ब्रिज से लेकर अस्पताल तक… चूहों ने बनाया ठिकाना
इंदौर में चूहों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है. नवजातों को काटने से लेकर पुलों और प्रतिमाओं को खोखला करने तक, चूहों का प्रकोप बढ़ गया है. इस साल 1280 से ज्यादा लोगों को चूहों ने काटा, मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की गिनती देश के सबसे स्वच्छ शहरों में होती है. इस शहर में चूहे परेशानी का सबब बन गए हैं. हाल के महीनों में चूहों के आतंक से जुड़े कई मामले सुर्खियों में रहे. एमवाय अस्पताल में नवजातों को चूहों की ओर से कुतरे जाने की घटना ने शहर को झकझोर दिया, जबकि शास्त्री ब्रिज और रीगल चौराहे पर गांधी प्रतिमा के नीचे 1000 से अधिक बिल मिलने से हड़कंप मचा हुआ है. स्थिति का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2025 के पहले 11 महीनों में चूहों के काटने के 1280 मामले सामने आए हैं.

स्वच्छता में देश का नंबर-1 शहर मध्य प्रदेश का इंदौर इन दिनों चूहों के आतंक से जूझ रहा है. शहर के सबसे बड़े महाराजा यशवंतराव अस्पताल में नवजातों को कुतरने से लेकर, शास्त्री ब्रिज में गड्ढा करने और रीगल चौराहे पर गांधी प्रतिमा की नींव खोखली करने तक, चूहों का यह प्रकोप एक गंभीर संकट बन चुका है. अब चूहों के काटने का नया मामला सामने आया है.इदौर में एंटी रेबीज डोज लगवाने के लिए हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक में लगवाने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है. इस साल इंदौर में चूहों के काटने (रेट बाइट) के रिकॉर्ड मामले दर्ज हुए हैं. अकेले जुलाई के महीने में 278 मामले सामने आए, जो सबसे ज्यादा हैं. पूरे 11 महीनों में 1280 से ज्यादा लोगों को चूहों ने काटा है. सोशल मीडिया पर यूजर इस स्थिति पर मीम्स और सरकास्टिक पोस्ट के जरिए नगर निगम के दावे पर सवाल उठा रहे हैं.
‘चूहा-बाहुल्यता में भी नंबर वन’
कई लोगों ने तंज कसा है कि यह शहर स्वच्छता के साथ-साथ अब चूहा-बाहुल्यता में भी नंबर वन बनने की ओर अग्रसर है. चूहों के काटने से पीड़ितों ने बताया कि शहर में अब चूहों का आतंक लगातार बढ़ रहा है. चूहों के काटने से परेशान लोग एंटी रेबीज डोज लगवाने लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं, पीड़ितों के मुताबिक सबसे ज्यादा चूहे हॉस्टल्स और खाने पीने के होटलों के आसपास देखे जा रहे हैं.
दो मासूम नवजातों को काटा
सितंबर महीने में इंदौर संभाग के सबसे बड़े महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चूहों ने दो मासूम बच्चों को काटा, जिसमें दोनों ही बच्चों की जान चली गई थी. यह घटना अस्पताल के एनआईसीयू नवजात ICU में हुई थी, जो स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही थी. इसे लेकर जय आदिवासी युवा संगठन ने भी लगातार प्रदर्शन किया था, जिसके बाद दोनों ही परिवारों को सरकार ने मुआवजा भी दिया था. वहीं अस्पताल प्रशासन ने इस मामले में लापरवाही मानते हुए कई कर्मचारियों और पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर कार्रवाई की, लेकिन परिजनों का आरोप है कि बच्चों की मौत का मुख्य कारण चूहे ही थे.
शास्त्री ब्रिज पर लगभग 5 फीट गहरा गड्ढा
वहीं दूसरी ओर चूहों ने शहर के बुनियादी ढांचे को भी नहीं बख्शा. हाल ही में व्यस्त शास्त्री ब्रिज पर लगभग पांच फीट गहरा गड्ढा हो गया था, जिसकी मुख्य वजह पुल के नीचे चूहों के बनाए गए 20 से ज्यादा बिल थे, जिसने नींव को कमजोर कर दिया. इसके अलावा, रीगल चौराहे पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा की रोटरी में भी चूहों ने 1000 से ज्यादा बिल खोदकर जमीन को खोखला कर दिया है.
सितंबर में एमवाय अस्पताल के एनआईसीयू में दो नवजातों को चूहों ने कुतर दिया था, जिसके बाद उनकी मौत हो गई. इस घटना ने पूरे शहर में आक्रोश पैदा कर दिया था. जय आदिवासी युवा संगठन (JAYS) ने मामले को लेकर कई विरोध प्रदर्शन किए, इसके बाद दोनों परिवारों को मुआवजा दिया गया. वहीं, अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही स्वीकारते हुए कुछ कर्मचारियों और पेस्ट कंट्रोल एजेंसी पर कार्रवाई की, लेकिन परिजन का आरोप अभी भी यही है कि बच्चों की मौत की असली वजह चूहे थे. सोशल मीडिया पर यह घटना शहर की सबसे बड़ी लापरवाही के तौर पर तीखी आलोचना का कारण बनी.
खोद डाली ब्रिज की नींव
इसी बीच, चूहों ने शहर के बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है. व्यस्ततम शास्त्री ब्रिज के नीचे चूहों की ओर से बनाए गए 20 से अधिक बिलों ने लगभग पांच फीट गहरा गड्ढा पैदा कर दिया, जिससे पुल की नींव कमजोर हो गई. वहीं रीगल चौराहे पर गांधी प्रतिमा के पास चूहों के 1000 से ज्यादा बिल मिलने से जमीन खोखली हो चुकी है.
11 महीनों में 1280 लोगों को चूहों ने काटा
चूहों के हमलों में बढ़ोतरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के हुकुमचंद पॉलीक्लिनिक में एंटी-रेबीज इंजेक्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहती हैं. सिर्फ जुलाई में 278 मामले सामने आए, जो इस वर्ष का सबसे बड़ा आंकड़ा है. कुल मिलाकर साल के 11 महीनों में 1280 से ज्यादा लोग चूहों के हमले का शिकार हुए हैं. सोशल मीडिया पर लोग नगर निगम के स्वच्छता दावों पर मीम्स और व्यंग्य के जरिए तंज कसते नजर आ रहे हैं. कई लोगों ने कहा कि इंदौर अब स्वच्छता के साथ-साथ चूहा-बाहुल्यता में भी नंबर-1 बनने की ओर है.
चूहों के काटने से पीड़ित लोगों का कहना है कि चूहों का आतंक खासतौर पर रात के समय बढ़ जाता है. सबसे ज्यादा परेशानी हॉस्टल्स तथा होटल-ढाबों के आसपास देखी जा रही है. लगातार बढ़ते हमलों से घबराए लोग एंटी-रेबीज डोज लेने अस्पताल पहुंच रहे हैं. शहर में चूहों का बढ़ता खतरा अब प्रशासन के लिए एक नई चुनौती बन गया है, जिसे तुरंत ठोस कार्रवाई की जरूरत है.




