त्योहारों के मौसम के दौरान दिल्ली-NCR की मंडियों में बिक रहे खाद्य पदार्थों, जैसे पनीर, मावा और घी में बड़े पैमाने पर चल रही मिलावट के गोरखधंधे का पर्दाफाश किया गया है.
आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते भारतीय त्यौहार, ज़हर के सौदागरों के लिए कमाई का मौका बन गए हैं. जब आप और हम दीपावली की ख़ुशियां बांटने के लिए मिठाई और पकवान बनाते हैं तो इस बात से बेखबर होते हैं कि हम पकवान नहीं ज़हरीले खाने को तैयार कर रहे हैं. हैरानी की बात है कि दिल्ली-NCR के विभिन्न इलाक़ों में मौजूद मंडियों में ज़हर के सौदागर खुलेआम धंधा कर रहे हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग से लेकर पुलिस और प्रशासन तक आखें बंद करके गहरी नींद में सोया है. जानकारों की मानें तो इसके एवज में खाद्य सुरक्षा विभाग तो मोटी वसूली भी कर रहा है.

सच्चाई इसलिए भी लगती है कि जिस काले कारोबार के बारे में शहर का लगभग हर आदमी वाकिफ है, वो भ्रष्ट नौकरशाहों की आंखों से बच जाए, ये तो मुमकिन नहीं है. Bharat Express ने इस जहर के कारोबार की हकीकत बेनकाब करने के लिए इस खास इनवेस्टिगेशन को शुरू किया तो कई चौकाने वाली जानकारी सामने आई. आपके लिए अंडर कवर रिपोर्टर राजू गुप्ता और SIT head सुबोध जैन की ये Exclusive Report लेकर आए हैं.
आप जानकार हैरान हो जाएंगे कि नकली दूध, पनीर, मावा और घी बनाने के लिए बेख़ौफ़ दरिंदे एक ड्रम में सपरेटा दूध, रिफाइंड ऑइल, यूरिया और लिक्विड डिटरजेंट जैसे खतरनाक केमिकल डालकर इलेक्ट्रिक मशीन से एक घोल तैयार करते हैं. ये लोग 100 किलो पनीर बनाने के लिए 200 लीटर सपरेटा दूध में लगभग इतना ही केमिकल का घोल मिलाते हैं. जिससे पनीर का फैट बढ़ जाता है. मौत का ये जहर तैयार होने पर थोक रेट में पनीर 200 रुपए किलो बेचा जाता है.
एक अनुमान के मुताबिक 100 किलो पनीर से इन मिलावटखोरों को 20 हजार रुपए तक की कमाई हो जाती है, जबकि इसे तैयार करने में महज 3 हजार रुपए का ही खर्चा आता है.
मिलावटी दूध बनाने में इस्तेमाल किए जा रहे माल्टो डेक्सट्रिन पाउडर, ग्लूकोज, रिफाइंड आयल, यूरिया, लिक्विड डिटरजेंट, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, कास्टिक सोड़ा समेत मिल्क पाउडर का कारोबार बड़े पैमाने पर फल फूल रहा है. केमिकल बेचने वाले लोगों ने कार्रवाई से बचने के लिए अपने गोदामों को दूर-दराज शिफ्ट कर रखा है. नकली दूध पीने से, नकली पनीर और मावा खाने से फूड पॉइजनिंग ही नहीं हो सकती बल्कि आपकी किडनी और लीवर तक पर भी बुरा असर पड़ता है और तो और आपकी जान पर भी बन सकती है!
दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके की सच्चाई
Bharat Express की टीम ने दिल्ली एनसीआर के मेन बाजारों और मंडियों का रुख किया और इस पूरे खेल को बारिकी से समझा. इसी कड़ी में हमारा खुफिया कैमरा दाखिल हुआ राजधानी दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके की सब्जी मंडी में. यहां मौत का सामान बेच रहे लोगों ने पनीर, मावे और घी के दाम और उनकी Quality ही नहीं Food Safety Inspector तक के बारे में खुल कर बोला.
