लंदन
‘नए किंग की ताजपोशी ऐसा इवेंट है, जिसे ज्यादातर लोग जिंदगी में एक ही बार देखेंगे। ज्यादातर लोगों के लिए ये सिर्फ एक इवेंट है, फिर भी इसकी अलग वैल्यू है।’ – एडवर्ड कैरोल, उम्र-70 साल
‘ताजपोशी का यह इवेंट एलीट्स की पार्टी है, जिन्हें सोसाइटी की कोई समझ नहीं है। मेरे हिसाब से ये कल्चर बदला जाना चाहिए। ये सिवाय पैसे की बर्बादी के कुछ नहीं।’– रॉबर्ट, उम्र-23 साल

एडवर्ड कैरोल और रॉबर्ट लंदन में रहते हैं, जहां आज यानी 6 मई को नए किंग चार्ल्स तृतीय की ताजपोशी होनी है। दोनों की उम्र में 47 साल का फर्क है, इतना ही बड़ा अंतर यूनाइटेड किंगडम की राजशाही पर दोनों की सोच में भी है। यूके में राजशाही करीब एक हजार साल पुरानी है।
सितंबर 2022 में क्वीन एलिजाबेथ के निधन के बाद उनके बेटे चार्ल्स राजा बने थे। 6 महीने बाद अब उनकी ताजपोशी हो रही है। इस इवेंट पर करीब एक हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। राजशाही का विरोध करने वाले गुट प्रदर्शन कर सकते हैं, इसलिए कार्यक्रम के दौरान सिक्योरिटी के लिए लंदन में 29 हजार पुलिसवाले तैनात रहेंगे।

ब्रिटेन में 70 साल बाद ताजपोशी का कार्यक्रम हो रहा है, उसी लिहाज से लंदन में तैयारी की गई है। फोटो लंदन के सबटाउन अक्सब्रिज की है, जहां एक रेस्टोरेंट को यूनियन जैक से सजाया गया है।
ये कार्यक्रम 10वीं सदी में बने वेस्टमिंस्टर एबे में होगा। शाही परिवार के सभी राज्याभिषेक इसी चर्च में हुए हैं। केंटबरी चर्च के आर्चबिशप जस्टिन वेल्बी नए राजा का सभी से इंट्रोडक्शन कराएंगे और फिर किंग चार्ल्स शपथ लेंगे। ये शपथ 335 साल पहले लिखी गई थी।

ब्रिटेन का राजा बनने पर ली जाने वाली शपथ की कॉपी। किंग चार्ल्स शपथ लेंगे कि वो संसद के बनाए कानूनों के हिसाब से शासन करेंगे, कानून और न्याय का पालन सुनिश्चित कराएंगे, एंग्लिकन चर्च और प्रोटेस्टेंट धर्म के के लिए जो भी संभव हो, वो करेंगे।
किंग चार्ल्स को 1661 में बना सेंट एडवर्ड्स क्राउन पहनाया जाएगा। 2.23 किलो वजनी और 2,868 हीरों से जड़ा यह क्राउन सिर्फ एक बार ताजपोशी के दौरान पहना जाता है। पिछली बार 70 साल पहले 2 जून 1953 को क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने ये ताज पहना था।

सेंट एडवर्ड क्राउन को 364 साल पहले चार्ल्स द्वितीय के लिए बनाया गया था। यह 22 कैरेट के ठोस सोने से बना है। अब तक 6 सम्राट इसे पहन चुके हैं।
देश के लोग ताजपोशी का जश्न मना सकें, इसलिए ब्रिटेन में 8 मई तक छुट्टी रहेगी। करीब एक घंटे चलने वाले इस इवेंट में 2000 देसी-विदेशी मेहमान शामिल होंगे। लंदन में इस इवेंट की तैयारियां कई हफ्तों से चल रही थीं। सड़कों पर किंग चार्ल्स और शाही परिवार के बैनर-पोस्टर लगे हैं। घरों के बाहर ब्रिटिश फ्लैग लगे हैं। बार, रेस्टोरेंट्स और सुपरमार्केट्स में भी सजावट की गई है।

लंदन के सुपर मार्केट में किंग चार्ल्स की ताजपोशी से जुड़े आइटम बिक रहे हैं। हालांकि, AFP की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट में ताजपोशी से जुड़ी चीजें जैसे कोरोनेशन मग, की-रिंग्स की डिमांड कम है।
ब्रिटेन के आम लोग और दूसरे देशों से आकर बसे प्रवासी इस इवेंट को कैसे देखते हैं, रॉयल फैमिली और राजशाही पर उनकी सोच क्या है, इसकी ग्राउंड रियलिटी समझने के लिए हमने कुछ लोगों से बात की। इनमें ब्रिटिश बुजुर्ग, यूथ और भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश से जाकर बसे लोग हैं।
ये वंस इन ए लाइफटाइम इवेंट…

