मुनेश त्यागी
आजकल “दा केरला स्टोरी” चर्चा में है। इसका देश के अधिकांश सिनेमाघरों में प्रदर्शन किया जा रहा है। मगर देश के प्रधानमंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री, इस फिल्म का बढ़-चढ़कर हवाला दे रहे हैं और प्रशंसा कर रहे हैं और मां बाप बच्चों से गुजारिश कर रहे हैं कि वे इस फिल्म को जरूर देखें। मध्य प्रदेश में तो इसे टैक्स फ्री भी कर दिया गया है। इस फिल्म में हिंदू औरतों का धर्मांतरण करके उन्हें मुसलमान बनाना और उनका आतंकवादी गतिविधियों में लगाना मुख्य मुद्दा बनाया गया है। इस फिल्म में “लव जिहाद” नामक षड्यंत्र को बढ़ा चढ़ा कर दिखाया गया है।
आइए देखते हैं कि लव जिहाद के बारे में केरल के मुख्यमंत्रियों और दूसरे लोगों का क्या कहना है। केरल के तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने राज्य विधानसभा में 2006 से 2012 तक के धर्मांतरण के आंकड़े पेश करके बताया था कि उपरोक्त अवधि में 7,713 लोगों ने धर्मांतरण करके इस्लाम धर्म अपनाया था जबकि इनमें से 2803 धर्मांतरण करके फिर से हिंदू बन गए। उन्होंने यह भी बताया था कि ईसाई धर्म अपनाने वालों के आंकड़े उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने आगे जानकारी दी थी कि जिन लोगों ने 2009 से 2012 के बीच इस्लाम धर्म अपनाया था उनमें से 2,767 युवा महिलाएं थीं जिनमें से 2,195 हिंदू थी और 492 ईसाई महिलाएं थीं। उनके अनुसार धर्मांतरण की इन घटनाओं में जोर जबरदस्ती का कोई योगदान नहीं था। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया था कि हम जबरदस्ती धर्म परिवर्तन नहीं होने देंगे और ना ही हम मुसलमानों के खिलाफ के नाम पर, नफरत के अभियान को चलने देंगे।
उस समय राज्य में पुलिस आयुक्तों द्वारा की गई जांच में यह तथ्य भी सामने आया था कि हिंदुओं और ईसाइयों की लड़कियों को बहला-फुसलाकर मुसलमान बनाने का कोई सुनियोजित और संगठित प्रयास नहीं हो रहा है।
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना के बारे में 11 नवंबर 2020 को राष्ट्रीय महिला आयोग ने बताया था कि उसके पास लव जिहाद से संबंधित कोई आंकड़े नहीं हैं।
हमारे समाज में लव जिहाद नाम की कोई चीज नहीं है। इसके कोई पुख्ता और स्वीकारीय तथ्य भी नहीं हैं। दरअसल यह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की मुहिम को बनाए रखने वाला एक विघटनकारी मुद्दा है। सांप्रदायिकता वोट बटोरने के लिए ऐसे ही भावनात्मक मुद्दों की तलाश में रहती हैं जैसे गाय, गोबर, मूत्र और राम मंदिर का मुद्दा और दूसरे अन्य अंधविश्वासी, धर्मांध और भावनात्मक मुद्दे। क्योंकि केरल एक साक्षर, पढ़ा लिखा और शांतिप्रिय राज्य है। वहां की जनता की इमेज को खराब करने के लिए और वहां की वामपंथी सरकार की धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए, एक गहरी साजिश के तहत लव जिहाद का मुद्दा गया था।
केरल स्टोरी को कश्मीर फाइल्स की तर्ज पर बनाया गया है। केरल में अपने पैर पसारने के लिए, वहां की जनता के मुख्य मुद्दों और समस्याओं को दरकिनार करके, इस नफरत भरी मुहिम को बढ़ाने और चालू रखने के लिए और जनता में हिंदू मुसलमान की नफरत भरी और विभाजन की राजनीति को चालू रखने के लिए बहुत लंबे समय से कोशिश की जा रही है। उसी साम्प्रदायिक और धर्मांध राजनीति को बढ़ावा देने के लिए केरल स्टोरी को लाया गया है।
यह फिल्म अर्धसत्यों और झूठ पर आधारित है। इस फिल्म में दावा किया गया है कि इस्लामिक स्टेट के द्वारा 32,000 हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाया गया है। फिल्म में दुनिया भर से 40,000 लोगों को आईएसआईएस में शामिल होना दिखाया गया है। भारत से भी कम लोग आईएसआईएस के प्रभाव वाले सीरिया और अफगानिस्तान में गए।
