
चंद्रशेखर शर्मा
लोग कह रहे हैं कि पिछले आठ वर्षों में देश में जो साम्प्रदायिक जहर बोया गया है, उदयपुर के कन्हैयालाल का गला रेतने की घटना उसी का परिणाम है ! कुछ कह रहे हैं पिछले कुछ वर्षों में देश में नफरत का जो माहौल तैयार किया गया है, यह उसका नतीजा है। मैंने इस बर्बर हत्या पर मैगसायसाय पुरस्कार प्राप्त पत्रकार का प्राइम टाइम (यदि हुआ हो तो) नहीं देखा। अलबत्ता उसी न्यूज़ चैनल पर कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का कहना था कि इस घटना के लिए न्यूज़ चैनलों पर होने वाली डिबेट्स भी जिम्मेदार हैं।
हो सकता है आपने भी न्यूज़ चैनलों या सोशल मीडिया आदि पर इस तरह की प्रतिक्रियाएं देखी हों। मेरा निवेदन है आप इस तरह की धूर्त अथवा नासमझी की प्रतिक्रियाओं को बिलकुल भी खातिर में न लाएं। जी हां। मामल यह है कि नुपूर शर्मा ने पैगम्बर साहब को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसी सिलसिले में उदयपुर के कन्हैयालाल ने नुपूर के समर्थन में कोई पोस्ट की। जवाब में दो लोगों ने गुस्ताख़-ए-रसूल की सजा (?) बतौर उसका गला रेत दिया !
अब कृपा कर कोई मुझे यह समझाए कि इसमें, ऊपर जिस साम्प्रदायिक जहर, नफरत या न्यूज़ चैनलों की डिबेट्स का जिक्र है, उनका क्या और कैसे रोल है ? यह तो साफ-साफ आस्था और मान्यता का केस है, जिसके मुताबिक गुस्ताख़-ए-रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा सर तन से जुदा ! इसमें साम्प्रदायिक जहर, नफरत या टीवी डिबेट्स का क्या काम ? कुछ समय पहले फ्रांस में भी सर तन से जुदा करने का ऐसा ही मामला हुआ था। वो कौनसे साम्प्रदायिक जहर, नफरत या टीवी डिबेट्स की वजह से हुआ था ? सो यह सीधा सा संदेश है कि तुम हमारे आराध्य की शान में गुस्ताखी करोगे तो हम तुम्हारा सर तन से जुदा करेंगे ! बताते हैं कई देशों में तो यह कानूनन किया जाता है। जाहिर है इसमें नफरत वगैरा का कोई काम नहीं है। हां, वैसी ही घटना हमारे उदयपुर में हुई और लोग उसके साथ साम्प्रदायिक जहर, नफरत तथा टीवी डिबेट्स को नत्थी कर रहे हैं तो यह कोई रॉकेट साइंस की बात नहीं है कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं। पत्रकार और प्रवक्ता आदि का चोला ओढ़े ऐसे लोगों की इस धूर्तता को आपको ठीक से समझने की जरूरत है।
उदयपुर में हुआ यह कि कुछ दिन पहले कन्हैयालाल ने कथित रूप से सोशल मीडिया पर नुपूर शर्मा का सपोर्ट किया था। उसे धमकियां मिलीं। इस पर उसने पुलिस में रिपोर्ट की और डर के मारे कई दिन अपनी दुकान नहीं खोली। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस प्रवक्ता श्रीनेत का सरकार तथा पुलिस के पक्ष में कहना है कि पुलिस प्रायः ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश देती है और दोनों से मामले के खत्म होने का आश्वासन लेकर व आईन्दा शांति से रहने की हिदायत देकर उसका निराकरण करती है। उदयपुर में भी पुलिस ने यही किया। इसी के चलते कन्हैयालाल ने कई दिनों बाद कल अपनी दुकान खोली थी। तभी दोपहर में दो लोग कपड़े का नाप देने उसकी दुकान पर पहुंचे और इसी बहाने मौका मिलते ही उसका गला रेतकर उसे जिबह कर दिया। खास बात यह कि उन्होंने इस पाशविक हत्या का वीडियो भी बनाया और कुछ और वीडियो भी। एक वीडियो में वो ऐलान कर रहे हैं कि उन्होंने ही इस हत्या को अंजाम दिया है और यह भी कि क्यों अंजाम दिया ! कारण वही गुस्ताख़-ए-रसूल और सजा वही सर तन से जुदा।
यहां यह कहना भी ठीक नहीं कि यह सरफिरे या मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों का कृत्य है, क्योंकि यह किसी तात्कालिक सनक या किसी और तात्कालिक भावनात्मक आवेग से नहीं किया गया है। उलटे बहुत सोच-विचारकर और सुनियोजित ढंग से इसकी योजना अथवा साजिश रची गयी थी, उसके वीडियो बनाये गए थे और उस योजना को बहुत ठंडे दिमाग से (इंतजार और नाप देने के बहाने) अंजाम दिया गया और फिर देश को ‘संदेश’ देने के मकसद से उसके वीडियो जारी किए गए। गौरतलब यह है कि गुस्ताख़-ए-रसूल की एक ही सजा, सर तन से जुदा का यह देश में पहला मामला है, लेकिन इसका संदेश बिलकुल साफ है। यह आप पर है कि आप उसे किस तरह लेते हैं।
नोट-हैरान करने वाली बात यह है कि देश में आम होने वाली घटना-दुर्घटनाओं को लेकर अखबारों के प्रथम पेज पर त्वरित टिप्पणी करने वाले सारे महामना आज पता नहीं कहां लापता हैं ! मुमकिन है देश में इसे ‘तालिबानी कल्चर’ की पहली घटना मानकर और यह मानकर कि बीमारी तो अभी बस शुरू हुई है, उनके विवेक (!) ने इसे त्वरित टिप्पणी के लायक न माना हो। आप जरा ऐसी और घटनाओं का थोड़ा इंतजार कीजिये। मुझे यकीन है तब वो अपनी त्वरित टिप्पणी करेंगे, जरूर करेंगे।
■ चंद्रशेखर शर्मा





