अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

दिवंगत टी एन शेषन का स्वर्ण युग बनाम आज के सत्ता के चाटुकार चुनाव आयुक्तों का युग !

Share

निर्मल कुमार शर्मा,

कुछ लोग इस दुनिया को अपनी प्रतिबद्धता, जीवटता , कर्मठता ,सत्यता और अपनी कर्तव्यपरायणता से ऐसी राह दिखा जाते हैं ,जिसे उनके जाने के बाद भी दुनिया उन्हें एक ‘देवदूत ‘ के रूप में याद करती है। उन्हीं लोगों में चालीस के दशक में पैदा हुए 1955 बैच के तमिलनाडु कैडर के आईएएस ,जो मात्र 21वर्ष की उम्र में आईएएस परीक्षा को सर्वोच्च अंकों के साथ उत्तीर्ण किए, जिनको 1962 में तमिलनाडु में एक भ्रष्ट अधिकारी के खि़लाफ कार्यवाही करने पर मात्र छः घंटों में छः बार ट्रांसफर करके दण्डित करने का कृत्य किया गया ,जिन्होंने भारत में चुनाव को पारदर्शी बनाने के लिए पूरी राजनैतिक जमात के पूरे विरोध और रोड़े लगाए जाने के बावजूद भी पूरे देश के मतदाताओं का चुनाव पहचान पत्र बनवाकर ही दम लिया । वे कोई और नहीं केरल में जन्में तिरूनेल्लेई नारायण अय्यर शेषन थे ,जिन्हें सारा देश टी.एन.शेषन के नाम से जानता है।
भारतीय भ्रष्ट राजनीतिक परिवेश के उस समय के दूषित माहौल में शेषन साहब चुनाव आयुक्त बने ,जिस दौर में बंदूकों के बल पर मतपेटियों को लूटने का ,नेताओं द्वारा चुनाव आचार संहिता का बार-बार उल्लंघन करने का काम उनके बांएं हाथ का खेल बन चुका था ,राजनैतिक नेताओं द्वारा चुनावों में सरकारी कर्मचारियों ,हेलिकॉप्टरों का धड़ल्ले से दुरूपयोग करना , साम्रादायिक विद्वेष फैलाना तथा धनबल ,बाहुबल और सत्ता बल का जमकर प्रयोग करने में जरा भी हिचक नहीं होती थी । इन सारी बुराइयों के ख़िलाफ़ शेषन साहब अकेले चट्टान की तरह खड़े होकर चुनाव आयुक्त की संवैधानिक रूप से प्राप्त शक्ति के बल पर उक्त सारी बुराइयों को जड़-मूल सहित उखाड़- फेंककर भारत जैसे देश में निष्पक्षतापूर्वक चुनाव कराने वाले प्रथम चुनाव आयुक्त बन गये थे ।
उनके चुनाव आयुक्त बनने से पूर्व भारतीय चुनाव आयोग की कोई कद्र ही नहीं थी हर तरफ चुनावों में धांधली ,बेईमानी और अव्यवस्था का बोलबाला था ,परन्तु टी.एन.शेषन ने अपने कार्यकाल में उस समय के चुनावों में धांधली करके जीतने वाले नेताओं को चुनाव आयुक्त की कानून सम्मत ईमानदारी ,सख्ती और पारदर्शिता से चुनाव करा देने के कर्तव्यनिर्वहन ने छठी का दूध याद दिला दिया ! उनके समय में लोगों में एक कहावत बड़ी मशहूर हुई थी कि, ‘नेता या तो भगवान से डरते हैं या केवल शेषन से ! ‘ टी.एन.शेषन ने भी एक बार कहा था ‘हम केवल भारतीय कानूनव्यवस्था का ईमानदारी और निष्ठा से पालन करते हैं ,अगर किसी को परेशानी है तो कानून को बदल दें। ‘
शेषन साहब 12 दिसम्बर 1990 से 11 दिसम्बर 1996 तक चुनाव आयुक्त रहे ,उन्होंने अपने कार्यकाल में इतना ज्यादे सुधार किया कि अभी तक भारत की जनता वर्तमान समय में चुनावों के समय कुटिल राजनैतिक जमात द्वारा जब भी चुनाव संहिता का उल्लंघन होते देखती है ,तब टी.एन.शेषन को दिल से याद करती है कि ‘काश आज टी.एन.शेषन होते ! ‘ भारतीय परिदृश्य में टी.एन.शेषन के दौर का इतना सम्मान है कि स्वतंत्रता के बाद से आज के दौर को दो विभाजक काल में बांट दिया गया है एक शेषन के पहले का दौर और दूसरा शेषन के बाद का दौर । भारतीय जनमानस के दिलोदिमाग में टी.एन. शेषन का यह अप्रतिम सम्मान है ।
बड़े अफ़सोस और शर्म की बात है कि टी.एन.शेषन की विरासत को अपवाद स्वरूप उनके दो-चार उत्तराधिकारी चुनाव आयुक्तों को छोड़ दें ,तो ज्यादेतर लोग नहीं संभाल पाए ! आज वर्तमान समय में चुनाव आयुक्त तो सत्तारूढ़ सरकार के कर्णधारों का एक ‘कठपुतली मात्र ‘ बनकर रह गये हैं ,जो चुनाव अधिकारी कर्तव्यनिष्ठ हैं और ईमानदारी से चुनाव कराना चाहते हैं ,उनको वर्तमान सत्ता तरह-तरह से प्रताड़ित करने से नहीं चूक रही है । आज वर्तमान समय में भारतीय लोकतंत्र में चुनाव पुनः एक मजाक बनकर रह गया है ,जहाँ हर तरफ बाहुबलियों मतलब गुँडों,धन्नसेठों,मॉफियाओं, दागियों ,दंगा कराने वाले और धार्मिक वैमनस्यता फैलाकर वोटों का हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करके येनकेनप्रकारेण सत्ता हथियाने वालों के हाथों में ये लोकतंत्र बंधक बनकर रह गया है ।
आज इस देश को और यहाँ के तरह-तरह के मॉफियाओं और दागियों की बंधक बनी भारतीय लोकतंत्र को पुनः टी.एन.शेषन जैसे अपने कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध और ईमानदार तथि कर्मठ चुनाव आयुक्त की सख्त जरूरत है,जो भारत में चुनाव के समय ही ऐसे दागी व मॉफिया स्वभाव के प्रत्याशियों को रोककर आज के संसद में उपस्थित 43 प्रतिशत अपराधियों को ‘माननीय सांसद जी ‘ बनने से रोक दे । हम सभी भारत के लोग शेषन जैसी निष्पक्ष चुनाव प्रणाली कराने वाले चुनाव आयुक्त को नियुक्त करने के लिए सरकारों पर दबाव डालें और निष्पक्ष चुनाव में अडंगा डालने वाले कुटिल लोगों की जबर्दस्त भर्त्सना और विरोध करें।
स्वर्गीय टी.एन.शेषन एक चुनाव आयुक्त के रूप में एक ऐसी मिशाल कायम कर गये हैं जो वर्तमान काल में एक स्वप्न सरीखा ही लग रहा है । आज फिर भारतीय राजनैतिक परिदृश्य टी.एन.शेषन के पूर्व के दौर से भी बुरे माहौल में चला गया है ! यह भारतीय लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुःखद है वर्तमान तीनों चुनाव आयुक्त सत्ताधारियों के पिंजरे के तोते बन कर दुम दबाकर बैठें हैं। इस दुःखद दौर में बरबस ही स्वर्गीय टी.एन. शेषन जैसे बहादुर ,निष्पक्ष और दबंग चुनाव आयुक्त की स्मृतियां ताजा हो जातीं हैं वे अगर आज होते तो इन भ्रष्ट और सांप्रादायिक आग उगलने वाले और सामाजिक,धार्मिक तथा जातिवादी वैमनस्यता फैलाकर वर्तमान समय के सौहार्द पूर्ण माहौल को बिगाड़ कर अपने वोट के लिए देश की फिंजा बर्बाद करने वाले कथित नेताओं की नकेल कसकर उन्हें आज उनकी औकात अवश्य बता देते !

-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उ.प्र.

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें