चुनावी चटखारे/कीर्ति राणा
एक के बाद एक जिले में जिस तरह आदिवासियों की जमीन रसूखदारों को बिकवाने की फाइलें खुल रही हैं उससे यह भी खुलासे हो रहे हैं कि कलेक्टरों पर आख मूंद कर भरोसा करना सरकार के लिए भारी साबित होने लगा है।यही वजह है कि मुख्य धारा से उपेक्षित चल रही आईएएस लॉबी के सुर बदलने लगे हैं।
रिटायर हो चुके आईएएस यह कहने से नहीं चूकते कि बार बार मुख्य सचिव को एक्सटेंशन देना भी एक बड़ा कारण हो सकता है।प्रदेश की आईएएस लॉबी बीते कुछ वर्षों में दो धड़ों में बंटती गई है।एक धड़ा वह जो सीएस की गुड लिस्ट वाला होने से फील्ड में और मलाईदार पदों पर बना रहता है।तीन साल का टेन्योर पूरा करने के बाद एक से दूसरे जिले या एक से दूसरे विभागों को चलाने के लिए वहीं गिने चुने आईएएस योग्यतम माने जाते रहे हैं।
बार बार फिल्ड में मौका मिलना इनकी कार्यकुशलता भी हो सकती है लेकिन आम पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर प्रशासन-सरकार के तालमेल को समझने वाले लोगों में बीते कुछ वर्षों में यह धारणा मजबूत हुई है कि जो सरकार को खुश रखना जानते हैं उन अधिकारियों की खुशी का सरकार भी ख्याल रखती है।
मालवी भाषा की एक कहावत है, “भरोसे की भैंस, पाड़ो ब्यावै” अर्थात गर्भवती भैंस से अगर मादाशिशु की उम्मीद रखेंगे तो वह नरशिशु को जन्म देती है।आसानी से समझना हो तो भैंस का काम ‘रामभरोसे’ चलता है।आदिवासियों की जमीन बिक्री के मामले बता रहे हैं कि कई जिलों में रामभरोसे ही काम चलता रहा। एडीएम रहते जिन अधिकारियों ने जमीन बिकवाई, बाद में कलेक्टर बने तो मातहत एडीएम की इस कारस्तानी से आंखें मूंद लीं।
शासन चाहे जिस दल का हो, जिलों में पदस्थ कलेक्टरों के लिए मुख्यमंत्री ही सर्वोपरि रहता है। हाल के डेढ़ दशक में तो छोटे-बड़े सभी जिलों में कलेक्टरों पर सरकार के विश्वास का यह आलम रहा है कि जनहित और पार्टी कार्यकर्ताओं के काम कराने में जनप्रतिनिधियों से लेकर कार्यकर्ता तक लाचार साबित होते रहे हैं।
एक तरफ जहां सरकार पैसा एक्ट सहित अन्य योजनाओं से खुद को आदिवासियों का सच्चा हितैषी बताने में जुटी हुई है वहीं यह आंकड़ा चौंकाने वाला है कि आदिवासी बहुल जिलों में 92 हजार एकड़ से अधिक जमीन गैर आदिवासियों को बेचने में जिला प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही है।इस जमीन की कीमत ही 20 हजार करोड़ के करीब है।इस धांधली में इंदौर जिला भी पीछे नहीं है यहां भी 139 आदिवासियों की 500 एकड़ से अधिक ऐसी ही भूमि 2004 से 15 के दौरान बेचने की खबरें चर्चा में है। सर्वाधिक अनुमति 2008 से 10 के बीच दी गई हैं।
धांधली की फसल किसानों को धनराशि वितरण में भी खूब लहलहाई है।अब तक 12 जिलों में प्राकृतिक आपदा प्रभावित किसानों तक राहत नहीं पहुंचने की जानकारी तो नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह ही सार्वजनिक कर चुके हैं।जो राशि किसानों को दी जानी थी वह पटवारियों और अन्य अमले ने अपने रिश्तेदारों के खाते में डलवा दी।2018 से 2022 चार साल में ही करीब 12.42 करोड़ की राशि का गलत खातों में डालना सामने आ चुका है।बारह जिलों देवास, सीहोर, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, मंदसौर, छतरपुर, खंडवा, सिवनी, आगरमालवा, रायसेन, सतना जिलों में पीड़ित किसानों के लिए आई राशि राजस्व अधिकारियों-कर्मचारियों ने अपने परिचितों के खाते में डलवा दी।अकेले देवास में तो 7 पटवारी, दो लिपिक निलंबित किए जा चुके हैं, 35 लिपिकों की विभागीय जांच चल रही है।
