भारत में दोपहिया वाहनों) पर निर्भरता किसी से भी छिपी नहीं है. करोड़ों लोग हर दिन अपनी जरूरतों के लिए स्कूटर और बाइक का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, इन्हीं वाहनों को सबसे ज्यादा जोखिम भरा भी माना जाता है. सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा जान दोपहिया चालकों की जाती हैं. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या भारत को अब एक बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए. इसपर मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर.सी. भार्गव का मानना है कि जापानकी तरह सोचकर छोटे और सस्ते कारों की ओर कदम बढ़ाना होगा.
दिल्ली में आयोजित कंपनी की 44वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान भार्गव ने कहा कि देश की बड़ी आबादी अब भी दोपहिया वाहन पर निर्भर है. लेकिन इनके साथ जोखिम और असुविधा भी बहुत है. हमे ऐसी कारों की जरूरत है जो इन स्कूटर मालिकों को ऑप्शन दे सकें और सेफ हों. भार्गव का मानना है कि एंट्री- लेवल कारें आम लोगों के पहुंच से बाहर हो गई हैं. इसका कारण है पिछले कुछ सालों में सेफ्टी और उत्सर्जन मानकों में बदलाव. साल साल 2018-19 से यूरोपीय सेफ्टी और एमिशन स्टैंडर्ड भारत में लागू किए गए, जिसके चलते कारों की लागत बढ़ गई.
भार्गव ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि 1950 की दशक में वहां पर भी ऐसा ही संकट था. बड़ी संख्या में लोग दोपहिया पर चलते थे और चार पहिया का खर्च आम आदमी की पहुंच से बाहर था. उस समय जापान ने कई कार का कॉन्सप्ट लाया. ये छोटी कारें थी, जिन पर टैक्स कम लगता था, सेफ्टी के हिसाब से साधारण थी और कीमत किफायती थी. नतीजा ये हुआ कि ज्यादा से ज्यादा लोग दोपहिया छोड़कर कार खरीदने लगे और कार इंडस्ट्री ने तेजी से विकास किया. उन्होंने कहा कि अगर भारत भी इसी तरह छोटे आकार और कम टैक्स वाली कारें लाए, तो हर किसी के पास कार होने का सपना पूरा हो सकता है.
भार्गव ने बताया कि भारत के पैसेंजर व्हीकल मार्केट में छोटी कारों का दबदबा था. लेकिन आज उनका हिस्सा 30 प्रतिशत से कम रखा गया है. एक समय 5 लाख रुपए से कम कीमत वाली कारें लाखों की संख्या में बिकती थी. वित्त वर्ष 2016 में एंट्री-लेवल कारों की सेल लगभग 9.34 लाख यूनिट तक पहुंच गई थी, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में ये संख्या घटकर सिर्फ 25,402 रह गई. इस भारी गिरावट का कारण है कीमतों में लगातार बढ़ोतरी. जहां सेफ्टी और प्रदूषण मानक जरूरी हैं, वहीं उन्होंने कार को इतना महंगा बना दिया कि दोपहिया चलाने वाला वर्ग कार खरीद ही नहीं पा रहा.





