शिवानन्द तिवारी ,पूर्व सांसद
कल कश्मीर के पहलगाम में जो आतंकी घटना हुई उसमें 26 लोग मारे गए. अख़बारों में तसवीरें भी छपी हैं. एक तसवीर देखकर मेरी आँखें डबडबा गई . वह एक लड़की की थी . जो मेरी पोती के उम्र की होगी. पिछले सोलह तारीख को उसकी शादी हुई थी. पति-पत्नी हनीमून मनाने स्विट्ज़रलैण्ड जाने वाले थे.लेकिन उनको वहाँ का भीजा नहीं मिला.इसलिए वे कश्मीर के पहलगाम पहुँचे थे. जिसे मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता है. वहाँ टूरिस्टों के लिए यही मौसम है. काफ़ी लोग वहाँ सपरिवार जाते हैं. नये नये विवाहित जोड़े भी वहाँ हनीमून मनाने जाते हैं. यह जोड़ी भी इसीलिए वहाँ गई थी. पति के मृत शरीर के बगल में वह लड़की जड़वत बैठी थी. जैसे क्या हुआ वह समझ नहीं पा रही है. उसका घर अभी बसा भी नहीं कि उजड़ गया. उसका सपना बिखर गया.

आतंकियों की संख्या पाँच छः बताई जा रही है. उनके निशाने पर हिन्दू थे. छब्बीस लोगों की हत्या हुई. कई घायल हुए. मारे गए लोगों में एक को छोड़कर बाक़ी सब हिंदू थे . एक मुसलमान था. वहाँ गाड़ी का रास्ता नहीं है. पर्यटक घोड़ी पर ही घूमते हैं. घोड़ी वाले सभी मुसलमान हैं. अगल बगल के गाँवों के गरीब मुसलमान. यही उनकी दाल रोटी का धंधा है.
गोली की आवाज़ सुनकर सभी भाग गये. लेकिन एक घोड़ी वाला नहीं भागा. उसका नाम आबिद बताया गया है. आतंकियों ने उसको भागने के लिए भी कहा. लेकिन वह अपने ग्राहक को घोड़ी पर छोड़कर भागने के लिए तैयार नहीं हुआ. आतंकियों ने उसको भी मार दिया. पुलवामा की घटना के बाद उसके विरोध में पूरे कश्मीर में हड़ताल हुई. कई जगहों पर प्रदर्शन हुआ. इस घटना की निंदा की गई. इस आतंकवादियों विरोधमें ग़ुस्से का इज़हार किया गया . राजधानी श्रीनगर इस घटना के विरोध में बंद रहा. लोग बता रहे हैं कि इस तरह का बंद पैंतीस पहले हुआ था?
लेकिन गंभीर सवाल यह कि यह घटना हो कैसे गई. 370 के हटाए जाने के बाद वहाँ का शासन मोदी सरकार के हाथ में है. एक ढंग से गृह मंत्री अमित शाह जी ही वहाँ का शासन चला रहे हैं. तीन सौ सत्तर हटाने प्रस्ताव संसद में उन्होंने ही पेश किया था.जम्मू कश्मीर में अभी हाल में विधानसभा का चुनाव हुआ
था. उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में वहाँ सरकार बनी है.
पिछले दिनों अमित शाह जी ने कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक की थी. लेकिन जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के मुख्य मंत्री को उस बैठक में शामिल नहीं किया गया.पहलगाम की घटना पर सवाल गृहमंत्री जी से ही बनता है.कैसे वहाँ आतंकी घटना हो गई ? इसकी पूर्व सूचना आपको क्यों नहीं मिल पाई ! जब टोह लगाने के लिए आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो)के लोग वहाँ लगाए गये हैं. स्थानीय पुलिस की भी सीआईडी के लोग हैं. पहलगाम में आतंकी हमला हो सकता है इसकी जानकारी अमित शाह जी को पहले क्यों नहीं मिली ?
जब की पिछले दिनों भी कश्मीरी में छिटपुट आतंकि हमला होता रहा है. एक घटना में तो हमारे बिहार का ही एक आदमी मारा गया था. कश्मीर में पर्यटकों के घूमने का यही मौसम है. पुलवामा तो कश्मीर का मिनी स्विट्जरलैंड कहलाता है. पर्यटकों के बीच वह सबसे लोकप्रिय जगह है. फिर भी वहाँ सुरक्षा के लिए अर्द्धसैनिक बल या स्थानीय पुलिस के जवानों की तैनाती क्यों नहीं की गई थी? पहलगाम की घटना तो अमित शाह जी की घोर घोर असफलता है. पिछले डेढ़ दो साल से मणिपुर जल रहा है.. यह गृहमंत्री की अक्षमता का परिचायक है.या नहीं ? अगर गृह मंत्रालय उनसे सँभल नहीं रहा है. तो वो यह मंत्रालय वे छोड़ क्यों नहीं देते ?
पहलगाम में नरसंहार करने वाले मुसलमान थे. उन्होंने पूछ पूछ कर हिंदुओं की हत्या की. देश में तो अमित शाह जी की पार्टी ने तो पहले से देश के मुसलमानों के खिलाफ वातावरण बना रखा है. इस घटना से माहौल और जहरीला हो जाएगा.
कोई यह नहीं देखेगा कि पहलगाम की घटना में छपी ख़बरों के अनुसार हत्यारों की संख्या छह थी. लेकिन उसी घटना के विरोध में कश्मीर के मुसलमानों की लगभग शतप्रतिशत आबादी सड़क पर आ गई. लेकिन कौन इसको देखता है! हम इस जघन्य कांड की घोर निंदा करते हैं. प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध करते हैं कि कश्मीर मामले को अमित शाह से लेकर अपने हाथ में ले ले





