अग्नि आलोक
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आ बैल मुझे मार…..

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तो बैल क्यू नही मारेगा? बैल से मरवाने के नए नए तरीके इजाद हो रहे है। मसलन बच्चा मोबाइल या टीवी देखेगा तभी खायेगा नही तो नही।पैरेंट्स सहूलत के लिए कॉम्प्रोमाइज कर लेते है। और वहीं आप औलाद के दुश्मन बन जाते हैं।असल में जब आप खाना खाते है तो पूरी बॉडी खाती है उसका पूरा सिग्नलिंग सिस्टम हाई अलर्ट पर होता है जो उसे खाने के गंध रंग खाने की शकल फिर स्वाद एक के बाद एक ट्रिगर पैंक्रियाज को भेजता रहता है की आप इन्सुलिन भेजते रहो।आप तो टीवी देख रहे है सिग्नल्स जा नही रहे है अचानक फूड पहुंचने से घबराहट में इंसुलिन रिलीज करेगा तबतक फूड की शुगर ब्लड में ही रहेगी जाहिर है शुगर लेवल बढ़ेगा ही……….

दूसरा सींग मरवाने का तरीका है जिसे psychatry की दुनिया में फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम कहते है।ये सेल फोन के ओवर इन्वॉल्वमेंट से होता है।ये  एक तरह का हैल्यूजिनेशन है जिसमे व्यक्ति बार बार नोटिफिकेशन चेक करता रहता है और कई बार बिना नोटिफिकेशन आए ही उसे वाइब्रेशन फील होता है।ऐसे लोग साल के 15/20 दिन केवल स्क्रॉलिंग में ही निकाल देते हैं।एक सर्वे के अनुसार 3 मिनट में नोटिफिकेशन देख लिया जाता है।सेल्फी नामक बीमारी से कौन अनभिज्ञ है।सैकड़ों एक्सीडेंट्स आप सुनते ही रहते है। सेल्फी खास कर मिरर सेल्फी आपके अकेलेपन का परिचायक होती है। जो आप है उससे ज्यादा खूबसूरत दिखने की चाह में और खासकर अगर आईफोन है तो दूसरों को दिखाने की चाहत में अपलोड करते जाते है।फैंटम वाला व्यक्ति अपना पूरा फोकस रिल्स,सेल्फी पर लगा कर अपने काम या स्टडी से फोकस लूज करता जाता है और बाहरी दुनिया / दोस्तो से कटता चला जाता है। याद रखे फॉलवर्स का बढ़ना दोस्तो के घटने की निशानी है।

मोबाइल ने हमको निकम्मा कर दिया

वरना हम भी आदमी थे काम के।

Ramswaroop Mantri

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