भारत एक्सप्रेस के खुफिया कैमरे ने दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके की सब्जी मंडी में मौजूद चौहान पनीर भंडार पर पनीर और मावे का रेट मालूम किया. यहां पनीर 180 और 220 रुपए किलो बिक रहा था . बातचीत में दुकानदार ने जो बताया उसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. दूकानदार जानता है कि जो माल वह बेच रहा है, उसमे खतरनाक मिलावट हो रखी है. वह बताता है कि 180 रुपए किलो वाले पनीर में पाउडर और सोयाबीन मिला होता है और ऐसी ही मिक्सिंग 220 रुपए किलो वाले पनीर में भी होती है, लेकिन कम मात्रा में. खोया के बारे में ये बताता है कि छैना, पींडी और दानेदार खोया 260 रुपए किलो बेच रहा है।
दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके की सब्जी मंडी के चौहान पनीर भंडार के दुकानदार से हमारी बातचीत जारी थी. बातचीत में दुकानदार कहता है, ‘पनीर 300 रुपए किलो है और प्योर नहीं होता कुछ भी कुछ भी नहीं मिलता बिना मिलावट के’. खोया के बारे में ये शख्स बताता है कि इसमें आलू की मिक्सिंग है. आगे बातचीत में ये दुकानदार बताता है कि उसकी दुकान में मौजूद घी 400 रुपए किलो है.
Bharat Express के अंडर कवर रिपोर्टर राजू गुप्ता न्यू सीमापुरी इलाके के चौहान पनीर हाउस में दाखिल हुए. यहां दुकानदार हमें पनीर का रेट 220 रुपए किलो बताता है. मिलावट के बारे में पूछने पर ये बताता है कि यहां मिलावट नहीं होगी तो पीछे होगी ही होगी. चौहान पनीर हाउस में मौजूद शख्स घी के रेट पूछने पर हमारी बात फोन पर दुकान के मालिक से कराता है और बताता है कि घी का 15 किलो का टीन 3350 रुपए का पड़ेगा यानी घी आपको 236 रुपए किलो मिलेगा.
रिपोर्टर जब इससे पूछता है कि क्या इस देसी घी में क्या मिलावट है? तो जवाब मिलता है इसमें डालडा रहता है और किसी को शक न हो, इसके लिए इसमें खुशबू यानी essence डाला जाता है. दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके के चौहान पनीर हाउस में जब हमने खोया के रेट मालूम किए तो हमे बताया गया खोया 260 रुपए किलो है और इसमें भी पाउडर होता है.
फ़ूड सेफ्टी डिप्टी कमिश्नर का दावा
दिल्ली के फ़ूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर रणजीत सिंह दावा कर रहे हैं कि उनका विभाग ऐसे मामलों में कार्रवाई करता है और सैम्पल भी उठाए जाते हैं. उनका यह भी दावा है कि दिल्ली के सभी 11 जिलों में उनकी टीम मुस्तैद है और वह नकली और मिलावटी सामान के नमूने ही नहीं लेते बल्कि गड़बड़ी की आशंका पर उसे जब्त करके नष्ट भी कर देते हैं. लेकिन हकीकत यह है कि अवसर देखकर कमाई में जुटी विभाग की टीमों की तथाकथित मिलीभगत से शहर की हर मंडी में नकली मावे, पनीर और घी की बिक्री खुलेआम हो रही है और लोगो की जान से खिलवाड़ का सिलसिला बदस्तूर जारी है.
दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके की सच्चाई
यहां भी घी, पनीर और खोया में मिलावट का काम जोरों पर है और खतरनाक केमिकल मिलाए जा रहे हैं. हमारी टीम जब सिविल लाइंस इलाके की खोया मार्केट में मौजूद चौधरी पनीर भंडार में पहुंची तो यहां दुकानदार बताता है कि सपरेटा का पनीर 200 रुपए किलो है और इसमें क्रीम कि जगह रिफाइंड मिलाया जाता है. मावे के रेट इसने 200, 220 और 300 रुपए किलो बताया और ये भी बताया कि 200 रुपए किलो वाले खोया में सेलखड़ी नाम का केमिकल मिलाया जाता है.
