इंदौर
शहर में 15 साल में तीन मेयर और आईडीए के छह चेयरमैन बदल गए, लेकिन टूरिज्म से जुड़े छह प्रोजेक्ट पर अभी भी कोई काम नहीं हो सका। कुछ प्रोजेक्ट में काम भी हुआ तो 100 प्रतिशत नहीं, ताकि शहर को उसका फायदा मिल सके। नेहरू पार्क में कांक्रीट का जंगल बढ़ता जा रहा है। सात साल में यहां बच्चों की ट्रेन शुरू नहीं हो पाई। रीजनल पार्क को अब निजी हाथों में देने की तैयारी है। आईडीए की जमीन पर मंगल मैरीलैंड था, जो बंद हो गया, वहां एम्यूजमेंट पार्क की योजना थी, जो आज तक साकार नहीं हाे पाई।
एक-एक कर सभी प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे : सांसद
एक-एक कर सभी प्रोजेक्ट की समीक्षा करेंगे। एम्यूजमेंट पार्क के लिए आईडीए अफसरों से बैठक कर चर्चा करेंगे। सिटी फॉरेस्ट, यशवंत सागर के मसले पर निगमायुक्त से बात करेंगे।
– शंकर लालवानी, सांसद
1. सिटी फॉरेस्ट : यहां सिर्फ पौधे ही लगा पाए
साल 2010 में नगर निगम के तत्कालीन महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने बिचौली हप्सी में सिटी फॉरेस्ट बनाने की घोषणा की थी। नजूल से जमीन लेकर यहां काम भी शुरू हुआ। पहले फेज में तीन करोड़ रुपए लगाए गए। हालांकि बाद में इस पर निगम ने भी ध्यान नहीं दिया।
2. हेरिटेज ट्रेन : 3 साल में भी पारदर्शी कोच नहीं
आईआरसीटीसी द्वारा 25 दिसंबर 2018 को शुरू की गई पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन को लेकर दावा था कि इसमें पारदर्शी कोच लगाए जाएंगे, ताकि लोग प्राकृतिक नजारे देख सकें, लेकिन तीन साल में भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका।
3. यशवंत सागर : फाउंटेन नहीं लगे
पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे के समय यशवंत सागर बांध के नीचे पिकनिक स्पॉट डेवलप करना था। फाउंटेन लगाने थे। ड्राइंग-डिजाइन भी तैयार थी, लेकिन काम आगे ही नहीं बढ़ सका।
4. रोप-वे से नहीं जुड़े रालामंडल-देवगुराड़िया
2013 में रालामंडल से देवगुराड़िया तक 2400 मीटर रोप-वे का प्रस्ताव तैयार हुआ था। वन विभाग और ईको टूरिज्म को इसे तैयार करना था। लैंड कन्वर्जन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी, लेकिन काम नहीं हुआ।
5. गुलावट : सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं
गुलावट में कमल देखने लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं। बावजूद यहां सुविधा के नाम पर कुछ नहीं हुआ। सांसद रहते सुमित्रा महाजन ने भी पहल की, लेकिन अभी भी यहां ट्रैफिक जाम आम है।
6. एम्यूजमेंट पार्क : प्लान ही बनते रहे
मेघदूत गार्डन और बंद हो चुके मंगल मैरीलैंड की जमीन पर 2010 में एम्यूजमेंट पार्क और वाटर स्पोर्ट्स की योजना थी। आईडीए और निगम इसे बनाने वाले थे। लेकिन यह प्रोजेक्ट भी प्लान तक ही सीमित रह गया।





