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*कैलाश विजयवर्गीय के ताजमहल, राहुल-प्रियंका, बिहारी वाले बयानों पर भी मचा था बवाल!*

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मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने बयानों की वजह से विवादों के केंद्र में हैं. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों के मामले में मीडिया के सवालों पर उन्होंने “फोकट का सवाल मत पूछो” कहकर और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करके हंगामा खड़ा कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद माफी मांग ली, लेकिन यह पहला मौका नहीं, जब उनके बोल बिगड़े हैं. विजयवर्गीय का विवादित बयानों का लंबा इतिहास रहा है, जो अक्सर महिलाओं के कपड़ों, धार्मिक स्थलों, क्षेत्रीय लोगों और राजनीतिक विरोधियों पर केंद्रित रहता है.देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी की घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. इसी बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बिगड़े बोल ने आग में घी डालने का काम किया और विपक्ष ने इसे मुद्दा बना दिया. लेकिन, ये पहली बार नहीं है, जब उनके बयान पर हंगामा हुआ.

मंत्री के बयान न केवल व्यक्तिगत स्तर पर विवादास्पद होते हैं, बल्कि वे सामाजिक संवेदनशीलता, लैंगिक समानता और सांप्रदायिक सद्भाव पर सवाल उठाते हैं. जहां एक तरफ वे सत्ता की जिम्मेदारी संभालते हैं, वहीं उनके बयान अक्सर असंवेदनशील और भड़काऊ लगते हैं. विपक्ष इसे सत्ता के अहंकार का प्रतीक बताता है, जबकि समर्थक इन्हें स्पष्टवादिता कहते हैं. लेकिन, बार-बार माफी मांगने की स्थिति यह दिखाती है कि बोलने से पहले सोचना जरूरी है, खासकर एक जिम्मेदार पद पर.

इंदौर पानी कांड में क्या कहा?
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 10 से अधिक मौतें होने और सैकड़ों लोगों के बीमार पड़ने के बीच मीडिया ने मंत्री से जिम्मेदारी, इलाज खर्च और पानी व्यवस्था पर सवाल किए. विजयवर्गीय भड़क गए और कहा, “छोड़ो यार, फोकट का प्रश्न मत पूछो”. इसके बाद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जो वीडियो में साफ सुनाई दिया. उन्होंने पहले यह भी कहा था कि कुछ मौतें “नेचुरल” हैं. वीडियो वायरल होने पर उन्होंने माफी मांगी, कहा कि थकान और दुख में गलत शब्द निकल गए. लेकिन, यह बयान उनकी संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है, क्योंकि प्रभावित क्षेत्र उनके विधानसभा का है.

ताजमहल पर विवादित दावा
हाल ही में दिसंबर 2025 में सागर जिले के बीना में एक कार्यक्रम में विजयवर्गीय ने दावा किया कि ताजमहल मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था, जिसे शाहजहां ने मकबरे में बदल दिया. उन्होंने कहा कि मुमताज को पहले बुरहानपुर में दफनाया गया, बाद में मंदिर वाली जगह पर शव ले जाकर ताजमहल बनवाया. इस बयान पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक दलों तक हंगामा मचा. कांग्रेस ने इसे भड़काऊ बताया, जबकि समर्थकों ने ऐतिहासिक व्याख्या कहा.

महिलाओं के कपड़ों पर बार-बार टिप्पणी
विजयवर्गीय महिलाओं के पहनावे पर सबसे ज्यादा विवादित बयान देते रहे हैं. 2025 में उन्होंने कहा कि कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां उन्हें पसंद नहीं, सेल्फी के लिए “प्रॉपर कपड़े” में आने को कहा. 2022 में हनुमान जयंती पर बोले कि कुछ लड़कियां इतने गंदे कपड़े पहनती हैं कि शूर्पणखा लगती हैं. इससे पहले भी कई बार महिलाओं को देवी कहकर फिर उनके ड्रेस पर नैतिकता थोपने की कोशिश की.

बिहारियों और राहुल-प्रियंका पर टिप्पणियां
ताजमहल वाले कार्यक्रम में ही उन्होंने बिहार के लोगों पर कहा कि बिहारी होना जरूरी नहीं कि विनम्र हो, लेकिन नितिन नवीन जैसे नेता विनम्रता से आगे बढ़े. इससे बिहारियों को लेकर क्षेत्रीय पूर्वाग्रह का आरोप लगा. इससे पहले राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के भाई-बहन के रिश्ते पर टिप्पणी की कि यह “विदेशी वैल्यू” है. ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों के साथ हुई घटना पर कहा कि उन्हें “सबक” लेना चाहिए. ये बयान व्यक्तिगत हमले और क्षेत्रीय stereotyping दिखाते हैं.

पुराने विवाद और पैटर्न
विजयवर्गीय का विवादित बयानों का सिलसिला पुराना है. 2013 में शूर्पणखा वाली टिप्पणी, जनसांख्यिकी बदलाव पर गृहयुद्ध की आशंका जताना, भारत माता के विरोधियों पर कठोर कार्रवाई की बात – ये सभी उनके स्पष्टवादी लेकिन विवादास्पद अंदाज को दिखाते हैं. अक्सर माफी मांगनी पड़ती है, लेकिन पैटर्न नहीं बदलता. यह सवाल उठाता है कि क्या ऐसे बयान पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं या आधार को मजबूत करते हैं.

Ramswaroop Mantri

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