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जीत का लक्ष्य रखा 200 सीट
अभी सौ सीटों पर हालत खराब
भाजपा ने इस बार दो सौ पार का लक्ष्य रखा है। चुनाव प्रबंधन भी ऐसा ही किया जा रहा है कि 200 सीट तो जीतना ही है, इसीलिए हर बूथ पर पार्टी के पक्ष में 51 फीसदी मतदान की रणनीति बनाई गई है।इस तैयारी के बावजूद अभी जब मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने विधायक दल की बैठक ली तो इन सभी के चेहरे तब लटक गए जब मुख्यमंत्री ने वर्तमान में से 100 विधायकों की हालत खराब होने की गोपनीय रिपोर्ट की जानकारी दी।इन 100 विधायकों के खराब रिपोर्ट कार्ड के कारण सामने आए हैं संगठन के काम में रुचि नहीं लेते, अभियानों से दूर, कार्यकर्ताओं से जीवंत संपर्क नहीं।बैठक में विरोधाभास यह भी दिखा कि सीएम ने साफ कह दिया जो जीतने वाला होगा उसी को टिकट मिलेगा।वहीं प्रदेश अध्यक्ष सभी विधायकों को जीत की अग्रिम बधाई दे रहे थे।जैसे सब को टिकट मिल रहे हों, और सभी जीत ही जाएंगे।
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अगले माह राहुल की ब्योरारी में सभा
जबलपुर में नर्मदा पूजन और पांच गारंटी का भरोसा दिलाने के बाद प्रियंका वाड्रा 21 जुलाई को ग्वालियर में आमसभा करने आ रही हैं।सिंधिया को लेकर वो क्या कहेगी, सिंधिया कैसे रिएक्ट करेंगे इस पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में उत्सुकता बनी हुई है।
अगस्त में अपनी मोहब्बत की दुकान लेकर राहुल गांधी शहडोल पहुंचेंगे।उनकी सभा के लिए इस जिले के ब्योरारी गांव का चयन किया गया है।समीप के राज्य छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे इस गांव में सभा कराने का उद्देश्य यही है कि दोनों राज्यों के आदिवासी उन्हें सुनने आ सकें, छग में भी तो विधानसभा चुनाव है। शहडोल के बाद धार सरदारपुर में भी कांग्रेस बड़े नेताओं की सभा प्लान कर रही है।
पीले चांवल बांटने की कला
साल में ऐसे आयोजन भाजपा कई बार करती रहती है जिसमें घर घर पीले चांवल बांट कर लोगों को आमंत्रित किया जाता है। अभी भोपाल आए अमित शाह बड़े नेताओं को पीले चांवल बांटने का टास्क देने के साथ हिदायत दे गए हैं कि 30 जुलाई को फीडबेक लेने फिर आऊंगा।मोशाजी के पदचिह्नों पर चलते हुए प्रदेश नेतृत्व ने भी जिन धुरंधर नेताओं को मार्गदर्शक मंडल वाली राह दिखा रखी थी उन सभी की मनौवल कर के फिर से एक्टिव होने के पीले चांवल बांटना है।पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा और ग्वालियर के फायर ब्रांड जयभान सिंह पवैया से लेकर बुंदेलखंड के लिए उमा भारती जैसे जननेताओं की पार्टी बैठकों में सक्रियता नजर आने लगेगी।
जो हमारा, हम उसके
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ राज शेखावत ने तो घोषणा कर दी है जो पार्टी क्षत्रिय समाज को अधिक टिकट देगी, उसे करणी सेना समर्थन देगी।भाजपा ने क्षत्रियों का विश्वास जीतने के लिए आयोग गठन की घोषणा तो कर दी है लेकिन समाज के कितने लोगों को टिकट मिलेगा यह तय नहीं।कांग्रेस ने भी पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन इन दोनों दलों को करणी सेना ने अपना ऑफर बता दिया है कि जो दल सर्वाधिक टिकट देगा उसे सेना का समर्थन रहेगा।
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दीपक के जवाब में ललिता की एंट्री
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी को कांग्रेस प्रवेश की खुशी मनाने वाले पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, देवास जिला कांग्रेस अध्यक्ष और उनकी मंडली को भाजपा ने जवाब दे दिया है।मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद और प्रदेश शासन के गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समक्ष मुख्यमंत्री निवास में देवास जिला पंचायत अध्यक्ष लीला अटारिया ने कमलनाथ और कांग्रेस की नीतियों से आहत होकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। जिला पंचायत अध्यक्ष लीलाबाई और उनके पति भेरूलाल कटारिया का कहना है कि वह पहले बीजेपी से जुड़े हुए थे लेकिन कुछ कारणों के चलते फिर कांग्रेस में चले गए थे। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चौहान की कार्यप्रणाली से प्रभावित होकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं।
पंचायत चुनाव में सम्पूर्ण देवास जिले में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली थी। अब यह कांग्रेस व सज्जन वर्मा के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
वस्था के बेरिकेड्स ने प्रजा से
र कर दिया राजा महाकाल को

डॉ. चन्दर सोनाने, उज्जैन।
सावन मास में निकल रही राजाधिराज महाकाल की सवारी प्रशासन की नासमझी के कारण लाखों दर्शनार्थियों की नजरों से दूर होती जा रही है।जिला प्रशासन की चिंता बस यही है कि सवारी निर्विघ्न निकल जाए, अधिकारियों को जनभावना की जरा भी परवाह नहीं कि उन्हें दर्शन हो भी रहे हैं या नहीं।सावन महीने के पहले सोमवार को तकरीबन 2.57 लाख श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे।जिला प्रशासन की सख्ती और 6 फीट ऊंचे बेरिकेड की दीवार के कारण श्रद्धालु आसानी से बाबा महाकाल के दर्शन ही नहीं कर पाए। उज्जैन कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम एक बार अपने मातहत अधिकारियों के साथ बैरिकेड्स के बाहर से पालकी दर्शन करें तो पुलिस-प्रशासन को समझ आ सकता है कि दर्शनार्थी क्यों कोस रहे हैं इस व्यवस्था को।
राजा और प्रजा के बीच यह बाधा है
जब भी कोई नया कलेक्टर जिले में आता है तो सवारी की व्यवस्था पहले से भी अधिक सख्त करने में जुट जाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ।महाकाल और भक्तों के बीच पहले 6 फीट ऊंचे बैरिकेड्स की दीवार, फिर उसके आगे पुलिस जवान।इनके बाद प्रशासनिक अमला और सुरक्षा समिति के सदस्य फिर महाकाल की पालकी।जब पालकी मंदिर से निकली तो वह पालकी पंडितों, मंदिर समिति के कर्मचारियों और सदस्यों से घिरी रहती है।
जनसुनवाई में शिकायत, गौर नहीं किया
पहले सोमवार को दर्शन न कर पाने से वंचित असंख्य दर्शनार्थियों में से एक अम्बर कॉलोनी निवासी राजेश राठौर कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंच गए और पालकी को ऊंचा करने के लिए एक आवेदन भी दिया। अपर कलेक्टर मृणाल मीना ने आवेदन लिया और महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेज दिया।जनभावना वाले इस मामले को अपर कलेक्टर ने गंभीरता से लिया ही नहीं।
छात्रों ने समझी पीड़ा और किया नवाचार
एक आम श्रद्धालु की पीड़ा को उज्जैन के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के 8 छात्रों ने समझा। इन छात्रों ने बाबा महाकाल की सवारी में निकलने वाली पालकी का एक ऐसा मॉडल हाल ही में तैयार किया है। इसमें न सिर्फ दूर से ही भक्तों का पालकी में विराजित अपने राजाधिराज के दर्शन हो सकेंगे, बल्कि सवारी मार्ग में मकानों की छतों और गैलरी से भी भक्त अपने भगवान को निहार सकेंगे। उज्जैन के शा. पॉलिटेक्निक कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा के फाइनल ईयर के छात्र निकुंज राठौर, रविकांत मांझी, राजसिंह चौहान, मयंक मालवीय, आदर्श शर्मा, सुनील धाकड़, रोहित राठौर और केतन कुमार ने अपने ही कॉलेज के सहायक कर्मशाला अधीक्षक आत्माराम मेघवंशी की परिकल्पना एवं निर्देशन में यह मॉडल तैयार किया है। यह पालकी 6 फीट की है, किन्तु इसे 8 फुट ऊंचे बनाए जाने की आवश्यकता है। इसके सामने की ओर पारदर्शी कांच लगाया गया है, जबकि आगे-पीछे से भी पारदर्शी कांच से पालकी ढंकी होना चाहिए, ताकि दूर से श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकें।
फोटो-लेखक चंदर सोनाने का है।
*मप्र ने बता दिया नाम बदलने से इतिहास नहीं बदल जाता *
केंद्र से राज्य तक नाम बदलने के रिवाज से जिन दलों-नेताओं के पेट में मरोड़े उठते हों उनके लिए एक तरह से दर्द निवारक जैसी पहल मप्र सरकार ने कर दी है।मप्र ने यह साबित कर दिखाया है कि नाम बदलने से इतिहास नहीं बदल सकता।
भूले नहीं हों तो विभिन्न पदों के लिए परीक्षा लेने वाले मंडल का नाम पहले एमपी प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड था।इसके द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में जब धांधलियां लगातार सप्रमाण सामने आने लगीं तो इसका नाम मप्र व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) नाम कर दिया था इसी सरकार ने ।
कोई फर्क नहीं पड़ा नाम बदलने से, परीक्षाओं के ऐसे कच्चे चिट्ठे सामने आए कि पूर्व सीएम, पूर्व मंत्री से लेकर संघ के भाईसाबों तक द्वारा की गई सिफारिशों की चर्चा आम हो गई। चूंकि संघ के बड़े-बड़े भाई साब जुड़े थे इसलिए सरकार को अभयदान मिलता गया।
व्यापमं कांड किसी को याद ना रहे इस दिशा में इसी सरकार ने हमेशा की तरह फिर नाम बदलने में तत्परता दिखा दी।नया नाम हो गया कर्मचारी चयन बोर्ड (ईएसबी)।नाम बदलने से फिर भी कुछ नहीं हुआ, धांधली के कीर्तिमान इस बार भी कायम हो गए।पटवारी परीक्षा वाली जो मिलीभगत सामने आई तो सरकार ने परीक्षा परिणाम की जांच कराने की सजगता जरूर दिखा दी है, वह भी चुनाव सिर पर हैं तो?
पटवारी परीक्षा में 10 में से 7 टॉपर ग्वालियर के जिस भिंड स्थित कॉलेज सेंटर के हैं वो एनआरआई कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट कॉलेज भाजपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह का है। प्रदेश में बेरोजगार युवाओं की संख्या 80 लाख के करीब है।इनमें से पटवारी पद पर चयन के लिए परीक्षा देने वाले 13 लाख छात्रों में से लाखों समझ नहीं पा रहे हैं कि टॉप-10 में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवां संभाग के छात्र क्यों नहीं आ पाए। सरकार इतनी जल्दी तो परीक्षा परिणाम का परीक्षण करा नहीं पाएगी यह जानते हुए हाइकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में रघुनंदन सिंह परमार ने जनहित याचिका भी लगा दी है।
परीक्षा में धांधली का यह मामला पहला नहीं है । इससे पहले सिंधिया कोटे से सरकार में परिवहन मंत्री गोविंद सिंह के सागर कॉलेज ज्ञानवीर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस कॉलेज से शिक्षक पात्रता परीक्षा का पर्चा लीक हो चुका है। इस कॉलेज को ब्लेकलिस्ट किया जा चुका है।इस कांड की जांच पुलिस को सौंपी जा चुकी है। यह जांच भी इतनी जल्दी तो होना नहीं है।
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देखें तो सही है क्या ये का बा !
लोक गायिका नेहा राठोर के भोजपुरी में गाए ‘एमपी में का बा…’ गीत पर बखेड़ा खड़ा होना ही था। भाजपा महिला मोर्चा की शैलजा मिश्रा, अंजू माखीजा के नेतृत्व में इंदौर के रीगल चौराहे पर प्रदर्शन किया तो जावरा कंपाउंड भाजपा कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार बोलीं उन्हें माफी मांगना चाहिए।इंदौर से शुरु हुए प्रदर्शन अन्य जिलों में भी हो रहे हैं, बस हुआ यह है कि वो सब भी ‘एमपी में का बा…’ यू ट्यूब पर सर्च कर रहे हैं कि ऐसा क्या है जो महिला मोर्चा भड़क उठा है।
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एमपी ने सिखाया यूपी को
यूपी की योगी सरकार से अपराधियों के मकानों पर बुलडोजर चलाने की सीख एमपी सरकार ने ली थी। अब यूपी वालों ने एमपी में हुए शर्मनाक पेशाब कांड से प्रेरणा ले ली है।सोनभद्र जिले के जुगैल थाना में एक अधेड़ ने शराब के नशे में एक दलित युवक के कान में पेशाब कर दी।सोनभद्र में बीते सप्ताह संविदा लाइनमेन द्वारा दलिय युवक से चप्पल पर थूक चटवाने के बाद यह दूसरी घटना है।
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जय भारत के लिए 9702350493
अंग्रेजों के दिए इंडिया नाम को भारत कहने के लिए ‘मैं भारत हूं’ नाम वाले मोबाइल नंबर 9702350493 से ऑडियो संदेश आमजन के मोबाइल पर गूंज रहे हैं। भारत कहने के लिए 1 दबाएं, इंडिया के लिए 2 दबाएं।ये संकेत हैं कि 2024 के लोकसभा में इंडिया को भारत बनाने का मुद्दा बन जाएगा।
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बीआरसी भी रहेगी मैदान में
मप्र के मतदाताओं में से जरूरी नहीं कि सब को तेलंगाना के मुख्यमंत्री का नाम और चेहरा याद हो ही। चिंता की बात नहीं अगले कुछ महीनों में गांवों तक चंद्रशेखर राव और बीआरएस को सब जान जाएंगे। तेलंगाना सीएम की भारत (बी) राष्ट्र (आर) समिति (एस) पार्टी प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।भाजपा, कांग्रेस से जिन्हें टिकट नहीं मिलेगा उन सब के लिए आप के साथ बीआरसी भी आशा का केंद्र रहेगी ही।जिन्हें टिकट मिलेगा उन्हें धन संकट की चुनौती का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।
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ऐसी भूल तो नहीं करेंगे दिल्ली के नेता
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को उनके अनुभव के आधार पर ही चुनाव समिति का संयोजक बनाया गया है-यह बात पुरानी भाजपा के कार्यकर्ता तो समझते हैं। महाराज वाली भाजपा के कार्यकर्ताओं को यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया के मान-सम्मान में कमी लग रही है तो कोई ढाढस भी क्यों बंधाए?
दोनों नेता ग्वालियर के हैं, दोनों का वजूद है, साख है। तोमर ने मप्र में पार्टी को बनाने में त्याग किया है तो सिंधिया भाजपा की साख बचाने में डूबते को तिनके का सहारा बने हैं।मोशाजी ऐसी भूल तो करेंगे नहीं की तोमर का ओहदा बढ़ाने के चक्कर में श्रीमंत की ठसक की अनदेखी कर दें। बहुत संभव है कि 30 जुलाई को शाह जी की यात्रा सिंधिया की चमक बढ़ा दे। यदि ग्वालियर से तोमर पर ही पार्टी मेहरबान रहती है तो मान कर चलना चाहिए कि भोपाल से सिंधिया को अपने साथ ले गए प्रधानमंत्री ने उन्हें कोई अच्छा फ्यूचर प्लान समझा दिया होगा।
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*भाजपा के प्रिय बाबा के बिगड़े बोल *
बागेश्वरधाम वाले पं धीरेंद्र शास्त्री के ग्रेटर नोएडा वाली कथा के वॉयरल हुए वीडियो ने फिर हलचल मचा दी है, विरोध की लहर चल जरूर रही है लेकिन कुछ होना नहीं है।इन बाबा पर भाजपा के विचारों से प्रभावित होने का ठप्पा लगा हुआ है इसलिए भी शायद कुंआरी लड़कियों को खाली प्लॉट और सिंदूर-मंगलसूत्र वाली महिला को रजिस्ट्री हो गई कहने वाले इस वीडियो को लेकर कहीं कोई बवाल नहीं है, धर्म की जय ही जय है।यत्र नारी पूजयंते…जैसे बहु प्रचलित श्लोक कहने वाले सारे धुरंधर इसलिए भी अनसुना कर रहे हैं कि बाबा जिस धर्मसभा में अपने मुखारविंद से जब यह सब कह रहे थे, बड़ी संख्या में शामिल महिलाएं खिलखिला रहीं और खूब तालियां पीट रही थीं।
प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करै रैदासा
भक्तिकाल के कवियों-संतों में कबीर के समकण और मीरा के गुरु माने जाने वाले संत शिरोमणि रवि दास (रैदास) के लिए भाजपा की भक्ति धारा 230 सीटों तक उमड़ने वाली है।इन सीटों में अनुसूचित जन जाति की 47 सीटें और इस वर्ग के मतदाता 17 प्रतिशत हों तो संत रविदास मंदिर के लिए प्रदेश में निकलने वाली सामाजिक समरसता वाली भाजपा की दूरदृष्टि कांग्रेस को समझ नहीं आए यह संभव ही नहीं।
’मन चंगा तो कठौती में गंगा’ कहने वाले संत रैदास ने तो प्रभु भक्ति के लिए गाया था प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा…’अब जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो मतदाता ही स्वामी और सारे दल प्रमुखों का इनका दासानुरागी बनना लाजमी है।
सागर के नरसावली के बड़तूमा गांव में 11 एकड जमीन पर 100 करोड़ की लागत से संत रविदास मंदिर निर्माण की घोषणा तो फरवरी में ही मुख्यमंत्री ने सागर यात्रा के दौरान कर दी थी।अब रविदास मंदिर के लिए सामाजिक समरसता यात्रा निकालने की प्लॉनिग हो गई है। 230 विधानसभा सीटों को यह सामाजिक समरसता यात्रा कवर करेगी। पहले जिस तरह राम मंदिर के लिए गांव गांव ईंटें और चंदा इकट्ठा किया था, उसके हिसाब-किताब की चर्चा करना भी ठीक नहीं है, क्योंकि रविदास मंदिर के लिए तो सरकार ने ही सौ करोड़ मंजूर कर रखे हैं। 230 सीटों पर पहुंचने वाली यात्रा में मंदिर के लिए भाजपा ईँट, पत्थर, एक मुट्ठी चावल, गांव की मिट्टी का संग्रह वहां के लोगों से करेगी।
संत रविदास तो मूर्ति पूजा के विरोधी रहे हैं लेकिन सौ करोड़ की लागत से बनने वाला उनका यह मंदिर दिल्ली के सुप्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर बनेगा।मप्र पर्यटन विकास निगम इस मंदिर के साथ बाकी जो निर्माण करेगा उससे नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह के सागर जिले को यह सौगात देश के मुख्य टूरिस्ट सेंटर के रूप में भी पहचानी जाएगी।
आ रही है 25 सितंबर, फिर इवेंट
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिन्तक, संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष पण्डित दीनदयाल उपाध्याय की 25 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में भोपाल के जंबूरी मैदान पर मनाई जाने वाली जयंती ऐतिहासिक होगी।चुनाव से पहले हो रहे इस जयंती समारोह में प्रधानमंत्री कार्यकर्ताओं को हर बूथ पर पार्टी के पक्ष में सर्वाधिक मतदान और प्रदेश में फिर से भाजपा की सरकार बनाने के लिए जीत के मंत्र देंगे।पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी उनके साथ रहेंगे। पं उपाध्याय की 107 वीं जयंती पर जंबूरी मैदान के इस भव्यतम इवेंट में 10 लाख कार्यकर्ता शामिल हो सकें इसके लिए सभी जिलों के लिए कार्यकर्ताओं का लक्ष्य निर्धारित किया जा रहा है।
चक्रम होता विक्रम विवि
छन छन कर फैलती जा रही खबर संकेत दे रही है कि उज्जैन में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव का जो जमीन प्रेम पूर्व सांसद ने उजागर किया उसके लिए सीएम हाउस से इशारा हुआ था।आर्डर पर माल तैयार होने का ही नतीजा रहा कि उधर शिकायत हुई और हाथोंहाथ मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों की परीक्षण रिपोर्ट मिलते ही सिंहस्थ क्षेत्र की कृषि से आवासीय की गई भूमि को पुन: कृषि उपयोग के लिए सुरक्षित करने के आदेश जारी कर दिए।
उच्च शिक्षा मंत्री की परेशानी है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही है।अब विक्रम विश्वविद्यालय के सामने आ रहे घपले-घोटाले भी उनकी साख पर बट्टा लगा रहे हैं।मुनि सांदीपन के कारण कृष्ण की शिक्षा स्थली के रूप में पहचाना जाने वाला यह शहर अब प्रदेश के बाकी शहरों में कृष्ण के पर्याय मोहन के नगर में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में धब्बा बनते जा रहे विक्रम विवि के रूप में पहचाना जा रहा है।उच्च शिक्षा विभाग के दो ओएसडी के परिवार भी शिक्षा स्नान का पुण्य कमा चुके हैं।जिन कुलपति अखिलेश पांडे ने जो जीता वही विक्रम कहावत ईजाद की वही चक्रम साबित हो रहे हैं पीएचडी घोटाले में।
बीजेपी नहीं वीजेपी
विंध्य क्षेत्र में भाजपा को अपने चुनावी पोस्टरों के साथ ‘नक्कालों से सावधान’ वाला पोस्टर भी चस्पा करना पड़ सकता है। यह इसलिए कि लोग बीजेपी के भ्रम में वीजेपी प्रत्याशियों पर विश्वास ना कर बैठें।
मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी लंबे समय से अलग विंध्य राज की मांग कर रहे थे।पार्टी द्वारा गंभीरता से नहीं लेने पर नाराज विधायक त्रिपाठी ने विंध्य जनता पार्टी (वीजेपी) बना ली है। विंध्य क्षेत्र की 43 सीटों पर वीजेपी के प्रत्याशियों को लड़ाएंगे।रीवां और शहडोल संभाग में भाजपा, वीजेपी, कांग्रेस में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बनते जा रहे हैं।राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी त्रिपाठी को वैसे भी एकाधिक पार्टियों की रणनीति का अनुभव है।2003 में वो समाजवादी पार्टी से जीते, 2013 में कांग्रेस से और 2018 में भाजपा से जीते हैं, वक्त बताएगा वीजेपी से उनके सहित कितने प्रत्याशी जीतेंगे।





