शशिकांत गुप्ते
एक विप्र ने किसी शुद्र पर लघु शंका का प्रोक्षण किया। गलती को सुधारने के लिए,किसी ने अभिनय युक्त शुद्र के चरणों का प्रक्षालन किया गया।
तस्वीर वायरल हुई।
सार्वजनिक बहस का विषय यह बना कि,लघु शंका प्रोक्षण करने वाला किस दल का है? एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का वाक युद्ध छिड़ गया।
वाक युद्ध में मूल मुद्दा दल-दल में धस गया।
जो निकृष्ट कर्म किए गया,वह पाप कर्म है।
पाप कर्म का अर्थ- धर्म एवं नीति विरुद्ध किया जानेवाला आचरण, गुनाह
पाप कर्म से मुक्ति पाने के लिए हमारे यहां प्रायश्चित करने का प्रावधान है। जैसे—दान–व्रत करके प्रायश्चित करना।
पाप की परिभाषा यह भी है,ग्लानिवश किया गया कठोर आचरण।
एक व्यवहारिक सवाल है?
निकृष्ट कर्म करने वाले को ग्लानि होती होगी यह मानसिक रोग के चिकित्सकों के लिए खोज का विषय है?
बहरहाल प्रायश्चित करने के लिए सबसे सुलभ हमारे देश की पवित्र नदियां है।
पाप करो और नदियों में जा कर डुबकी लगा लो,पाप धुल जातें हैं,ऐसी मान्यता है?
एक कहावत है,नेकी कर दरिया डाल इस कहावत को आज की स्थिति में ऐसा लिखना चाहिए,पाप करो और नदी में नहाओ
जिनको तैरना नहीं आता या जिनको पानी से डर हैं,ऐसे लोगों के लिए एक वाशिंग मशीन जिसके साथ वाशिंग पावडर मुफ्त उपलब्ध है?
नदियों की पीड़ा को बयां करती फिल्मी गीत की ये पंक्तियां याद आती है।
राम तेरी गंगा मैली हो गई
पापियों के पाप धोते धोते
फिल्म तो काल्पनिक कहानी पर सिर्फ मनोरंजन के लिए निर्मित होती है।
यदि फिल्म पर सीरियसली
सोचने की मानसिकता जागृत होती तो सन 1964 में प्रदर्शित फिल्म संत ज्ञानेश्वर के इस गीत की इन पंक्तियों पर हम अमल करते?
इस गीत के गीतकार है भरत व्यास
कौन है ऊँचा कौन है निंचा सबसे वही है समाया
भेद भाव के झूठे भरम में,ये मानव भरमाया
धर्म ध्वजा फहारते चलो,प्रेम की गंगा बहाते चलो
उक्त पंक्तियों को धार्मिक आस्थावान लोग बखूबी जानते होंगे? इनदिनों आस्थावान लोगों की तादाद में दिन-ब-दिन इज़ाफा हो रहा है।
अंत में शायर हफ़ीज़ मेरठी रचित ये शेर सटीक है।
रात को रात कह दिया मैं ने
सुनते ही बौखला गई दुनिया
सच बोलने के लिए कितना साहस चाहिए यह शायर
उम्मीद फ़ाज़ली अपने शेर में लिखते हैं।
आसमानों से फ़रिश्ते जो उतारे जाएँ
वो भी इस दौर में सच बोलें तो मारे जाएँ
शशिकांत गुप्ते इंदौर





