अग्नि आलोक
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लाख का तब वहां मुझे बचाने वाला कोई न था !

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पहले वे यहूदियों के लिए आए
मैं चुप रहा….
क्योंकि मैं यहूदी नहीं था !

फिर वे कैथोलिकों के लिए आए
मैं चुप रहा …..
क्योंकि मैं कैथोलिक नहीं था !

फिर ट्रेड यूनियनिस्टों के लिए आए
मैं चुप रहा …..
क्योंकि मैं ट्रेड यूनियनिस्ट नहीं था !

फिर वे समाजवादियों के लिए आए
मैं चुप रहा …..
क्योंकि मैं समाजवादी नहीं था !

फिर वह कम्युनिस्टों के लिए आए
मैं चुप रहा …..
क्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था !

अंत में वे मेरे लिए आए
और फिर वहां …..
मुझे बचाने वाला कोई नहीं था !

  साभार -पासतर निमोलर, सुप्रसिद्ध जर्मन यहूदी कवि  

  प्रस्तुतकर्ता - राम किशोर मेहता, सुप्रसिद्ध कवि और लेखक, अहमदाबाद, गुजरात, संपर्क - +91 94082 30881, ईमेल - ramkishoremehta9@gmail.com


      संकलन -निर्मल कुमार शर्मा गाजियाबाद उप्र संपर्क - 9910629632,

Ramswaroop Mantri

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