70 साल के एडवर्ड कैरोल मेंटल हेल्थ सर्विसेज प्रोवाइडर सिग्नेट हेल्थकेयर में बतौर शेफ काम करते हैं। वे उसी साल पैदा हुए थे, जब क्वीन एलिजाबेथ की ताजपोशी हुई थी, यानी एडवर्ड कैरोल पहली बार ब्रिटेन के राजा की ताजपोशी का कार्यक्रम देखेंगे। वे कहते हैं, ‘बड़ी आबादी के लिए ये वंस इन ए लाइफटाइम इवेंट है। नई जनरेशन आने वाले सालों में शायद ही किसी किंग की ताजपोशी देख पाए।’
मौजूदा दौर में राजशाही के मायने कितने बदले हैं? इस सवाल के जवाब में एडवर्ड कहते हैं कि ‘शाही परिवार ब्रिटेन समेत ज्यादातर देशों में पहले से ज्यादा अप्रोचेबल हैं। स्पेन के पूर्व राजा जुआन कार्लोस मैड्रिड की सड़कों पर लोगों के बीच दिख जाते हैं। शाही परिवारों को अब सिर्फ किंग या क्वीन के तौर पर नहीं देखा जाता, उन्हें सोसाइटी का हिस्सा माना जाने लगा है। राजशाही तब तक रहेगी, जब तक समाज इसे स्वीकार करता रहेगा।’
क्या इतने बड़े इवेंट का कोई फायदा है? जवाब में ऐडी कहते हैं, ‘देश-विदेश के डेलिगेट्स और पत्रकार इस इवेंट को देखने के लिए यहां आएं हैं, टूरिज्म के लिहाज से भी ये फायदेमंद तो है।’
ब्रिटेन अब सिर्फ ब्रिटिशर्स का नहीं, ताजपोशी से फर्क नहीं पड़ता: रॉबर्ट

ताजपोशी को उम्रदराज ब्रिटिशर्स कल्चर का हिस्सा बता रहे हैं, लेकिन, नई जनरेशन की सोच इससे अलग हैं। 23 साल के रॉबर्ट लंदन के एक रेस्टोरेंट में काम करते हैं। ताजपोशी पर वो कहते हैं, ‘सरकार को इस इवेंट पर बेतहाशा पैसा खर्च करने की बजाय देश की इकोनॉमी के बारे में सोचना चाहिए। मैं जब भी सुपरस्टोर्स में जाता हूं, कभी अंडे नहीं मिलते, तो कभी टमाटर। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए, कॉस्ट ऑफ लिविंग बड़ा मुद्दा है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है।’
क्या ताजपोशी ब्रिटेन के कल्चर या विरासत का हिस्सा है? इस पर रॉबर्ट ने कहा ‘ब्रिटेन अब सिर्फ ब्रिटिशर्स का नहीं है। यहां दुनिया भर से लोग आकर बसे हुए हैं, यहां डाइवर्सिटी है। ऐसे में लंदन या यूके के ज्यादातर हिस्सों में लोगों को किंग या क्वीन की ताजपोशी से कोई फर्क नहीं पड़ता।’
पाकिस्तान में जन्मे, लेकिन लंदन में पले-बढ़े शिराज भी रॉबर्ट की बातों से इत्तेफाक रखते हैं। शिराज कैमरे पर नहीं आना चाहते थे, अपना नाम भी जाहिर नहीं करना चाहते, इसलिए उनका असली नाम छिपाया गया है।
वे कहते हैं, ‘रॉयल फैमिली सिर्फ टैक्सपेयर्स का पैसा बर्बाद कर रही है, ये पूरी तरह गलत है। लोगों के पास रोज की जरूरतों के लिए पैसा नहीं हैं, हाउसिंग मार्केट के दाम आसामन छू रहे हैं, ऐसे में ताजपोशी के इवेंट पर लाखों डॉलर खर्च करना कितना जायज है?’
लंदन में रह रहे प्रवासियों के लिए ताजपोशी के मायने…

रफी आलम यूके में मैनेजमेंट कंसल्टेंट हैं। वे कहते हैं,’ किंग चार्ल्स की ताजपोशी सिर्फ यूके के लिए बड़ा इवेंट नहीं है, पूरी दुनिया की नजरें इस पर हैं। 70 साल बाद ऐसा ऐतिहासिक इवेंट हो रहा है। यहां रह रहे दूसरे देशों के लोग भी इसके गवाह बनेंगे। ये सच है कि सरकार इस पर काफी पैसा खर्च कर रही है, लेकिन इसके पॉजिटिव पहलू देखें, तो दुनियाभर से लोग इसे देखने आएंगे और यह वर्ल्ड मीडिया के लिए मेन अट्रैक्शन रहेगा।’

भारत में केरल के रहने वाले जॉन जॉर्ज मार्केटिंग सेक्टर में काम करते हैं और लंदन के जोन-5 में रहते हैं। ताजपोशी को कल्चर का हिस्सा बताते हुए वे कहते हैं, ‘हर देश का अपना कल्चर होता है, भारत में भी ऐसे कई कार्यक्रम होते हैं, वैसे ही ये यहां का कार्यक्रम है। सभी को अपना कल्चर फॉलो करने का अधिकार है। हालांकि, ये पैसे की बर्बादी ही है, फिर चाहे यूके की इकोनॉमी ठीक चल रही हो या खराब।’

