मुनीन्द्र पुरानियामडावरा (ललितपुर)— आर्य समाज एवं कुशवाहा समाज की संयुक्त पहल पर ग्राम पठा जिला ललितपुर निवासी दुर्जू कुशवाहा की धर्मपत्नी सुखरानी कुशवाहा के निधन पर मृत्युभोज के स्थान पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।आर्य समाज के प्रधान मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ(पण्डित पुरुषोत्तम नारायण दुबे) ने कहा कि वैदिक धर्मानुसार अंत्येष्टि ही अंतिम संस्कार होता है।उसके बाद के सभी कृत्य जैसे गंगादि नदियों में अस्थि विसर्जन,गया में पिण्डदान, मृतक श्राद्ध आदि सभी अवैदिक है ।आत्मा की शांति के नाम पर तेरह दिनों तक मनमानी क्रियाएं अवैदिक हैं।आर्य समाज महरौनी के मंत्री आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य ने कहा कि मृत्युभोज के स्थान पर श्रद्धांजलि सभा पुण्यकार्य है। उन्होंने कहा कि जीवित माता पिता की सेवा करना ही सच्चा श्राद्ध है।कुशवाहा समाज के जिलाध्यक्ष रतिराम कुशवाहा ने कहा कि नशा मानव समाज के लिए अभिशाप है जिसमे युवा पीढ़ी काल के गाल में समा रही है हम सभी को संकल्प लेना होगा कि शराब,जुआ, गुटका,बीड़ी-तम्बाकू को हम अपने घर मे प्रवेश नही होने देंगे।
इस अवसर पर सरमन लाल कुशवाहा,किशोरी कुशवाहा,पुन्नी कुशवाहा,सरू कुशवाहा,गुलझारी कुशवाहा,बन्दू कुशवाहा,रामलाल कुशवाहा सहित सैकड़ों समाजसेवी महिलाएं उपस्थित रही।संचालन आर्य रत्न शिक्षक लखन लाल आर्य व आभार सोनू कुशवाहा पठा ने जताया।
मृत्युभोज के स्थान पर श्रद्धांजलि सभा पुण्य कार्य– लखन लाल आर्य





