नई दिल्ली. केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरणकी तैयारी कर रही है. निजीकरण से पहले ये बैंक अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना ) ला सकते हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2022 पेश करते समय दो सरकारी बैंकों और एक साधारण बीमा कंपनी के निजीकरण का प्रस्ताव किया था. सूत्रों का कहना है कि आकर्षक वीआरएस योजना से निजी क्षेत्र की ओर से इन बैंकों का अधिग्रहण काफी आसान हो जाएगा.
सूत्रों का कहना है कि वीआरएस के जरिये कर्मचारियों को जबरन बाहर करने का कोई इरादा नहीं है. इस योजना के जरिये पहले ही सेवानिवृत्ति लेने के इच्छुक कर्मचारियों को फायदा होगा. योजना के तहत उन्हें आकर्षक वित्तीय पैकेज मिल सकेगा. नीति आयोग को निजीकरण के लिए बैंकों की पहचान की जिम्मदारी सौंपी गई थी. आयोग ने कैबिनेट सचिव राजीव गाबा की अगुवाई वाली उच्चस्तरीय समिति को निजीकरण के लिए उपयुक्त बैंकों के नाम सौंप दिए हैं.
अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट को सौंपे जाएंगे बैंकों के नाम
विनिवेश पर गठित सचिवों का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और बैंक ऑफ इंडिया के निजीकरण पर विचार कर सकता है. इस उच्चस्तरीय समिति के अन्य सदस्यों में आर्थिक मामलों के सचिव, राजस्व सचिव, व्यय सचिव, कॉरपोरेट मामलों के सचिव, विधि मामलों के सचिव, लोक उपक्रम विभाग के सचिव, निवेश व लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग के सचिव और प्रशासनिक विभाग के सचिव शामिल हैं. कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली सचिवों की कोर समिति से मंजूरी मिलने के बाद ये नाम मंजूरी के लिए पहले वैकल्पिक तंत्र (AM) के पास और अंतिम मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ) की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल के समक्ष रखे जाएंगे.
सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का रखा है लक्ष्य
कैबिनेट की मंजूरी के बाद निजीकरण की प्रक्रिया में मदद करने के लिए नियामकीय पक्ष में बदलाव शुरू किया जाएगा. सरकार ने बजट में दो सरकारी बैंकों और एक इंश्योरेंस कंपनी सहित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों एवं वित्तीय संस्थानों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 1.75 लाख करोड़ रुपये की राशि जुटाने का लक्ष्य रखा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में कहा था, ”जिन बैंकों का निजीकरण किया जाएगा उनके कर्मचारियों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की जाएगी. उनके वेतन की बात हो या पेंशन सभी का ध्यान रखा जाएगा.”





