- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुरक्षा राजनीति, अर्थव्यवस्था और शासन से जुड़ी 4 उच्चस्तरीय कैबिनेट बैठकों की अध्यक्षता करेंगे।राहुल गांधी आज कानपुर पहुंचकर पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले शुभम द्विवेदी के परिजनों से मिलेंगे।
1. तीनों सेनाओं के प्रमुख के साथ PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग
पहलगाम आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल संधि को निलंबित करने और अटारी-वाघा बॉर्डर बंद करने जैसे कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री और सेना प्रमुखों के साथ उच्च-स्तरीय बैठक की, जिसमें सैन्य और कूटनीतिक विकल्पों पर विचार किया गया।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस कायराना हमले के बाद केंद्र की मोदी सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है। सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ त्वरित और कड़े कदम उठाए हैं, जिसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना और अटारी-वाघा बॉर्डर को बंद करना शामिल है। अब लगातार हाई-लेवल बैठकों का दौर जारी है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान और अन्य सशस्त्र बलों के प्रमुखों के साथ अहम बैठक की। वहीं कल सीसीएस की भी एक जरूरी बैठक होनी है।
जानकारी के अनुसार पीएम मोदी की अध्यक्षता में कल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक प्रस्तावित है। सूत्रों की मानें तो इन बैठकों में पाकिस्तान के खिलाफ बड़े सैन्य और कूटनीतिक एक्शन की रणनीति पर चर्चा हो रही है, जो आतंकवाद के खिलाफ भारत के जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करेगा। वहीं आज पीएम आवास पर जो बैठक हुई उसमें रक्षा मंत्री, एनएसए समेत तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे।
पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की जान गई, जिसमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक शामिल थे। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली है, जिसके तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े होने के सबूत सामने आए हैं। इस हमले ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार का रुख स्पष्ट है—आतंकियों और उनके समर्थकों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
2. हाई लेवल मीटिंग के बाद पीएम मोदी से मिले मोहन भागवत
पीएम मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल और तीनों सेना प्रमुखों के साथ एक हाई लेवल बैठक की। इस बैठक के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पीएम मोदी से मिलने उनके आवास पहुंचे। ये बैठक इसलिए भी अहम माना जी रही है क्योंकि 2014 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद यह पहला मौका था, जब संघ प्रमुख पीएम के सरकारी आवास पहुंचे थे।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े फैसले लिए। वहीं लगातार हाई लेवल बैठकों का दौर जारी है। मंगलवार को पीएम मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल और तीनों सेना प्रमुखों के साथ एक हाई लेवल बैठक की। इस बैठक के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पीएम मोदी से मिलने उनके आवास पहुंचे। ये बैठक इसलिए भी अहम माना जी रही है क्योंकि 2014 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद यह पहला मौका था, जा संघ प्रमुख पीएम के सरकारी आवास पहुंचे थे।
सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में हुई। बैठक से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और तीनों सशस्त्र बलों के प्रमुखों सहित शीर्ष रक्षा अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। इन बैठकों से संकेत मिलता है कि सरकार इस हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
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3.भारत के युद्धाभ्यास से घबराया पाकिस्तान,इस्लामाबाद-रावलपिंडी पर सबसे ज्यादा खतरा!
