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*नया साल आंदोलनों की कामयाबी से प्रभावित होगा!* 

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-सुसंस्कृति परिहार 

नया साल आने से पूर्व दो जन आंदोलनों को अदालत से मिली कामयाबी ने इस बात का संकेत दिया है आने वाला साल नेताओं का नहीं जन आंदोलनों का होगा। जिसकी ज़रुरत लगातार महसूस की जा रही थी।कहा जाता है कि जब अतिवादी ताकतें हावी होने लगती है तो जनांदोलन उन्हें पटकनी देना शुरू कर देते हैं।

ऐसा पिछले दिनों आंदोलन ने कर दिखाया पहला बहुत बड़े जनसंघर्ष का बिगुल राजस्थान के लोगों ने अरावली पर्वत श्रंखला को बचाने केन्द्र सरकार के ख़िलाफ़ बजाया जिसकी परिणति सामने आई है सरकार के 100 मीटर से नीचे वृहद अरावली के पठारी क्षेत्र पर हो रहे दोहन पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस पर रोक लगा दी है।

इस आदेश से कारपोरेट सूरमा को गहरी चोट लगेगी। अरावली की खुदाई बड़ी तेजी से जारी थी।अच्छा ये लगा जनआंदोलन में शामिल होकर जेसीबी चलाने वालों ने कारपोरेट के आगे घुटने नहीं टेके। राजस्थान की बहुरंगी संस्कृति वाली आबादी ने ये बता दिया कि उनकी रगों में अपनी जन्मभूमि को बचाने का जो जज़्बा है वह वीरत्व से ओतप्रोत है।

शुक्र है अरावली बलि से बच गया।वरना देश का भूगोल बदल जाता। उत्तर मध्य भारत रेगिस्तान में तब्दील हो जाता।

दूसरी घटना उन्नाव पीड़िता के पीड़क बलात्कार और हत्यारे भाजपा के दबंग पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर रोक लगना है। देश में इस समय दबंग और अडानी के कारोबारों की धमक ही सुनाई पड़ती है। छत्तीसगढ़, सिंगरौली मध्यप्रदेश लेकर लद्दाख  में भी खनिज संपदा की लूट के लिए सरकार ने जंगलों की जिस तरह कटाई का अभियान छेड़ रखा है वहां आदिवासी अपनी लड़ाई अकेले लड़ रहा है यदि उन्हें भी  प्रदेश वासी इसी तरह सहयोग करें तो यहां से भी उन्हें हटाया जा सकता है।सोनम वांगचुक जैसा पर्यावरणविद् जेल में है उन्हें जमानत नहीं। कुलदीप सेंगर को जमानत।सवाल तो बनता ही है।

जहां तक सवाल दबंगई का है कुलदीप की जमानत पर रोक लगने से एक आशा बंधती है कि यदि पीड़ितों के साथ न्याय दिलाने लोग आते हैं तो उनका हौसला बढ़ेगा। उन्नाव पीड़िता की दर्दनाक कहानी को सुनकर वा कुलदीप सेंगर की करतूतों के बाद जमानत मिलना। उसके स्वागत होने की खबर से ना केवल पीड़िता के परिजन खौफ़ में थे बल्कि उसके समर्थन में आए हुए लोग डरे हुए अवश्य थे लेकिन दिल्ली से लेकर इसके ख़िलाफ़ देश भर में जो समर्थन मिला , आंदोलन हुए।सोशल मीडिया ने यूपी सरकार की इज़्ज़त को तार तार किया।इसी ताकत ने ऐसे कलुषित आदेश पर रोक लगाई है।

नव वर्ष आने से पूर्व हर्ष देने वाले इन आदेशों ने जनांदोलन पर एक तरह से मुहर लगाई है।इन दोनों आंदोलनों की खासियत ये रही कि इसमें किसी पार्टी के नेता ने अगुवाई नहीं की जनता को हर जगह विपक्ष के नेताओं ने पीछे से समर्थन दिया है। इसलिए यह जीत जनता जनार्दन की जीत है।

उम्मीद की जाती है कि देश में जहां जहां खामियां हैं उन पर ध्यान देने की ज़रुरत है।सरकार कहां संविधान विमुख है। लोकतांत्रिक देश में कैसे वन मैन शो हो रहा है। दबंगों, पाखंडियों को प्रशय और अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध उन्माद को बढ़ावा दिया जा रहा है।ऐसे बहुत से सवालात हैं जिनसे देश के सद्भाव, संस्कृति और भाईचारे को बर्बाद करने के साथ देश की शिक्षा का निजीकरण कर हमारे बच्चों के नि: शुल्क पढ़ने का अधिकार छीना जा रहा है।बेटी बचाओ अभियान की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देश के आज़ादी के संग्राम सेनानी और आज़ाद भारत का निर्माण करने वाले नेताओं की जगह ग़द्दारों की मूर्तियां प्रेरणा स्थल बन रही हैं। देश में अमीर तंत्र मज़बूत किया जा रहा है।सबसे बड़ी बात आज हमारा देश चारों ओर से शत्रुओं से घिरा हुआ है। विदेश नीति,गृहनीति सब फेल हैं। लोकतंत्र की मज़बूत इकाई चुनाव आयोग विश्वास खो चुका है।

कहा जा सकता है कि हम सब सवालों से घिरे हैं सरकार बदलनी चुनाव आयोग के रहते मुश्किल है जबकि वोट चोरी की पोल खुल चुकी है। कहा जा रहा हारे लोग सत्ता को कसकर पकड़े बैठे हैं।ऐसे कठिन वक्त में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सत्याग्रह और जन आंदोलन हमारे एकमात्र सहारे है।आईए एकजुट होकर देश में फैली खामियों को दूर करें। नया साल ख़ुशगवार हो।यही तमन्ना है।

Ramswaroop Mantri

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