हरिक रावत
गौतम अडाणी की कंपनियों में विदेशी फर्जी कंपनियों द्वारा किये गये पूंजी निवेश तथा अन्य गड़बड़झाले पर आई हिंडेनबर्ग रिपोर्ट पर मचे बवाल को दबाने के लिए सिलसिलेवार कितने खटराग किये गये, देखिएगा—*
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गौतम अडाणी की कंपनियों में विदेशी फर्जी कंपनियों द्वारा किये गये पूंजी निवेश पर संसद में चर्चा नहीं होने दी और पूरा सत्र समाप्त हो गया,*
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अडानी पर राहुल गांधी के सवालों का कोई जवाब ही नहीं दिया बल्कि उसी खुन्नस में राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म करने का इंतजाम किया गया,*
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मोदी की फर्जी डिग्री मामले में केजरीवाल को अदालत से जुर्माने की सजा और आबकारी मामले में सीबीआइ से वारंट जारी करवा दिया,*
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पुलवामा को लेकर चार साल से चुप सतपाल मलिक का मौनभंग कर सूखे घाव ताज़ा करवा दिये,*
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कानून व्यवस्था को धता बताते हुए अतीक और अशरफ की पुलिस अभिरक्षा में हत्या करवा दी,*
*एक के बाद दूसरा तिलस्मी मायाजाल फैलाने के लिए की गई सारी मेहनत के बावजूद भी लोग हिंडनबर्ग की रिपोर्ट और अडाणी की शैल कंपनियों में लगे बीस हजार करोड़ को नहीं भूल पा रहे हैं।*
*भूल जाते तो फिर कोई सेबी से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत यह सच क्यों निकाल लाता कि देश के तमाम कानूनों को धता बताते हुए गौतम अडाणी समूह ने अपने निवेश की सूचना सेबी को नहीं दी।*
*क्या RSS प्रमुख द्वारा हिंडेनबर्ग रिपोर्ट को देश पर ‘आर्थिक हमला’ बताना देश को आर्थिक नुकसान पहुंचाने की गद्दारी कर रहे गौतम अडाणी को बचाने की कोशिश नहीं है? क्या ऐसे पूंजीपति को जेल में डालने के बजाय उसकी ढाल बनना ही RSS का राष्ट्रवाद है? क्या इनके हिन्दू राष्ट्र में ऐसे ही गद्दारों की पूजा होगी?*





