इंदौर
इंदौर के गौराकुंड में 10 साल बाद भी सबसे ऊंची मटकी फूटेगी या नहीं, यह सवाल सबके मन में कौंध रहा है। हां, शहर की सबसे ऊंची मटकी 2013 के बाद से आज तक नहीं फूटी है। इस बार भी 16 गोविंदा टीमें भाग लेंगी और इस फोड़ने की कोशिश करेंगी। ईनाम 51 हजार रुपए है। जानिए, इंदौर की इस सबसे ऊंची मटकी की पूरी कहानी…
17 साल पहले इंदौर में कृष्ण जन्माष्टमी पर संस्था सृजन ने मटकी फोड़ आयोजन की शुरुआत की थी। इस आयोजन के इतिहास में सिर्फ 2013 में ही 30 फीट की ऊंचाई पर लगी मटकी को एक टीम ने फोड़ा और 51 हजार का इनाम जीता था। उसके बाद से 30 फीट की ऊंचाई पर लगी मटकी को आज तक कोई भी टीम फोड़ नहीं सकी है। जब आखिरी बार मटकी फोड़ने वाले की तलाश शुरू की तो बड़ी निराश करने वाली सूचना मिली। आयोजक ने बताया 2013 में मटकी फोड़ने वाला शख्स 2020 में कोरोना में दुनिया को अलविदा कह चुका है।
मुंबई में देखा माहौल तो मिनी मुंबई में की शुरुआत
संस्था सृजन के अध्यक्ष कमलेश खंडेलवाल ने कहा कि 2006 में इंदौर में मटकी फोड़ के आयोजन की शुरुआत की। इसके पहले जब वे मुंबई जाते थे तो वहां दोस्तों के साथ मटकी फोड़ आयोजन में गए। जहां उन्होंने मटकी फोड़ का माहौल देखा। इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोग को देखा। तभी विचार बना लिया था कि इंदौर में भी ऐसा आयोजन करना है। इसके बाद 2006 में इस आयोजन की शुरुआत मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर में की।
सबसे पहले लगाई थी 14 फीट ऊंची मटकी
2006 में सबसे पहले मटकी फोड़ का आयोजन सांई नाथ चौराहे, मल्हारगंज किया। तब 14 फीट ऊंची मटकी फोड़ का आयोजन किया। उस समय आसपास के मोहल्ले की टीमों ने हिस्सा लिया। तब 1100 रुपए का ईनाम रखा था। दूसरे साल शास्त्री कॉर्नर पर आयोजन किया। इसमें मटकी हाइट को थोड़ा बढ़ाया गया। तब 5 से 6 टीमों में इसमें हिस्सा लिया।
तीसरे साल हुआ राजनीतिक प्रपंच
उन्होंने कहा तीसरे साल सागर जूस, गौरा कुंड चौराहे के पास मटकी फोड़ का आयोजन करना तय किया। तब राजनीतिक प्रपंच हुआ। कुछ लोगों ने मटकी फोड़ पर रोक लगवाने का प्रयास किया। तब प्रशासन से बात की। फिर आयोजन किया और ये सिलसिला यहां जारी है। आयोजन की लोकप्रियता बढ़ने पर लोगों की भीड़ लगने लगी। दूसरे शहरों की टीमें शामिल होने लगी। अब करीब एक लाख लोग इस आयोजन को देखते है।

एक लाख से ज्यादा लोग होते हैं इकट्ठा।
अलग-अलग हाइट पर लगती है मटकी
गौराकुंड चौराहे के पास हर साल दो मटकी अलग-अलग हाइट पर लगाई जाती है। एक 21 फीट की ऊंचाई पर तो दूसरी 30 फीट की ऊंचाई पर। 21 फीट की मटकी फोड़ने पर 2100 रुपए का इनाम, तो 30 फीट ऊंची मटकी फोड़ने पर 51 हजार रुपए का इनाम रहता है। खंडेलवाल के मुताबिक 2013 में कंडीलपुरा मित्र मंडल द्वारा 30 फीट ऊंची मटकी फोड़ी गई। उसके बाद अब तक ये मटकी कोई भी टीम नहीं फोड़ सकी है। उस वक्त राज नामक युवक ने इसे फोड़ा था, जो 2020 में कोरोना के चलते इस दुनिया को अलविदा कह गया।

17 साल से हो रहा है यहां मटकी फोड़ का आयोजन।
इसलिए नहीं फूटी 30 फीट ऊंची मटकी
वे बताते है टीमें 21 फीट ऊंची मटकी तो फोड़ देते है। ये मटकी फोड़ने वाली हर टीम को 2100 रुपए का इनाम दिया जाता है। 30 फीट ऊंची मटकी नहीं फोड़ पाने के पीछे का कारण कम स्किल वाले युवाओं का टीम में होने और ऊंचाई पर चढ़ने का अभ्यास नहीं कर पाना वजह हो सकती है। संभवत: इस बार 30 फीट ऊंची मटकी फूटेगी। आयोजन में टीम और जनता मटकी फोड़ का आनंद ले सके इसलिए 21 फीट की हाइट पर भी मटकी लगाई जाती है।
5 लीटर पानी भरकर करते हैं चेक
आयोजन में जो मटकी आती है उसे पांच लीटर पानी भरकर पहले चेक किया जाता है। 25 मटकियां आयोजन में रहती है। मटकी में माखन, मिश्री, दूध-दही, जूस भरा जाता है। एक टीम के मटकी फोड़ने पर दूसरी मटकी लगाई जाती है और फिर दूसरी टीम मटकी फोड़ती है। रात करीब 8.30 बजे तक टीमें पहुंचती है, 9 बजे से आयोजन शुरु होता है। पौने 12 बजे तक लोगों की भीड़ कम हो जाती है, क्योंकि लोग जन्माष्टमी का पर्व मनाने मंदिर या अपने घर लौट जाते है। आयोजन में 10-10 किलो माखन-मिश्री का वितरण होता है।

पूरी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस के इंतजाम के बीच होती है यह प्रतियोगिता।
200 लोगों की टीमें, एम्बुलेंस और डॉक्टर भी
टीमों की सुरक्षा के लिए यहां डॉक्टर और एम्बुलेंस व्यवस्था रहती है। आसपास के अस्पतालों को भी एहतियात सूचना दे दी जाती है। संस्था के 200 लोगों पूरी व्यवस्था संभालते है। टीमों के प्रदर्शन के दौरान घेरा बनाने, ट्रैफिक व्यवस्था संभालने, मंच की व्यवस्था संभालने जैसे व्यवस्था ये देखते है।