सेलखड़ी का सेहत पर असर
आपको बता दें कि सेलखड़ी के सेवन से नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है. साथ ही कैंसर की संभावनाएं भी काफी बढ़ जाती हैं. गर्भवती महिलाएं इसका प्रयोग करती हैं तो ऐसे में गर्भ में पल रहे बच्चे को दिव्यांगता और मानसिक तौर पर कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है. शुरुआत में इसके इस्तेमाल से सिर दर्द और चक्कर आने की समस्या हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक सेवन से किडनी, फेफड़े और दिल पर भी काफी बुरा असर पड़ता है.
मिलीभगत से चल रहा मिलावट का कारोबार
राजधानी में चल रहा ये जहर का कारोबार खाद्य सुरक्षा विभाग की मिलीभगत से फल फूल रहा है. हमने जब मिलावटी माल बेच रहे दुकानदार से फूड इंस्पेक्टर के बारे में बातचीत की तो उसने दावा किया कि पनीर और खोया का सेंपल आएगा ही नहीं, इसमें तो पाउडर और सप्रेटा भी मिक्स है. फूड इंस्पेक्टर से सेटिंग के बारे में पूछने पर इसने बताया कि हां वो तो सब हो जाता है भईया सब ले देकर. मतलब साफ़ है कि सरकारी नुमाइंदे भी मौत के इस खेल में बराबर के हिस्सेदार हैं.
हमारे अंडर कवर रिपोर्टर राजू गुप्ता दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके की खोया मार्केट की एक और दुकान “मावा व्यापार संघ” में पहुंचते हैं. यहां दुकानदार ने बताया कि पनीर 210 रुपए किलो है और मावा 200 रुपए किलो. बातचीत में इसने ये भी कबूला कि पनीर में हर चीज होती है. साथ ही दार्शनिक अंदाज में ज्ञान भी दिया कि ‘प्योर दूध का तो बन नहीं सकता, आपको भी पता है कोई मार्केट में बना कर बेच ही नहीं पाएगा’. घी के रेट पूछने पर दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके की खोया मार्केट का ये दुकानदार बताता है कि घी 600 रुपए किलो है और उनका ये घी बाहर बड़ी दुकान पर 1000 रुपए किलो बिकता है.
सियासत में अलग ही बात
बाजार में बिक रहे मौत के सामान पर हर कोई सरकार और प्रशासन से एक्शन चाहता है. लेकिन क्या किसी पर कोई फर्क पड़ रहा है. शायद नहीं. फर्क जनता की सेहत पर पड़ रहा है, उसकी जान को खतरा है. दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके का हाल भी आपने देख लिया। त्योहार में कैसे खुलेआम जहर बेचा जा रहा है. सरकार और प्रशासन सो रहा है. हमने आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता ज्ञानेंद्र भारद्वाज से बात की तो उन्होंने इसपर चिंता जाहिर की और एक्शन की मांग की.
ओखला सब्जी मंडी का हाल
दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके के बाद हमारी टीम ओखला सब्जी मंडी पहुंचती है. यहां भी दुकानों पर खुला मावा और पनीर बेचा जा रहा था. न्यू गढवाल पनीर भंडार पर दुकानदार ने बताया कि खोया 190 रुपए किलो है और पनीर 220, 170 और 190 रुपए किलो है. इसने ये भी कहा कि प्योर मावा चाइना वाला 240 रुपए किलो पड़ेगा और मीडियम वाले मावे में पाउडर होता है. दुकानदार बताता है कि सोयाबीन और पाउडर वाले पनीर में रिफाइंड ऑयल मिक्स होता है. फूड इंस्पेक्टर के बारे में ये शक्स बताता है कि ‘सप्रेटे वाले पनीर में कुछ नहीं निकलेगा, थोड़ा बहुत देकर सैटल हो जाता है, अगर सोयाबीन वाला पकड़ा गया तो फिर सेटिंग नहीं होती’.
हमारे अंडर कवर राजू गुप्ता दिल्ली की ओखला सब्जी मंडी की एक और दुकान चौहान पनीर भंडार में पहुंचे. यहां मौजूद शक्स ने बताया कि पनीर 200 और 240 रुपए किलो है. 240 रुपए किलो वाला पनीर प्योर होगा और दूसरे वाला मिक्स. इस दुकानदार ने मावे का रेट 240 रुपए किलो बताया. आगे बातचीत में इसने माना कि पनीर में ऑइल और पाउडर डाला जाता है. बाजार में खुलेआम मौत बांट रहे जहर के इन सौदागरों को किसी का कोई खौफ नहीं है. पूरे तंत्र में भ्रष्टाचार व्याप्त है.
