धार
सोयाबीन फसल के लिए किसानों ने तैयारियां शुरू कर दी है, लेकिन इस बार बीज काे लेकर किसानों को चिंता सताने लगी है। कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ सोयाबीन की 84 दिनों में तैयार होने वाली नई किस्म जेएस-2029 और 2034 बोने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन बीज निगम के पास इस किस्म के बीज ही नहीं हैं। ऐसे में किसानों को बाजार से महंगे दाम पर उन्नत किस्म के बीज खरीदने पड़ेंगे।
बीज निगम के पास आरबीएस 2001-4 जैसी उन्नत किस्म के बीज अाए थे। वह भी इस साल चयनित किसानों को देकर प्रमाणित बीज का उत्पादन कराया जाएगा। कृषि विभाग ने 5 लाख 14 हजार हेक्टेयर में खरीफ की बाेवनी का रकबा तय किया है। पिछले साल हुई अतिवृष्टि के चलते किसानाें के पास रखा बीज भी काम का नहीं रह गया है। दरअसल कृषि विभाग और बीज निगम से मिलने वाले अनुदान से बीज लेकर फसल लेने वाले किसानों को इस बार झटका लग सकता है। क्याेंकि बीज की आपूर्ति करने वाले बीज निगम ने नई व उन्नत किस्म के बीज की आपूर्ति में असमर्थता जता दी है। बीज निगम के पास जेएस 2069, जेएस 2029, आरबीएस 2001-4 किस्म का 160 से अधिक क्विंटल बीज था।
जाे इस समय तक किसानाें काे बांट दिया। जिसका भाव 7500 रु. प्रति क्विंटल है। ऐसे में अब ज्यादातर किसान को ऊंची कीमत पर खुले बाजार से बीज खरीदना पड़ेगा। हालांकि बीज निगम के अधिकारियों का दावा है कि हम बीज के लिए प्रयासरत है। आने वाले वर्षों में किसानों को आसानी से नई किस्मों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
दुकानाें व किसानाें के घर जाकर संपर्क कर रहे है
धार के किसान सचिन मंडलाेई ने बताया किसान कॉल सेंटर और कृषि वैज्ञानिकों ने उन्नत बीज की जानकारी तो दे दी पर बीज निगम के अधिकारी वैज्ञानिकों द्वारा बताए बीज नहीं हाेने की बात कह रहे हैं। कृषि विभाग, बीज निगम और कृषि विज्ञान केंद्र तीनों जगह चक्कर लगा चुका है पर बीज नहीं मिले। ताेरनाेद के विष्णु रेवाटिया ने बताया जीएस 9560 का बीज चाहिए था, लेकिन नहीं मिल रहा। किसान हरिशंकर, धीरेंद्र पाटीदार ने बताया बीज निगम में गए थे लेकिन वहां से बताया कि हमारे पास बीज नहीं है, अाप बाजार से खरीद ले। अब बीज के लिए दुकान व किसानाें के घर जाकर बीज के लिए संपर्क कर रहे है। जहां 9 हजार रु. क्विंटल होना बताया जा रहा।
किसान की डिमांड अर्ली वैरायटी के बीज की
माैसम के साथ नहीं देने से किसानाें की डिमांड अब अर्ली वैरायटी के बीज है। इसमें जीएस 9560, 1025, 6124 सहित अन्य किस्म के बीज है। जाे 80 से 85 दिन में पक जाती है। कम बारिश में भी यह साेयाबीन पकने के साथ उत्पादन भी 5 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से निकलता है। साथ ही मटर व अन्य फसल लगाने के लिए भी किसान इन िकस्माें की साेयाबीन लगाते हैं।
और भी बीज मिले इसके लिए प्रयासरत हैं
दाे साल से अतिवृष्टि के चलते बीज किसी काम का नहीं रहा। जेएस-2069, जेएस-2029 व आरबीएस 2001-4 का 160 क्विंटल से अधिक बीज था। जाे किसानाें काे बांट दिया। फिलहाल अन्य काेई बीज नहीं है। अाेर भी बीज मिले इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
–दीपकसिंह साेलंकी, बीज निगम इंचार्ज, धार





