प्रदीप द्विवेदी*
नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान अमित शाह का है! नरेंद्र मोदी अनेक मोर्चों पर बेहद कमजोर हैं, जैसे प्रेस का सामना नहीं करते हैं, लेकिन…. उनकी हर कमजोरी को ढकने का, उन्हें सियासी सुरक्षा देने का काम अमित शाह ने सफलतापूर्वक ही किया है?
पीएम मोदी की डिग्री जैसे कई विवादास्पद सवालों के जवाब पीएम मोदी के बजाए, अमित शाह ने ही दिए हैं? यही नहीं, राजनीति में अनेक ऐसे मौके आते हैं जब व्यक्ति स्वयं अपनी बात, अपना पक्ष ठीक से रख नहीं पाता है, ऐसे मौकों पर अमित शाह जैसे सशक्त सहयोगी की बहुत जरूरत होती है?
दरअसल, योग्य होने के बावजूद राहुल गांधी जरूरी सियासी कामयाबी नहीं हासिल कर सकें हैं, तो इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि उनके पास अमित शाह जैसा सियासी सारथी नहीं है!खबरें हैं कि चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की बैठक 16 अप्रैल 2022 को हुई है, इससे करीब दस माह पहले भी ऐसी बैठक हुई थी, लेकिन तब बात बनी नहीं थी, परन्तु इस बार लगता है कि कोई नया सियासी समीकरण बन सकता है?
उल्लेखनीय है कि चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब तक पीएम नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, आंध्र प्रदेश में जगन रेड्डी, तमिलनाडु में डीएमके नेता एमके स्टालिन आदि को अपनी प्रोफ़ेशनल पॉलिटिकल सर्विस दे चुके हैं और ज्यादातर सफल भी रहे हैं!
लोकसभा चुनाव 2024 करीब आ रहे हैं, लिहाजा यदि इस बार पीके कांग्रेस के साथ आते हैं, तो सबकी नज़रें उनकी भूमिका पर रहेंगी? सियासी सयानों का मानना है कि यदि पीके कांग्रेस में छाई सियासी सुस्ती को तोड़कर उत्साह जगानेवाली असरदार चुनावी रणनीति बनाने में कामयाब रहते हैं, तो 2024 में कांग्रेस राजनीतिक करिश्मा दिखा सकती है, क्योंकि मोदी सरकार की नाकामयाबी के कारण बीजेपी से जनता का तेजी से मोहभंग हो रहा है, ऐसे में जनता को कांग्रेस विकल्प के तौर पर नजर आती है, तो केंद्र की सत्ता का समीकरण भी बदल जाएगा!
पीके को भी कांग्रेस की जरूरत है, क्योंकि….
कांग्रेस को एकतरफा मीडिया और क्षेत्रीय दल लगातार कमजोर बता कर कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि बीजेपी को केंद्र से हटाने की ताकत इस वक्त केवल और केवल कांग्रेस के पास ही है?
खबर है कि मिशन 2024 को लेकर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सोनिया गांधी के आवास पर शनिवार को करीब चार घंटे तक प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें पहला सुझाव था- कांग्रेस लोकसभा चुनाव 2024 के लिए कुल 543 सीटों में से केवल 370 सीटों पर फोकस करे, जिनमें मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, गुजरात आदि राज्यों की ज्यादातर सीटें हैं?
ये सारी वो सीटें हैं, जहां कांग्रेस पिछले चुनावों में बेहतर स्थिति में रही है!
खबरों की माने तो प्रशांत किशोर ने अपने प्रेजेंटेशन में कांग्रेस को दूसरा बड़ा सुझाव यह दिया कि- बिहार, यूपी, ओडिशा जैसे राज्यों में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़े?
सियासी सयानों का मानना है कि यदि कांग्रेस परफेक्ट पॉलिटिकल मेनेजमेंट के साथ लोकसभा चुनाव लड़ती है, तो केंद्र की सत्ता से बीजेपी की विदाई हो सकती है, क्योंकि बीजेपी के पास करीब आधा दर्जन राज्यों में ही राजनीतिक आधार है और इन राज्यों में से ज्यादातर राज्यों में बीजेपी को कांग्रेस ही टक्कर दे रही है!





