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 फैसला !धोनी को फिर कप्तानी सौंपी है तो उसके हैं कई कारण

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चंद्रशेखर शर्मा

राजनीति पर आने से पहले एक खबर आप जान लीजिए। खबर क्रिकेट की है और यह है कि आईपीएल के बाकी मैचों में चेन्नई सुपर किंग्स की कप्तानी फिर से महेंद्रसिंह धोनी करेंगे ! जी हां, इस आईपीएल में रवींद्र जडेजा सीएसके की कप्तानी कर रहे थे। बीच आईपीएल में उन्होंने कप्तानी तज दी है, यह कहते हुए कि वो अपने खेल पर ज्यादा फोकस करना चाहते हैं।

आप जानते हैं कि चेन्नई सुपर किंग्स को एन. श्रीनिवासन और उनकी कम्पनी संचालित करते हैं। सो सीएसके के किसी भी ऐसे फैसले में सर्वोच्च या फाइनल अथॉरिटी वो। कहने का मतलब यह कि चेन्नई की टीम के ऊपर एक सुपर टीम भी है ! वो टीम, जो उसकी मालिक है ! सो खबर के साथ यह जानना जरूरी है कि यह फैसला किसका है।

आइए, अब राजनीति की और देश की बात करें। क्या देश में भी ऐसा नहीं होना चाहिए कि यहां भी एक सुपर टीम हो ? वो सुपर टीम जो यह देखे कि देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री वांछित नतीजे दे रहे हैं या नहीं ? मुख्यमंत्री क्या, बल्कि मुमकिन हो तो पीएम को भी इसी पैमाने पर कसे ! आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि सुपर टीम वाला यह सिस्टम कांग्रेस और भाजपा सहित ज्यादातर दलों में कुछ कमीबेशी के साथ रहा है और अभी भी है। हां, बहुत दलों में यह सुपर टीम एक परिवार या उसका मुखिया है। गांधी परिवार, मुलायम परिवार और लालू परिवार वगैरा इसमें शामिल हैं। भाजपा इस मामले में थोड़ी अलग मानी जाती है। यहां आरएसएस को उसकी मातृ संस्था कहा जाता है। अलबत्ता क्या आरएसएस को भाजपा की वो सुपर टीम माना जा सकता है ? अभी तो यही धारणा है कि देश और भाजपा को केवल दो (गुजराती) लोग चला रहे हैं ! जो हो।

विदित हो कि भारत में गांधी परिवार के लोगों और अटल बिहारी वाजपेयी आदि को छोड़ दें तो अनेक प्रधानमंत्री ऐसे हुए हैं, जो पहले मुख्यमंत्री भी रहे। नरेंद्र मोदी भी इसी में शामिल। अलबत्ता मोदी ऐसे पहले पीएम हैं, जो चार बार मुख्यमंत्री रहे और जिन्हें उनकी पार्टी ने बतौर प्रधानमंत्री उम्मीदवार मैदान में उतारकर चुनाव लड़ा था। गोया वो भाजपा की जो भी सुपर टीम थी या है, यह उसका फैसला था !

यहां सवाल यह है कि राज्यों के चुनाव में भी ऐसा किया जाना व्यवहारिक और ठीक क्यों नहीं हो सकता ? क्रिकेट में देखिए। वहां यही होता है। वहां एक सुपर टीम होती है, जो टीम चुनती है, कप्तान चुनती है, उनकी घोषणा करती है और फिर उनको कहा जाता है, जाइए और परफॉर्म करके दिखाइए ! राजनीति में भी, खासकर राज्यों के चुनाव में, ऐसा क्यों नहीं हो सकता ? इससे भी अहम सवाल यह है कि क्या भाजपा ऐसा करना शुरू भी नहीं कर चुकी ? आखिर राज्य के मतदाता को चुनाव पहले यह जानने का हक क्यों नहीं कि उसके सामने मुख्यमंत्री चुनने के लिए कौनसे तय विकल्प हैं ? लोकतंत्र का मतलब तो यही कहा गया है कि लोकतंत्र यानी जनता का, जनता के लिए और जनता के द्वारा। यदि ऐसा है तो उसे चुनाव के पहले पता होना चाहिए कि राज करने का मौका मिलने पर कौन ऐसा बंदा है, जो टीम का कप्तान बतौर परफॉर्म करने वाला है या अपेक्षित नतीजे डिलीवर करने वाला है। तर्क दिया जा सकता है कि थोड़े से फेर के साथ यह किया जाता है। वो ऐसे कि सरकार चलाने के पहले मुख्यमंत्री घोषित कर दिया जाता है और यह लोकतांत्रिक परंपरा के जरिए ही किया जाता है। यानी सारे विधायक मिलकर अपना नेता या मुख्यमंत्री चुनते हैं। गोया विधायकों को जनता चुनती है और वही आगे जनता के नुमाईंदे बतौर मुख्यमंत्री चुनते हैं। हालांकि यह कितना लोकतांत्रिक (!) होता है, यह देश को मालूम है। फिर भी यह लोकतांत्रिक होता है तो ऐसा होता है गोया खिलाड़ी मिलकर टीम का कप्तान चुनें। हकीकतन राजनीति में ज्यादातर मामलों में ऐसा या सुपर टीम तय करती है या मुख्यमंत्री बनने वाला खुद। मक्कारी यह कि उसे लोकतांत्रिक परंपरा कहा-माना जाता है। यहां सवाल यह है कि जब सुपर टीम या किसी व्यक्ति द्वारा यह किया जाता है तो उस कथित लोकतांत्रिक परंपरा की जरूरत ही क्या है ? अपन को तो उसकी कोई उपयोगिता भी नजर नहीं आती। सो निवेदन यह है कि जो निर्णय आप, बतौर सुपर टीम, चुनाव नतीजे के बाद लेते हैं, उसे चुनाव में उतरने के पहले ही कर लिया जाए ताकि लोगों को पहले से पता रहे कि चुनाव जीतने वाली पार्टी किसे सीएम बनाएगी। क्या ये अधिक बेहतर नहीं होगा ? सोचना आप। सारे राजनीतिक दल और जानकार भी सोचें तो हर्ज न।

बहरहाल एन. श्रीनिवासन की सुपर टीम ने महेंद्रसिंह धोनी को फिर कप्तानी सौंपी है तो उसके कई कारण। हैं। पहला यह कि धोनी के होने के बावजूद जड़ेजा की कप्तानी में टीम अपेक्षित रिजल्ट नहीं दे पा रही थी। दूसरा, यह शायद धोनी का आखरी आईपीएल है। तीसरा, मुंबई इंडियन्स के प्ले ऑफ से बाहर होने के बाद चेन्नई का एक बड़ा रोड़ा दूर हो चुका है। कुछ दीगर कारण भी होंगे। उधर, बतौर कप्तान धोनी इतना साबित कर चुके हैं कि उनके पास खोने को कुछ न है। देश के महानतम कप्तान रहे हैं वो !
चंद्रशेखर शर्मा

Ramswaroop Mantri

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