– सुसंस्कृति परिहार
नवरात्र उत्सव के बाद विजयादशमी भी सम्पन्न हो गया।इधर टिकिट वितरण की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। जिन्हें टिकिट नहीं मिला उनकी निष्ठा धड़ल्ले से बदलनी भी शुरू हो गई है। भाजपा ने लगता है अपनी हार को बचाने के लिए राजनीति के साम दंड भेद में पारंगत अपने पुराने लोगों को मैदान में उतारा है।इससे टिकिट की आस लगाए बैठी युवा पीढ़ी गहरे विषाद में गोता लगा रही है। जहां तक मध्यप्रदेश और राजस्थान का सवाल है वहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मोदी शाह के इरादों से अलग थलग अपनी सत्ता कायम करने की पुरज़ोर कोशिश में लगे हैं क्योंकि मोदी चाहते हैं पुराने छत्रपों से मुक्ति मिले और उन्हें गुजरात जैसा जी हुजूरी करने वाला गुलाम मुख्यमंत्री मिले। लेकिन शिवराज को संघ का आशीर्वाद मिलने की वजह से वे तीसरी सूची अपनी मनपसंद बना पाए।उधर वसुंधरा ने भी राजपूती तेवर दिखाकर मोदी-शाह के बीच तलवार खींच रखी है।आशय सिर्फ़ यह बताने का है कि केंद्र और राज्य के भाजपाइयों में मोटी दरार है जिसे पाटना कठिनतर काम है।उमा भारती जैसी कद्दावर नेत्री ने मोदी-शाह नसे मिली घोर उपेक्षा के वशीभूत हो राजनीति और परिवार से संन्यास लेकर हिमालय जाने का मन बना लिया है।राम मंदिर के लिए अपनी विशिष्ट भूमिका वाली तेजतर्रार नेत्री की ये उपेक्षा भाजपा को मंहगी पड़ सकती है।
दूसरी ओर कांग्रेस की सूची देर से आने के बाद लोगों का उत्साह कम हुआ है काश टिकिट पहले बंट जाते तो यह आक्रोश निकल जाता है और वातावरण सामान्य रहता तो वे असंतुष्ट सपा,आम आदमी या निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात हर्गिज नहीं करते।अभी भी उनके बिगड़े मिजाज सुधारने की कोशिश होनी चाहिए क्योंकि ये बात सहज और सर्वमान्य है कि टिकिट तो किसी एक व्यक्ति को ही मिल सकता है। कांग्रेस जो जातिगत आधार पर जनगणना की पक्षधर है और महिला आरक्षण की समर्थक।टिकिट वितरण में इस बात का विशेष ध्यान रखा है।यह काबिले गौर है। मध्यप्रदेश का सागर जिला जहां सात विधानसभा सीट है वहां चार युवतियों को कांग्रेस ने टिकिट देकर अच्छी पहल की है। दमोह की चार विधानसभा में से दो पिछड़े वर्ग को देकर अपनी मंशा स्पष्ट की है।नाम वापसी तक कुछ नाम परिवर्तन होने की संभावना बनी रहती है।ऐसा ही एक मामला निशा बांगरे का है। देखें क्या होता है? टिकिट वितरण देरी का सबब बताते हुए एक सज्जन कहते हैं यदि पहले टिकट दे दिए जाते तो अब तक मोदी के इशारों पर नाचने वाली ईडी बड़े बड़े नेताओं को कटघरे में पहुंचा चुके होते।बात भी समझ में आती है चूंकि मोदी सरकार अभी भी ईडी ईडी का खेला जारी रखे है हाल ही में उसने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को समन और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष समेत अन्य नेताओं के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे से राज्य का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर ईडी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इसे हताशा में उठाया गया कदम बताया है। मूलतः ये छापे कांग्रेसी नेताओं पर मानसिक दवाब बनाने की सोची समझी साजिश है।बात केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ में भी ईडी भेजकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को परेशान किया जाता रहा है। अब तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके आरोप लगाया है कि तेलंगाना चुनाव में बीजेपी (BJP) और बीआरएस (BRS), कांग्रेस को हराने के लिए सरकारी संस्थाओं का गलत उपयोग कर रही है।कुछ अफसर कई सालों से एक ही जगह पर हैं, BRS को इलेक्शन फंड्स देने के लिए काम कर रहे हैं। रिटायर्ड अफसरों को रेगुलर पोस्टिंग देकर, विपक्षी पार्टी को परेशान करने के लिए ‘प्राइवेट आर्मी’ की तरह काम कराया जा रहा है।कई सारे मीडिया संस्थान कांग्रेस के बारे में गलत खबरें छाप रहे हैं। जिसके बारे में हमने चुनाव आयोग से शिकायत की और तुरंत कार्यवाही की मांग की है।
इस सबका कारण है भाजपा अधिक गंभीर और शर्मनाक हार की परिस्थितियों से भी जूझ रही है।थोक के थोक जत्थे पार्टी छोड़ रहे हैं।सरे आम जूतमपैजार हो रही है। लाड़ली बहना के सहारे मामा मध्यप्रदेश जीतने की जुगत में हैं लेकिन बहुसंख्यक बहनें इस लाभ से वंचित हैं वे खुलकर मैदान में चीख चीख कर शिवराज के विरोध में मीडिया को अपना संदेश दे रही हैं।कई कद्दावर नेताओं को राज्य विधानसभा में उतारकर मोदी ने ये स्पष्ट संकेत दिया है कि मामा मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहे।उधर संसद से आयातित नेताओं को परास्त करने शकुनि मामा अपनी चाल चल रहे हैं। अंदरुनी हालत बदतर हैं।कुछ कहते नहीं बन रहा है। पुराने तथाकथित कद्दावर नेताओं की रीतिनीति से लोग भलीभांति परिचित इसलिए दूसरी पंक्ति के लीडरान बेमन से काम कर रहे हैं।
चुनावी सरगर्मी अब निरंतर बढ़ने वाली है कई कई बड़े नेताओं का आगमन शुरू होगा भीड़ भले ही उन्हें देखने पहुंचे घर घर रेवड़ियां पहुंचे आश्वासनों की झड़ी लगे जनता का चरण वंदन हो किंतु जनता बहुत पहले से ही बदलाव के मूड में आ चुकी है उसमें उलटफेर बहुत मुश्किल है।इसकी वजह लूट, झूठ मंहगाई और बेरोजगारी है जिसे जनता पिछले दस सालों से दहशत के साए में झेल रही है।
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