भारत से बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तानी वायु सेना ने कराची, इस्लामाबाद और रावलपिंडी के ऊपर हवाई गश्त बढ़ा दी है, क्योंकि उसे भारत द्वारा हमले का डर है। भारतीय वायु सेना के युद्धाभ्यास और नौसेना के मिसाइल परीक्षणों ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान ने सीमा पर हथियारों की तैनाती भी बढ़ा दी है।
भारत से तनाव के बीच पाकिस्तानी वायु सेना ने कराची, इस्लामाबाद, रावलपिंडी और स्कार्दू के ऊपर हवाई गश्त को काफी हद तक बढ़ा दिया है। पाकिस्तान को डर है कि भारत किसी भी वक्त पाकिस्तान पर हमला कर सकता है। पाकिस्तान भारतीय वायु सेना के युद्धाभ्यास ‘आक्रमण’ से भी घबराया हुआ है। इस अभ्यास में भारतीय वायु सेना के दर्जनों लड़ाकू विमान सटीक हमले का अभ्यास कर रहे हैं। इस बीच भारतीय नौसेना ने भी मिसाइल परीक्षण कर अरब सागर में पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है।
पाकिस्तान ने कर ली युद्ध की तैयारी
जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान में तनाव चरम पर है। इस हमले में 26 भारतीय नागरिकों की मौत हुई थी। पाकिस्तान ने युद्ध की धमकियां देते हुए सीमा पर भारी मात्रा में हथियारों को जमा किया है और सैनिकों की तैनाती को बढ़ाया है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ दिन-रात युद्ध और परमाणु हमले की धमकी दे रहे हैं। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के दूसरे शीर्ष नेता अपनी मिसाइलों का खौफ दिखाकर भारत को गीदड़भभकी देने की कोशिश में जुटे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी वायु सेना ने सैदु शरीफ और स्कार्दू एयरबेस को एक्टिवेट कर दिया है। इन एयरबेस पर JF-17 लड़ाकू विमान उड़ान भर रहे हैं। ये विमान चीनी PL-10 और PL-15 मिसाइलों से लैस हैं, जो हवा से हवा में मार करने में सक्षम हैं। पाकिस्तान को डर है कि भारतीय वायु सेना एक बार और उनके देश पर एयरस्ट्राइक कर सकती है। इस डर से उसने F-16 की आधी फ्लीट को सीमावर्ती इलाकों से हटाकर ग्वादर के पास छिपा दिया है, जिससे वे भारत के शक्तिशाली रडार की नजरों से बचे रह सकें।
पाकिस्तान को किस बात का है डर
कराची, इस्लामाबाद और रावलपिंडी पर पाकिस्तानी वायु सेना की गश्तें बताती है कि वह भारत के हमले की आशंका से कितना डरा हुआ है। कराची पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी और प्रमुख नौसैनिक अड्डा भी है। यहां पर मसरूर एयरबेस है, जो मिराज स्क्वाड्रन का होमबेस है। यह कराची और अरब सागर में पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की निगरानी और रक्षा का जिम्मा संभालता है। पाकिस्तान को यह भी डर है कि उसने जरा भी ढील दिखाई तो भारत कभी भी उसका नेवल ब्लॉकेज कर सकता है।
इस्लामाबाद-रावलपिंडी पर सबसे ज्यादा खतरा!
इस्लामाबाद और रावलपिंडी में पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य मुख्यालय हैं। इनमें पाकिस्तानी वायु सेना मुख्यालय और वायु रक्षा कमान शामिल हैं। पाकिस्तान अपने अधिकतर अवाक्स विमानों का संचालन यहीं से करता है। भारत ने अगर इन जगहों को निशाना बनाया तो पाकिस्तान का शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पंगु हो जाएगा। इसके अलावा पाकिस्तान को अपनी ‘आसमानी आंख’ यानी अवाक्स सिस्टम से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
4. दिल्ली में किराएदार ने बेच डाली वक्फ प्रॉपटी

दिल्ली के शाहदरा में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक किराएदार ने वक्फ बोर्ड की संपत्ति को ही बेच दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, वक्फ बोर्ड और एमसीडी से जवाब मांगा है। मस्जिद प्रबंधन समिति ने किराएदार पर संपत्ति बेचने का आरोप लगाया है।
दिल्ली में एक किराएदार ने ऐसा कारनामा किया है, जिसने सबको हैरान कर दिया। दिल्ली के शाहदरा में एक किराएदार ने वक्फ की संपत्ति को ही बेच डाला। इस चौंकाने वाले मामले ने दिल्ली हाई कोर्ट का ध्यान खींचा है, और अब कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए दिल्ली पुलिस, वक्फ बोर्ड, एमसीडी और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सभी को दो सप्ताह के भीतर याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
शाहदरा के वेस्ट रोहताश नगर में मेन बाबरपुर रोड पर स्थित 118 वर्ग गज की वक्फ संपत्ति को लेकर यह विवाद शुरू हुआ। मस्जिद पराओ वाली की प्रबंधन समिति ने कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें बताया गया कि इस संपत्ति को किराएदार ने गैरकानूनी तरीके से बेच दिया। समिति ने 13 जनवरी 2025 को शाहदरा के एसएचओ से मुलाकात कर शिकायत दर्ज की थी। इसके बाद 14 जनवरी को वक्फ बोर्ड और एसएचओ को लिखित शिकायत दी गई, और 16 जनवरी को एमसीडी को भी सूचित किया गया। आरोप है कि अभी तक इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जस्टिस तारा वितस्ता गंजू की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, वक्फ बोर्ड, एमसीडी, संपत्ति बेचने वाले और खरीदने वाले को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है। सुनवाई के दौरान पुलिस, एमसीडी और अन्य विभागों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वे इस मामले में कार्रवाई करेंगे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 मई को होगी।
याचिका के मुताबिक, यह संपत्ति मस्जिद की प्रबंधन समिति ने मेसर्स दयाल सिंह इंदरजीत सिंह को उनके मालिक दयाल सिंह के माध्यम से किराए पर दी थी। लेकिन, किराएदार ने ही इस संपत्ति को बेचने का गैरकानूनी कदम उठाया, जिसके बाद यह मामला कोर्ट तक पहुंचा।
मस्जिद पराओ वाली की प्रबंधन समिति ने कोर्ट से मांग की है कि इस गैरकानूनी बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। समिति के वकील वजीह शफीक के जरिए दायर याचिका में संबंधित अधिकारियों से तुरंत एक्शन लेने की अपील की गई है।
अब सभी की निगाहें 14 मई पर टिकी हैं, जब इस मामले की अगली सुनवाई होगी। कोर्ट सभी पक्षों के जवाबों पर विचार करने के बाद अपना फैसला सुनाएगा। इस मामले में दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। यह मामला वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाता है। वक्फ संपत्तियां मुस्लिम समुदाय के लिए दान की गई संपत्तियां होती हैं। इनका इस्तेमाल धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है। इनकी खरीद-बिक्री नहीं की जा सकती।
जीत की तरफ कदम बढ़ा चुकी थी दिल्ली, फिर पांच गेंदों में ही पूरी कहानी बदल गई
आईपीएल 2025 में केकेआर ने दिल्ली कैपिटल्स को 14 रनों से हराया। 205 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली की टीम 190 रन ही बना सकी, डु प्लेसिस और अक्षर पटेल के प्रयास विफल रहे। नरेन ने 5 ही गेंद पर मैच का रुख बदल दिया।

दिल्ली कैपिटल्स की टीम केकेआर के खिलाफ आईपीएल 2025 का 48वां मुकाबला हार गई है। पहले खेलते हुए अजिंक्य रहाणे की कोलकाता नाइटराइडर्स ने 204 रन बनाए। अपने घरेलू मैदान अरुण जेटली स्टेडियम पर एक समय दिल्ली की टीम आसानी से जीत हासिल करती नजर आ रही थी। 13.1 ओवर के बाद दिल्ली का स्कोर 3 विकेट पर 136 रन था। आखिरी 41 गेंद पर टीम को जीत के लिए 69 रन चाहिए थे।
केकेआर के लिए 14वां ओवर सुनील नरेन डाल रहे थे। पहली गेंद पर छक्क खाने के बाद उन्होंने दिल्ली के कप्तान अक्षर पटेल को आउट कर दिया। 23 गेंद पर अक्षर ने 43 रनों की पारी खेली। इसी ओवर की आखिरी गेंद पर ट्रिस्टन स्टब्स भी नरेन की शिकार बन गए। वह गेंद समझ ही नहीं पाए और उनका विकेट उड़ गया। इसी ओवर ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। बची हुए कसर नरेन ने अपने अगले ओवर में फिफ्टी लगाने वाले फाफ डु प्लेसिस को आउट करके पूरी कर दी।
केकेआर ने 14 रनों से जीत हासिल की
सुनील नरेन और वरुण चक्रवर्ती की फिरकी के जादू से कोलकाता नाइट राइडर्स ने दिल्ली कैपिटल्स को 14 रन से हराकर प्ले ऑफ में जगह बनाने की अपनी उम्मीदों को जीवंत रखा। इस हार के बावजूद दिल्ली की टीम 10 मैच में 12 अंक के साथ चौथे स्थान पर बनी हुई है। नाइट राइडर्स इतने ही मुकाबलों में नौ अंक के साथ सातवें स्थान पर है। दिल्ली की पिछले चार मैच में यह तीसरी हार है।
नाइट राइडर्स के 205 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली की टीम नरेन (29 रन पर तीन विकेट) और चक्रवर्ती (39 रन पर दो विकेट) की बलखाती गेंदों के सामने डु प्लेसिस (62 रन, 45 गेंद) के अर्धशतक और कप्तान अक्षर पटेल (43 रन, 23 गेंद) के साथ उनकी चौथे विकेट की 76 रन की साझेदारी के बावजूद नौ विकेट पर 190 रन ही बना सकी। दिल्ली की ओर से डु प्लेसिस और अक्षर के अलावा विपराज निगम (38 रन, 19 गेंद) ही 20 रन के आंकड़े को हार कर पाए।
भारत-पाकिस्तान के बीच जंग हुई तो कितना आएगा खर्च, आर्थिक नुकसान के अनुमान 750 अरब डॉलर तक जा सकते हैं
पहलगाम हमले के बाद भारत-पाक तनाव बढ़ने पर पीएम मोदी ने सुरक्षा बैठक की और आतंकवाद को कुचलने का संकल्प लिया। सेना को खुली छूट दी गई है। व्यापक युद्ध की स्थिति में भारत को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है, जो लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। कारगिल युद्ध में भी हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के बाद पीएम मोदी ने आतंकवाद को कुचलने का संकल्प लिया। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमताओं पर पूरा भरोसा जताया। सेना को अपना एक्शन, टारगेट और टाइम तय करने की खुली छूट दी। अगर भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्ण पैमाने पर जंग होती है तो इसकी लागत बहुत अधिक होगी। यह कई लाख करोड़ रुपये तक जा सकती है। हालांकि, युद्ध की लागत का सटीक अनुमान लगाना बहुत मुश्किल है। कारण है कि यह जंग की अवधि, तीव्रता और दायरे जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है। फिर भी कारगिल युद्ध के अनुभवों और कुछ अनुमानों के आधार पर एक आइडिया जरूर मिल सकता है।
अलग-अलग सोर्सेज के अनुसार, 1999 के कारगिल युद्ध की भारत के लिए अनुमानित लागत 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये के बीच थी। यह उस समय के संदर्भ में यह एक बड़ी रकम थी। इसमें सैन्य अभियान, गोला-बारूद, रसद, सैनिकों का वेतन और अन्य संबंधित खर्च शामिल थे। भारतीय वायुसेना के हवाई हमलों का अनुमानित खर्च लगभग 2,000 करोड़ रुपये था। सेना के दैनिक ऑपरेशंस का खर्च लगभग 10-15 करोड़ रुपये था।
अब अगर भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापक युद्ध होता है तो इसकी लागत कारगिल युद्ध की तुलना में बहुत ज्यादा होगी। इसके पीछे कई कारण हैं। पहला, दोनों देशों की सेनाएं 1999 की तुलना में काफी बड़ी और अधिक उन्नत हो चुकी हैं। आधुनिक हथियार प्रणालियां और प्रौद्योगिकी बहुत महंगी हैं। दूसरा, कारगिल एक सीमित क्षेत्र में लड़ा गया था। एक व्यापक युद्ध में पूरे सीमा क्षेत्र, हवाई क्षेत्र और समुद्री क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। इससे लागत कई गुना बढ़ जाएगी। तीसरा, कारगिल युद्ध लगभग ढाई महीने चला था। एक व्यापक युद्ध इससे लंबा चल सकता है। इससे दैनिक और समग्र खर्च में भारी बढ़ोतरी होगी।
अर्थव्यवस्था पर होगा गंभीर असर
युद्ध का अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ेगा। इसमें उत्पादन में कमी, व्यापार में व्यवधान, महंगाई का बढ़ना और निवेशकों का विश्वास कम होना शामिल है। अप्रत्यक्ष आर्थिक लागत प्रत्यक्ष सैन्य लागत से कहीं अधिक हो सकती है। इसके अलावा सैनिकों और नागरिकों की जान-माल की हानि और घायलों की देखभाल की लागत भी बहुत अधिक होगी। इसका आकलन करना मुश्किल है।
इन अनुमानों से मिलते हैं लागत के संकेत
एक हालिया विश्लेषण (अप्रैल 2025) के अनुसार, अगर भारत और पाकिस्तान के बीच चार सप्ताह का पारंपरिक युद्ध होता है तो भारत को 750 अरब डॉलर (लगभग 62 लाख करोड़ रुपये) तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। यह आंकड़ा युद्ध के कारण होने वाली व्यापक आर्थिक क्षति को ध्यान में रखता है, न कि केवल सैन्य खर्च को। एक अन्य अनुमान के अनुसार, एक सीमित 42-दिवसीय युद्ध की भारत को लागत लगभग 49,000 करोड़ रुपये आ सकती है।