तन्मय व्यवहारे ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और लंदन के एक स्टार्टअप में प्रोजेक्ट मैनेजर हैं। उनके मुताबिक, ‘बाहर से आए लोगों के लिए ये सिर्फ एक छुट्टी और आराम करने का दिन है।’ बाकी कई कंपनियों की तरह तन्मय की कंपनी ने भी ताजपोशी वाले दिन स्टाफ के लिए आउटिंग और लंच ऑर्गेनाइज किया है, लेकिन तन्मय अपने परिवार के साथ समय गुजारना चाहते हैं।
प्रवासियों के लिए राजशाही और रॉयल फैमिली के मायने…
बांग्लादेशी नागरिक रफी आलम कहते हैं, ‘यूके में शाही परिवार का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है, उसकी मौजूदगी सांस्कृतिक विरासत के तौर पर देखी जानी चाहिए। शाही परिवार का सरकारी फैसलों में दखल नहीं है, इसलिए मुझे इसमें बुराई नजर नहीं आती। यह एक कॉन्स्टीट्यूशनल मोनार्की है।’
कॉन्स्टीट्यूशनल मोनार्की या संवैधानिक राजशाही में देश का प्रमुख राजा या रानी होती है, लेकिन शासन चुनी हुई सरकार चलाती है। संविधान के तहत राजा या रानी के पास बहुत सीमित शक्तियां होती हैं।

क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने 2 जून, 1953 को ब्रिटेन की गद्दी संभाली थी। इस ताजपोशी के साथ ही वे ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड सहित कॉमनवेल्थ देशों की शासक बन गई थीं।
मौजूदा समय में यूके को राजशाही की कितनी जरूरत है? इस पर रफी कहते हैं, ‘मेरे ख्याल से यूके में इसका कोई नेगेटिव इम्पैक्ट नहीं है। बोरिस जॉनसन आए और चले गए, लिज ट्रस भी चली गईं, लेकिन शाही परिवार आज भी है। यूके के हर अच्छे और मुश्किल दौर में। मुझे लगता है कि शाही परिवार एक गार्जियन की तरह काम कर रहा है।’
हालांकि केरल के जॉन जॉर्ज मानते हैं कि ‘रॉयल फैमिली के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए टैक्सपेयर्स का पैसा खर्च किया जा रहा है, जो सही नहीं है। यूके को अब इस सिस्टम से बाहर निकलना चाहिए और दूसरे जरूरी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।’
भारत की ही हर्षिता कहती हैं कि ‘इस इवेंट की बहुत हाइप बनाई गई है। प्रिंस चार्ल्स इसे डिजर्व करते हैं, लेकिन कार्यक्रम पर इतना पैसा खर्च नहीं करना चाहिए। ये पैसा कहीं और इस्तेमाल हो सकता था।’
किंग चार्ल्स की ताजपोशी में सदियों पुरानी परंपराएं निभाई जाएंगी। चार्ल्स ये सुपरट्यूनिका पहनेंगे, जिसे 1911 में किंग जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक के लिए बनाया गया था। बाद में 12 मई 1937 को किंग जॉर्ज VI और 2 जून 1953 को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने भी इसे पहना था।
वहीं, तन्मय कहते हैं कि ‘यूके के लोग रॉयल फैमिली को गार्जियन की तरह देखते हैं, कई मौकों पर रॉयल फैमिली से गाइडेंस की उम्मीद रखते हैं। शाही परिवार सैकड़ों सालों से है और उनकी मौजूदगी को नकारा नहीं जा सकता।’
ब्रिटेन में राजशाही पर सवाल
मार्च, 2021 में क्वीन एलिजाबेथ के पति प्रिंस फिलिप का निधन हुआ था। इसके बाद मार्केट रिसर्च एंड डेटा एनालिस्ट फर्म YouGov ने राजशाही की जरूरत पर सर्वे किया था। इसमें ब्रिटेन के 63% लोगों ने कहा था कि भविष्य में भी राजशाही बनी रहनी चाहिए। 25% ने कहा कि वे देश में चुनी हुई सरकार ही चाहते हैं। 10% कोई राय नहीं दे पाए।
18 से 24 साल के कम ही लोग चाहते हैं कि ब्रिटेन में राजशाही रहे। वहीं, 65 साल से ज्यादा उम्र के ज्यादातर लोग शाही परिवार को बनाए रखना चाहते हैं। रॉयल हाउसहोल्ड की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में सरकार की तरफ से शाही परिवार को 884 करोड़ रुपए खर्च के लिए मिले थे। इसी खर्च की वजह से लोग राजशाही खत्म करने की मांग करते हैं।
YouGov के ही एक ताजा सर्वे में लंदन के 51% लोगों ने कहा है कि टैक्सपेयर से मिले रुपए किंग की ताजपोशी पर खर्च नहीं करने चाहिए। हालांकि, 32% लोगों को इससे परेशानी नहीं है।





