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तीन पुलिसकर्मियों का कारनामा,फर्जी बिल लगाकर उड़ा लिए 3 करोड़ रुपये से अधिक

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भोपाल पुलिस हेडक्वार्टर में 3 करोड़ रुपये से अधिक की धांधली का मामला सामने आया है.मध्य प्रदेश के पुलिस हेडक्वार्टर में धांधली की खबर है. यह धांधली किसी और ने नहीं, बल्कि यहां एकाउंट शाखा में तैनात तीन पुलिसकर्मियों ने ही किया है. आशंका है कि फर्जी बिल लगाकर इन पुलिसकर्मियों ने सरकारी खजाने से तीन करोड़ से भी अधिक रकम की हेरफेर की है. मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने जांच के लिए स्पेशल टीम का गठन किया है. पहली बार यह मामला जनवरी महीने के शुरू में सामने आया था. इसके बाद 5 जनवरी को इन तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ भोपाल के जहांगीराबाद थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अरेस्ट किया गया था. यह धांधली हेडक्वार्टर में ही तैनात तीन पुलिसकर्मियों ने फर्जी मेडिकल बिल लगाकर अंजाम दिया है. मामला प्रकाश में आने के बाद जांच शुरू कर दी गई है.

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि सूबेदार नीरज कुमार, हरिहर सोनी और हर्ष वानखेड़े हेडक्वार्टर में 3 साल से फर्जी बिल लगा रहे थे. हालांकि यह तीनों उस समय पकड़ में आए, जब इन्होंने 75 लाख रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए. आरोपी पुलिसकर्मी कभी खुद के बीमार होने का बिल लगाते तो कभी अपने परिवार के किसी सदस्य को बीमार बता कर मुख्यालय में फर्जी बिल पेश कर देते थे. इनकी ओर से लगातार सामने आ रहे बिलों पर ट्रेजरी संचालक को संदेह हुआ तो उन्होंने लेखा शाखा के अफसरों को इस संबंध में पत्र लिखा था.

ट्रेजरी संचालक को हुआ शक

इस पत्र में कहा गया था कि इन तीन पुलिसकर्मियों के नाम औसत से कई गुना ज्यादा भुगतान हुआ है. ट्रेजरी संचालक ने अफसरों का ध्यान आकृष्ठ कराते हुए जांच कराने की शिफारिस की थी. इसके बाद एडीजी अनिल कुमार ने शाखा स्तर पर एक गोपनीय जांच कराई. इसमें पाया गया कि सूबेदार नीरज कुमार, एसआई हरिहर सोनी और एएसआई हर्ष वानखेड़े पर लगाए गए सभी आरोप सटीक है. इस जांच रिपोर्ट को देखते हुए उन्होंने तीनों को 8 जनवरी को ही तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था.

तीन साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा

अधिकारियों के मुताबिक साल 2022, 2023 और 2024 में हर्ष के खाते में करीब 35 लाख, हरिहर के खाते में करीब 24 लाख और नीरज के खाते में करीब 17 लाख रुपये का भुगतान हुआ है. जांच के दौरान पता चला कि आरोपी पुलिसकर्मी हर्ष वानखेडे इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड है. आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह 30 से 40 प्रतिशत कमिशन लेकर फर्जी मेडिकल बिलों पर भुगतान कराता था. उसने बताया कि इस तरीके से भुगतान करवाने वाले और भी कई कर्मचारी हैं. ऐसे में महकमे को अंदेशा है कि यह घोटाला 3 करोड़ रुपये से भी अधिक का हो सकता है.

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