चांदनी चौक के फतेहपुरी इलाके का हाल
Bharat Express की टीम दिल्ली के दिल चांदनी चौक इलाके में पड़ने वाले फतेहपुरी में पहुंची. फतेहपुरी के डाबर पनीर के मालिक से जब Bharat Express के अंडर कवर रिपोर्टर राजू गुप्ता ने पनीर और मावे के रेट जाने तो मालूम चला कि पनीर 220 रुपए किलो और मावा 210 रुपए किलो है. बातचीत में दुकानदार ने बताया कि पनीर में पाउडर मिक्स होता है और वो सपरेटा से बना होगा. बातचीत आगे बढ़ती है तो मालूम चलता है कि 210 रुपए किलो वाला मावा भी प्योर नहीं है. दुकानदार कहता है कि 210 में मीडियम ही मिलेगा, प्योर तो मिलेगा नहीं. होटल में ये ही चलता है.
गाजियाबाद का हाल भी जानें
दिल्ली के फतेहपुरी से हमारे अंडर कवर रिपोर्टर अब एनसीआर के शहर गाजियाबाद की सब्जी मंडी और गरिमा गार्डेन में पहुंचे. गाज़ियाबाद की सब्जी मंडी में भी खुलेआम मौत का सामान बेचा जा रहा है. यहां बाबू डेरी पर दुकानदार ने हमें बताया कि ‘पनीर 220 रुपए किलो है और पाउडर के बिना तो कुछ बन ही नहीं रहा, पनीर में ऑयल डालते हैं रिफाइंड डालते हैं और यूरिया भी डालते हैं’.
गिरिराज पनीर भंडार में मिलावट को लेकर बात हुई तो दुकानदार ने बताया कि ‘80 रुपए लिटर दूध आ रहा है, 5 किलो में कितना निकलेगा, 1 किलो. 300-400 रुपए किलो वैसे ही हो गया फिर उसमें आपकी मेहनत है, खर्चा है’.
गाजियाबाद के गरिमा गार्डेन में बिक रहे पनीर और मावे की सच्चाई भी भी हमारी टीम सामने लेकर आई. यहां चौहान पनीर भंडार के दुकानदार बताते हैं कि कंपनी का भी जो पनीर बाजार में बिक रहा है वो भी प्योर नहीं है. कंपनी पैसा भर रही है और गवर्नमेंट पास कर रही है.
सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत
यूं तो पूरे देश में मिलावट का कारोबार बेखौफ फल फूल रहा है, लेकिन देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर में खुलेआम चल रहा ये कारोबार नौकरशाही और सरकार के कामकाज पर सीधे सवाल उठता है. दिल्ली एनसीआर में दर्जनों ऐसी मंडियां हैं जहां हर रोज मिलावटी माल बेचा जाता है. यहां बनने वाला मिलावटी मावा, पनीर और घी दिल्ली और उससे सटे उत्तर प्रदेश और हरियाणा के जिलों तक सप्लाई होता है. लेकिन हैरत की बात है कि कारोबार पर अंकुश लगने की बजाए यह साल दर साल इसमें इजाफा होता जा रहा है.
मौत के सौदागरों ने नकली पनीर, मावा और घी बनाने के लिए कई ऐसे अविष्कार कर डाले हैं, जिनमें ग्लूकोज, चूना, यूरिया, सोयाबीन से लेकर पाम ऑयल, मिट्टी और कई दूसरे खतरनाक केमिकल्स तक का इस्तेमाल किया जा रहा है. त्यौहार खासकर दीपावली का सीजन तो इन दरिंदों के लिए कमाई का सुनहरा मौका बन जाता है और दिल्ली एनसीआर में मावा, दूध, घी, पनीर की मिलावट आसमान पर पहुंच जाती है. पनीर, मावा और घी में मिलावट के जहर को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की दरकार है. ऐसे में जरुरत है हुकुमरानों और पुलिस को सजग और सतर्क हो जाने की.