वर्ल्ड पॉपुलेशन आंकड़ों से पता चलता है कि आईएसआईएस में शामिल होने वालों में सबसे ज्यादा सऊदी अरब, इराक, रूस, अफगानिस्तान, जार्डन, ट्यूनीशिया, फ्रांस के लोग हैं। इनमें सबसे ज्यादा भर्तियां मध्यपूर्व और यूरोप से हुई हैं। आईएसआईएस में शामिल होने वाले लोगों में भारतीयों की संख्या बहुत ही कम है। केरल की धर्मांतरित महिलाओं के आईएसआईएस में शामिल होने की बात, मनगढ़ंत कहानी, सरासर झूठ और बकवास के अलावा कुछ नहीं है।
भाजपा को इस मामले को पकड़ने में देर नहीं लगी और उसने इसे राजनीतिक और ध्रुवीकरण करने के लिए साम्प्रदायिक रूप दे दिया और इसे हिंदू समुदाय के लिए खतरा बताया। झूठ आधारित नफरती अभियान को बार-बार दोहराया गया और यह मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत भड़काने का और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का एक और अहम हथियार बनता चला गया।
केरल की सत्ताधारी लेफ्ट फ्रंट की सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी इस फिल्म के खिलाफ है। उसका कहना है कि यहां लव जिहाद का कोई अभियान नहीं चल रहा है। इससे केवल मुसलमानों के खिलाफ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की नफरत फैलाई गई। वहां के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के अनुसार, धार्मिक आधार पर समाज को बांटने का काम नहीं किया जाना चाहिए। वहीं पर केरल के कांग्रेसी सांसद का कहना है कि जो कोई भी यह साबित कर देगा कि 32,000 लड़कियां लव जिहाद का शिकार हुई हैं तो उसे ₹1 करोड़ का नकद इनाम दिया जाएगा।
इससे पहले भी जब यह लव जिहाद का मुद्दा प्रकाश में आया था तो उस पर प्रेस, पुलिस विभिन्न पार्टियों और न्यायालय, द्वारा गंभीर रूप से विचार विमर्श किया गया था और तभी यह पता चल गया था कि लव जिहाद जैसा कोई मामला मौजूद नहीं है। क्योंकि हिंदुत्ववादी ताकतों के सब मुद्दे पिट चुके हैं, उनके विकास, विकास के रट की जुमलेबाजी की पोल खुल गई है। अब उनके पास कोई विकल्प नहीं है, अतः वे मुस्लिम विरोधी साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की मुहिम की शरण में चले गए हैं।
यहीं पर सबसे बड़ी बात है कि जब यह तथाकथित लव जिहाद की मुहिम चल रही थी और 32,000 से ज्यादा लड़कियां धर्मांतरण करके लव जिहाद का शिकार हो गई थीं तो तब उनके माता-पिता ने क्या किया था? क्या उन्होंने इसकी रिपोर्ट पुलिस को की थी? सरकार को की थी? महिला आयोग को की थी? उन्होंने इस मुद्दे को लेकर देश और दुनिया की प्रेस को क्या कुछ बताया था?
इन समस्त तथ्यों को देखकर यह स्पष्ट है कि ऐसा कुछ नहीं किया गया, क्योंकि अगर 32,000 हिंदू लड़कियां धर्मांतरण करके मुसलमान बनकर विदेशों में चली जातीं, तो यह देश और दुनिया का बहुत बड़ा मुद्दा बनता। मगर क्योंकि हकीकत ऐसी नहीं थी, इसलिए यह कभी मुद्दा नहीं बन पाया। हां हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतें जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाने के लिए, लोगों को गुमराह करने के लिए, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की मुहिम को जारी रखने के लिए, इस मुद्दे को उठाती रहीं और जनता में नफरत की मुहिम फैलाती रहीं। अब यह “दा केरला स्टोरी” भी उसी मुस्लिम विरोधी साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण मुहिम की अगली कड़ी है, इसके अलावा और कुछ भी तो नहीं। भारत के लोगों को इस झूठ के पुलिंदे को तत्काल ही सिरे से नकार देना चाहिए।





