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*बढ़ता ही जा रहा है अभिव्यक्ति की आजादी का ख़तरा*

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-सुसंस्कृति परिहार 

अभी चंद दिनों पहले इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबंधित कथित आपत्तिजनक कार्टून के मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है अदालत ने अब इस मामले की सुनवाई 15 अगस्त के बाद तक के लिए टाल दी है।उनके कार्टून पर एफआइआर की गई थी।

 कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को थोड़ी राहत सुको ने दी ही थी कि धड़ाधड़ सच उजागर करने वाले  अजीत अंजुम पर एफआईआर दर्ज की गई है।बिहार के बेगूसराय जिले में यूट्यूबर और पत्रकार अजीत अंजुम के खिलाफ एफआईआर दर्ज रिपोर्ट में उन पर सरकारी काम में बाधा डालने और बिना अनुमति सरकारी दफ्तर में घुसने का आरोप है। यह मामला बलिया थाना में दर्ज हुआ है। एफआईआर भाग संख्या 16, साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र के बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मो. अंसारुल हक ने दर्ज करवाई है। बीएलओ ने बताया कि 12 जुलाई की सुबह करीब 9:30 बजे वे बलिया प्रखंड सभागार में बीएलओ एप से वोटर लिस्ट की जानकारी अपलोड कर रहे थे। उसी दौरान अजीत अंजुम, उनके सहयोगी और कैमरामैन बिना अनुमति अंदर घुस आए और सवाल-जवाब करने लगे।

इतना ही बरेली के शिक्षक रजनीश गंगवार को कॉलेज परिसर में प्रार्थना स्थल पर बच्चों के सामने ‘तुम कांवड़ लेने मत जाना… ज्ञान का दीप जलाना’ गीत गाना भारी पड़ गया। गीत गाते उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो हिंदूवादी संगठन के लोगों ने एतराज जताया। उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। 

ये कोई नये मामले नहीं है इससे पूर्व भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को एफआईआर कर धमकाया गया लेकिन वे अब तो और खुलकर मोदीजी के खिलाफ लगातार अपने विचार आमजन तक पहुंचाने में लगी है।

अजीत अंजुम भी लगातार बिहार में चुनाव आयोग द्वारा की जा रही एस आईआर के तहत आधे अधूरे फार्मों की एंट्री पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग दो आवेदन पत्र भरवाने का विज्ञापन कर रहा है जिसमें एक फार्म सबूत के तौर पर दिया जाना है । कहीं भी मतदाताओं को वह नहीं मिला।इ, चोरी को सामने लाने के कारण उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुई।बाकी सब मनगढ़ंत है।

अच्छी बात ये है अब मोदी सरकार से लोग डरना छोड़ सीधे मुकाबले के लिए तैयार नज़र आने लगे हैं। अप्रत्यक्ष तौर पर यह राहुल गांधी के उस नारे की जीत है जो कहते हैं डरो मत। हमारे यहां एक कहावत है जो डर गया वो मर गया। यक़ीनन जिसने डर छोड़ दिया उसने ही मुकाम हासिल किया है। रवीश कुमार को परेशान करने सरकार ने एनडीटीवी ही अपने चहेते को दिलवा दिया। स्वाभिमानी रवीश कुमार डरे नहीं नया चैनल बनाकर अपना संघर्ष जारी रखें हुए हैं। उनके सुनने देखने वाले चार गुना बढ़े हैं।

यही हाल अजीत अंजुम का है उनके साथ भी उनको सुनने देखने वालों की संख्या में इज़ाफ़ा होता जा रहा है।साथ ही उनके साथ देश हित चाहने वालों की बड़ी ताकत खड़ी हो गई है।वे लगातार उसी तरह के काम में लगे हैं जिससे ख़फ़ा होकर एफआईआर हुई है।सांच को आंच नहीं के सिद्धांत के साथ वे मुकाम पर डटे हुए हैं।उनके साहसी निर्णय को सलाम।इससे बिहार के अन्य पत्रकार भी प्रेरणा लेकर उनके सहयोगी बन गए हैं। चुनाव आयोग द्वारा षड्यंत्र पूर्वक की गई चोरी उजागर हुई है।देश शर्मिंदा हैं।

इसी कड़ी में आज एक बांदा के शिक्षक भी चपेट में आ गए उन्होंने कांवड़ियों के उग्र स्वरुप को देखते हुए अपने स्कूल के बच्चों को एक ज्ञानवर्धक गीत सुनाया।वह अंधभक्ति में लीन सरकार को इतना नागवार गुजरा कि उक्त शिक्षक के विरुद्ध एफआईआर हो गई।संभव है उसे नौकरी से बर्खास्त करने का हुकुम भी आ जाए।भला धार्मिक नशे में डूबे उत्पाती कांवड़ियों की इज्जत का सवाल है।शिक्षा और सच्चे ज्ञान से उन्हें आपत्ति तो होना ही है।

ये ताज़ातरीन दो घटनाएं क्या आपातकाल की निंदा करने वालों के मुंह पर तमाचा नहीं है। यह संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की आज़ादी का दमन और उल्लंघन नहीं है। न्यायपालिका जो इस वक्त लगातार संविधान की पैरवी खुलकर कर रही है उसे स्वत: संज्ञान लेकर इस तानाशाही प्रवृत्ति पर रोक लगानी चाहिए। वरना चुनाव जैसे महत्वपूर्ण कार्य में मतदाताओं के साथ फिर छल हो जाएगा।जैसा महाराष्ट्र,दिल्ली में अब परिलक्षित हो रहा है। मतदाता जार जार रो रहे हैं।

चुनाव आयोग में सीजेआई को हटाकर पहले ही इसकी निष्पक्ष भूमिका इस सरकार ने कानून बनाकर खत्म कर दी है।यह हमें नहीं भूलना चाहिए।

इस कठिन वक्त में इन तमाम जुझारू साथियों को जो संबल अवाम दे रही है वह सराहनीय है और उम्मीद जगाती हैं कि एक दिन ये चने अंधेरे ज़रूर छंटेंगे।

Ramswaroop Mantri

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