ।
क्योंकि अब आम आदमी ने शुरू कर दिया है
सोचना, समझना।
इस आग को बुझाने के लिए
लहू की बरसात बहुत जरूरी है।
रामकिशोर मेहता ,संपर्क – 919408230881,ईमेल – ramkishoremehta9@gmail.com
संकलन -निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, -9910629632,ईमेल-





