इंदौर
प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग ने पिछले दिनों एक तुगलकी फरमान निकाल दिया है। इसमें कहा गया है कि सभी 378 नगरीय निकाय सात दिन में अपने-अपने क्षेत्रों के अस्पतालों का फायर एंड लिफ्ट सेफ्टी ऑडिट करवा कर प्रतिवेदन विभाग को भेजें।
इसके लिए 17 फायर कंसल्टेंट की सूची भी जारी कर दी है, लेकिन सवाल यह उठता है कि प्रदेश में 1500 से ज्यादा अस्पताल का ऐसा ऑडिट सिर्फ 17 कंसल्टेंट 7 दिन में कैसे करेंगे? क्योंकि एक्सपर्ट के मुताबिक एक अस्पताल में अच्छे से जांच करने में कम से कम एक दिन लगता है। इंदौर में 249 अस्पताल हैं। यहां 5 कंसल्टेंट तय किए हैं।
इस लिहाज से एक के खाते में 50 अस्पताल आएंगे। यदि वे सरकार के आदेशानुसार जांच करते भी हैैं तो अंदाजा लगा सकते हैं कि वह जांच कैसी होगी और आग से मरीजों की कैसे सुरक्षा होगी? हालांकि इस आदेश के 7 दिन सोमवार को पूरे भी हो गए। इंदौर में एक भी अस्पताल में जांच शुरू भी नहीं हो पाई है।
कोविड में फायर सेफ्टी जरूरी है
9 मई को निकाले इस आदेश में कहा कि कोविड के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। बिजली का लोड भी बढ़ा है। ऐसे में फायर व लिफ्ट सेफ्टी ऑडिट जरूरी है। इसके लिए निकाय रजिस्टर्ड फायर व लिफ्ट इंजीनियर से ऑडिट करवाएं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और संबंधित क्षेत्र बिल्डिंग इंस्पेक्टर का दल गठित करें।
इंदौर ने 5 कंसल्टेंट में बांटे 249 अस्पताल, लेकिन एक में जांच शुरू नहीं हो पाई है
निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने इंदौर के 249 अस्पतालों के लिए टीमें बनाई। 17 में से 5 फायर कंसल्टेंट मनीष दुबे को 42 अस्पताल, शुभाशीष चौधरी को 57 अस्पताल, अंकित निगम को 49, सागर चौकसे को 54 व अश्विन शर्मा को 47 अस्पताल बांट दिए, लेकिन जांच किसी में शुरू नहीं हुई।
17 फायर कंसल्टेंट, जिसे इंदौर ने लिया, उसका अन्य शहरों में भी नाम
जिन कंसल्टेंट का नाम इंदौर ने तय किया उन्हीं को अन्य निगम ने भी ले रखा है। जैसे देवास निगम ने मनीष, शुभाशीष, अंकित के नाम के आदेश जारी करते हुए अस्पतालों को नोटिस जारी कर दिए, जबकि इनके नाम इंदौर में हैं। वहीं रतलाम व उज्जैन निगम ने तो अस्पताल प्रबंधन को ही फायर कंसल्टेंट से संपर्क कर ऑडिट कराने का जिम्मा सौंप दिया।
सीधी बात…
कोविड अस्पतालों की प्राथमिकता रखें, हमने तो पहले से आदेश दे रखे
- 1500 अस्पतालों का फायर-लिफ्ट सेफ्टी ऑडिट 17 कंसल्टेंट 7 दिन में कैसे करेंगे?
– निकाय चाहें तो खुद के कंसल्टेंट भी रख सकते हैं, प्राथमिकता कोविड अस्पतालों को दी जाना है।
- कंसल्टेंट अपने जूनियरों से ऑडिट करवा रहे हैं, इससे गुणवत्ता कहां से मिलेगी?
– यह तो निकायों को पहले से करना था, गड़बड़ी हेने पर जवाबदारी कंसल्टेंट की होगी।
कोविड आईसीयू में एयरफ्लो मेंटेन नहीं होने से रहता है आग का खतरा
हमने सभी अस्पतालों के फायर और लिफ्ट सेफ्टी ऑडिट के लिए इसलिए निर्देश जारी किए हैं, क्योंकि कोविड आईसीयू में एयरफ्लो मेंटेन नहीं होने से आगजनी हो रही है। जहां विंडो एसी है व कमरा बंद है वहां ऑक्सीजन का लेवल बढ़ने और सैनिटाइजर के इस्तेमाल से ज्यादा खतरा रहता है। नियमानुसार सेफ्टी ऑडिट में एक बड़े अस्पताल में एक दिन कम पड़ता है।
- आईसीयू में एयरफ्लो हो रहा है या नहीं जिससे हवा एक्सचेंज होती रहे।
- आगजनी की स्थिति में मरीजों को निकालने की व्यवस्था है या नहीं।
- फायर हाईड्रेंट के साथ ही अस्पताल में फायर ऑफिसर है या नहीं।
- लिफ्ट का मेंटेनेंस कब हुआ? आपात स्थिति के लिए क्या व्यवस्था है।





