नितेश सक्सेना
पॉलीथिन पर बैन लगाते हैं पर शौचालय के अभाव में खुले में मूतना अलाउ है ।
ट्रेन में टॉयलेट तक मे लोगो को ठूस देते है पर बाइक पर तीन बैठे मिल जायें तो चालान कट जाता है ।
सड़को पर गड्ढों की जिम्मेदारी किसी की नहीं है पर टैक्स कफन तक पर लिया जाता है ।
“सेठ” लोगो को करोड़ों का उधार देकर विदेश भगा दिया जाता है और जनता पर “मिनिमम बैलेंस” ना रखने पर फाइन वसूला जाता है।
जनता की कारें दस पंद्रह साल बाद कबाड़ घोषित कर दी जाती हैं पर रोडवेज की खटारा बसें पचास साठ साल में भी नहीं बदली जाती हैं।
नौकरी भर्ती का दूर दूर तक पता नहीं पर “एलिजिबिलिटी टेस्ट” के नाम करोड़ो रुपये के फॉर्म बेरोजगारों से भरवाये जाते हैं।
“दो गज की दूरी” का पालन जनता के डंडे मारकर करवाया जाता है पर नेता जी की रैली में आई भाड़े की भीड़ को कीर्तिमान बताया जाता है ।
नेता जी की सैलरी,पेंशन हर साल बढ़ जाती है लेकिन जनता की पेंशन,सैलरी कम करने के लिये तरह तरह की जुगाड़ भिड़ाई जाती है।
जनता की सहूलियत के लिये ख़र्च करने को पैसा नहीं है पर विधायक करोड़ो में खरीद लिये जाते हैं।
जनता से एक एक रुपये का हिसाब चाहिये पर “पीएम” केयर्स फंड का हिसाब मांगने पर बवाल हो जाता है।
देश का “आर्टिफिशल गरीब नेता” आठ हजार करोड़ के प्लेन से उड़ता है वहीं एक बच्चा अपने दो साल के भाई की लाश लेकर सड़क पर बैठा रहता है।
फिर भी जनता उफ़ नहीं करती है।
Nitesh Saxena






