अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

पड़ोसी देश में भी साहिब का पुतला दहन चिंतनीय

Share

सुसंस्कृति परिहार
हालांकि भारत देश में पुतला दहन की परम्परा अति प्राचीन है।रावण ,कुम्भकर्ण के पुतलों के दहन का कार्यक्रम तो भारत में ही नहीं बल्कि नेपाल , इंडोनेशिया में दशकों से हो रहा है अब तो जहां जहां भारतवंशी मौजूद हैं वे भी प्रतीक स्वरुप यह कार्य श्रद्धापूर्वक करते हैं।इसे अन्याय पर न्याय की विजय के रूप में देखा जाता है। पाकिस्तान में मौजूद हिंदू भी इसे जलाकर वहां के अन्याय के प्रतिरोध स्वरुप इसे हमेशा जलाते हैं किंतु कहीं कोई आलोचना का सबब नहीं बनता।इस बार पड़ोसी मुल्क नेपाल में जो पहले इकलौता हिंदु राष्ट्र हुआ करता था, में हमारे साहिब के पुतले फूंकने का समाचार है।इससे पहले वहां की सरकार ने इसे ना होने देने की घोषणा की थी और ऐसा करने वालों को जेल भेजने की चेतावनी भी दी थी क्योंकि वह पड़ोसी देश भारत से सम्बंध खराब नहीं करना चाहती। नेपाल सरकार ने पीएम मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर सख्ती करने के आदेश दिए थे नेपाल में नई सरकार बनने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन दल माओवादी और समाजवादी पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं द्वारा भारत विरोधी प्रदर्शन किए जाने और भारतीय प्रधानमंत्री का पुतला जलाए जाने की घटना को नेपाल सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है ।

पीएम मोदी का पुतला फूंकते हुए झुलसे कांग्रेस के कई कार्यकर्ता - congress  protesters injured while trying to burn effigy of PM Narendra Modi in  Shimla | Navbharat Times


समझ में नहीं आता कि हमारे साहब जी का पुतला जलाकर वे क्या हासिल करना चाहते हैं।हम अपने देश में जो चाहें करें यह ठीक नहीं। अच्छा हुआ वहां की सरकार ने इसकी निन्दा भी की और सम्बंधित युवाओं को जेल भेज दिया। जबकि हमारे यहां तो इस बार बड़ा ही गजब हो गया लोग रावण को भूल ही गए क्योंकि उसका कद कोरोना की वज़ह से मात्र पांच फीट ही कर दिया गया था।उसको जलाने का मज़ा ना रहा तो लोगों ने ऐसे ऐसे पुतले बनाए कि ग़ज़ब हो गया। साहिब तो रावण के स्टार प्रचारक के रूप में छा गए। उनके दस सिरों में हम दो हमारे दो के साथ प्रिय आज्ञाकारी मंतरी भी शामिल थे। सबसे आश्चर्यजनक तो नगपुरिया महाराज का दीप्तीवान तेजोमय पुतला था।जाने क्या सूझी लोगों को इन महत्वपूर्ण लोगों को रावण की जगह स्थापित कर दिया।विद्यावान महाज्ञानी रावण भक्त इसे रावण के तिरस्कार के रुप में देख रहे हैं । ठीक ही है उनके विचार रावण का कद कितना बौना है इन महामनाओं के बीच।इनके अध्यायों और जुल्मों सितम के बीच रावण कहीं नहीं ठहरता।
जय हो जनता जनार्दन की जिसने रावण से बड़े रावणों को तलाश लिया और देश में व्याप्त अन्याय के अध्याय के प्रतिकार स्वरुप चोरी छुपे इन पुतलों को जला दिया । मन के आक्रोश को निकाल कर साहिब के दल बल को चेतावनी भी दे डाली कि हमने अन्यायियों को जान और पहचान लिया है।पुलिस प्रशासन बराबर यहां ऐसे काम रोकने सक्रिय रहा ।कुछ लोगों की पकड़ धकड़ हुई ।बाद में उन्हें छोड़ भी दिया गया। जन-मानस में ये रावणी छवियां जिस तरह उभरी हैं।वह जनता जनार्दन की पीड़ाओं को दर्शाता है। इससे साहिब जी सचेत और सतर्क होने की ज़रूरत है किसान उत्पीड़न,बढ़ती मंहगाई और  पूंजीपति मित्रों की लूट आपको ले डूबेगी। पड़ोस से बढ़ते नेपाल और चीन के खतरों को सहजता से ना लें।  चारों ओर आग लगी हुई और जब आग लगती है साहिब तो कुछ ना पूछिए  आसमां को भी रुला देती है आग ।पुतलों की आग भले बुझ गई हो यहां और पड़ोस नेपाल में पर दिलों में लगी आग आसानी से नहीं बुझती। जनता की शक्ति बड़ी होती है।वह हिटलर, मुसोलिनी को मात दे सकती है फिर अन्यायी,अत्याचारी कोई भी हो उसका अंत सुश्निचित है।

ReplyReply to allForward

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें