अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

फिर यह सभ्यता क्या है?

Share

मंजुल भारद्वाज

लोग जश्न मना रहे हैं
ढोल ताशे बज रहे हैं
पटाखे फोड़ रहे हैं
मेरे चारों ओर सन्नाटा पसरा है
मैं हैरान हूँ
अपनी मौत की शोभा यात्रा में
आखिर लोग इतने खुश कैसे हैं?

कैसे ज़मीं का एक टुकड़ा
देश बन जाता है
जिसको बचाने के लिए
लोग जान देते हैं
पर हर रोज़
उस टुकड़े में रहने वाले लोग
आपस में एक दूसरे को लूटते हैं
नोचते खसोटते हैं
एक दूसरे की जान लेते रहते हैं
उलझन सुलझती नहीं
आखिर देश का मतलब
ज़मीं का टुकड़ा है
या उसमें रहने वाले लोग?

सच झूठ की लुका छिपी
धूप छाँव सी चलती रहती है
परछाई की तरह घटती बढ़ती रहती है
एक शरीर है
जिसका नित्यकर्म अटल है
जिसका एक ही सच है
एक ही ईमान है
एक ही ज़मीर है
वो है रोटी
फिर यह सभ्यता क्या है?

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें