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अब की बार…..सियासी धारावाहिक समाप्ति की ओर ?

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शशिकांत गुप्ते

महाभारत में धृतराष्ट्र के मंत्री के संजय के पास दिव्य दृष्टि थी।यह दिव्यदृष्टि संजय को महर्षि वेदव्यास ने दी थी।
संजय के पास दिव्य दृष्टि होने के कारण संजय ने स्वयं युद्ध का live telecast अर्थात सीधा प्रसारण देख कर,धृतराष्ट्र को Commentary सुनाई थी, मतलब आँखों देखा हाल सुनाया था।
कलयुग में टी वी का अविष्कार हुआ है।वर्तमान में सूचना एवं प्राद्योगिकी क्षेत्र में बेतहाशा प्रगति होने के कारण हरएक छोटी बड़ी खबर कुछ ही पलों में विश्वभर में फैल जाती है।
टीवी पर समाचारो के अलावा लोगों के मनोरंजन के धारावाहिको का प्रसारण भी किया जाता है।
इनदिनों टीवी पर प्रसारित धारावाहिको में
अब की बार नामक सियासी महाभारत पार्ट 2 धारावाहिक प्रसारित हो रहा है।
इस महाभारत में जो लोग कौरवों का अभिनय कर रहें हैं,वे सभी धृतराष्ट्र का किरदार निभा रहें हैं।यह कलाकार सिर्फ दृष्टिहीनों का अभिनय ही नहीं कर रहें हैं,बल्कि बधिर होने का रोल भी अदा कर रहें हैं।
अब की बार सियासी महाभारत पार्ट 1 में दिग्दर्शक ने धारावाहिक के अभी कलाकरों से सिर्फ प्रलोभनयुक्त संवाद बुलवाए थे। अब की बार सियासी महाभारत पार्ट 1 के प्रसारित होने के पूर्व,धारावाहिक का विज्ञापन धुंआधार किया गया था।
जैसे ही पार्ट 1 का प्रसारण शुरू हुआ विज्ञापन में बोले गए सभी प्रलोभनयुक्त संवादों को जुमलों में परिवर्तित कर दिया गया।
अब की बार
पार्ट1 और पार्ट2 में कौरव दृष्टिहीन और बधिर होने का अभिनय जरूर कर रहें हैं,लेकिन इनमें कोई भी मूक नहीं है, सभी वाचाल हैं।
दिग्दर्शक ने जनता से भीष्मपितामह अभिनय करवाया है।धारावाहिक के प्रारम्भ होते ही जनता की काया को रणभूमि पर शब्दिक बाण रूपी शूलों पर सुला कर छलनी किया जा रहा है?
सियासी महाभारत में द्रौपदियों का सिर्फ चीर हरण ही नहीं हो रहा है बल्कि उनकी आबरू भी तारतार की जा रही है?
दिग्दर्शक ने धारावाहिक में पांडवों का अभिनय करने वाले विपक्षियों का कहानी के आधार पर मानो मजबूरी में सिर्फ औपचारिकता का निर्वाह करने के लिए चयन किया है।
पांडवों की भी अपनी मजबूरी है।पांडव बिखरे हुएं हैं।सम्भवतः उक्त धारावाहिक के समाप्त होने तक सभी एकजुट हो जाएंगे।
अब की बार सियासी पार्ट1 पार्ट 2 महाभारत धारावाहिक में विपक्ष के पास संजय तो हैं लेकिन विपक्षी संजयों को किसी भी तरह का आँखों देखा हाल सुनाने दिखाने पर बेहाल किया जाता है।
सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं इस सूक्ति को चरितार्थ करने वाले संजय जरूर कम है, लेकिन इनमें बहुत दम है।इनकी Quantity कम जरूर है लेकिन Quality उम्दा है।
अब की बार धारावाहिक की पटकथा लिखने वाला लेखक की स्मृति मलिन है।इसे कहानी लिखते हुए यह भान नहीं रहा है, कि,धारावाहिक में कौरवों का अभिनय करने वालें पढतें तो राम भगवान की कथा और करतें हैं, कलयुगी महाभारत।
इसलिए यह लोग कौरवों का अभिनय करने में निपुण हैं?त्रेता हो या,द्वापर युग हो हर युग में अंत दानवी प्रवृत्ति का ही होता है।
यह उक्ति सियासी धारावाहिक के लेखक, निर्माता और दिग्दर्शकों ने आत्मसात कर लेनी चाहिए।
राष्ट्रीय आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते का स्मरण करतें हैं।
सत्य की सदा जीत होती है।उक्त धारावाहिक में अब सिर्फ उबाऊ एपिसोड बचें हैं।यह धारावाहिक जल्दी ही समाप्त होगा।2024 तक मजबूरन देखना पड़ सकता है।
देर है अंधेर नहीं है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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