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महिला वोटर्स के हाथ में दिल्ली की सत्ता की चाबी!

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दिल्ली में 5 परवरी को चुनाव होना है। वोटों की गिनती 8 फरवरी को की जाएगी। पर पिछले कई विधानसभा चुनावों में देखने को मिला है कि महिलाओं का झुकाओं जिस पार्टी की ओर होता है, वो पार्टी चुनाव जीत जाती है। ऐसे में दिल्ली में महिलाओं का झुकाव किस पार्टी की ओर ओर है और किसका पलड़ा भारी पड़ने वाला है? इसके बारे में जानने के लिए पढ़ते जाइए इस आर्टिकल को अंत तक।

रअसल, जिन राज्यों में 2024 के अंत में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, उनमें खासकर महाराष्ट्र और झारखंड में सत्ताधारी दलों की भारी वापसी के लिए आधी आबादी का समर्थन सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। महाराष्ट्र में ‘मांझी लड़की बहन योजना’ ने कमाल कर दिया, जबकि झारखंड में ‘मंईयां सम्मान योजना’ हिट रही।

दिल्ली चुनाव 2025 में महिला मतदाता करेंगी फैसला?

दिल्ली में भी पिछले कुछ विधानसभा चुनावों से महिला मतदाताओं के मतदान के रुझान और राजधानी में अभी चुनावी माहौल को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि महिला मतदाताओं का झुकाव जिस भी पार्टी की तरफ होगा, सरकार उसी पार्टी की बनेगी।

71 लाख महिलाओं के लिए खुला है वादों का पिटारा

दिल्ली में नए मतदाता सूची के अनुसार, लगभग 71 लाख महिला मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का 45% है। इसे देखते हुए सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस ने इस वोट बैंक को लुभाने के लिए इस बार वादों का पिटारा खोल दिया है। भाजपा ने महिला मतदाताओं के लिए सभी मौजूदा योजनाओं को जारी रखते हुए कई बड़े वादे किए हैं। कांग्रेस ने भी आधी आबादी के वोट हासिल करने के लिए वादे करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

पिछले दो चुनावों में महिला मतदाताओं की रही बड़ी भूमिका

अगर दिल्ली में पिछले दो विधानसभा चुनावों को देखा जाए तो आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत मिली। इसमें महिला मतदाताओं की भूमिका बहुत बड़ी थी। साल 2015 में दिल्ली में 1,33,1,3295 मतदाताओं में से 39,36,688 (66.49%) महिलाओं ने मतदान किया था और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।

वहीं, 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 1,47,97,990 मतदाताओं में से 41,76,456 (62.51%) महिला मतदाताओं ने मतदान किया और आम आदमी पार्टी को फिर से बंपर जीत मिली। 2015 में दिल्ली में पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 67.63 था और 2020 के चुनाव में यह 62.59% रहा।

क्या इस बार दिल्ली की महिला मतदाता अपनी प्रतिबद्धता बदलेंगी?

बिहार इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, जहां महिलाएं नीतीश कुमार की सरकार का प्रतिबद्ध वोट बैंक बनकर उभरी हैं। माना जाता है कि उनके परिवार और पति का दबाव भी उन पर काम नहीं करता। यही वजह है कि लाख दबाव और पूरी तरह से असफल साबित होने के बावजूद नीतीश कुमार ने शराबबंदी के फैसले को वापस नहीं लिया है। ऐसे में यह देखने के लिए 8 फरवरी तक इंतजार करना होगा कि क्या इस बार दिल्ली की महिला मतदाता किसी अन्य पार्टी की ओर झुकेंगी या फिर आप के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगी।

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