अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग को दिए तीन नाम और तीन निशान,’शिवसेना बालासाहेब ठाकरे’ नाम , निशान त्रिशूल और उगता सूरज

Share

उद्धव ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर कहा- 40 सिर वाला रावण हमसे तीर-कमान निशान छीनने की कोशिश कर रहा है। जिस शिवसेना ने आपको नाम दिया, जो आपकी मां है, आपने उसी की पीठ पर छुरा घोंपा है। इनके पीछे एक महाशक्ति है, उसे सबसे ज्यादा खुशी हो रही है।

उद्धव ने पार्टी के कई नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि इन सभी कार्यकर्ताओं की मेहनत से ही सरकार चुनकर आई है। मैं टूट जाऊंगा पर झुकूंगा नहीं। पार्टी में अपना हिस्सा किसी को नहीं दूंगा। शिवसेना की वजह से ही लोगों में “मैं हिंदू हूं” की भावना आई थी, लेकिन इनकी वजह से पार्टी ने उस चीज को भी खो दिया।

जब मैं 6 साल का था तो पार्टी का उद्घाटन हुआ था। उस दौरान जो नारियल फूटा था, उसके पानी के छींटे मेरे ऊपर पड़े थे, उसी के आशीर्वाद से मैं पार्टी प्रमुख बना, लेकिन 40 सिर वाला खोकासुर विश्वासघात कर गया।

चुनाव आयोग को दिए तीन नाम और तीन निशान
ठाकरे ने बताया कि उप चुनाव के लिए उन्होंने चुनाव आयोग को तीन नाम और तीन निशान के विकल्प दिए हैं। निशान में त्रिशूल, उगता हुआ सूरज और मशाल हैं। नाम शिवसेना बाला साहेब ठाकरे, शिवसेना बालासाहेब प्रबोधनकर ठाकरे, शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे दिए हैं। उन्होंने कहा- चुनाव आयोग से मेरा निवेदन है कि आप हमें इन तीन में से एक नाम और लोगो फाइनल करके दें, ताकि हम जनता के दरबार में आ सकें।

तुम्हारा मकसद शिवसेना को खत्म करने का है
उद्धव ठाकरे बोले- मैं कभी डगमगाया नहीं, क्योंकि मेरे पिता और दादा ने मुझे आत्मविश्वास सिखाया है। इसी वजह से शिवसैनिक प्रेमी मेरे साथ हैं। तुम्हें भाजपा और शिवसेना दोनों चाहिए। बालासाहेब ठाकरे चाहिए, लेकिन उनका बच्चा क्यों नहीं? तुम्हारा मकसद शिवसेना को खत्म करना है।

शिंदे के मंत्री बोले- उद्धव का हलफनामा झूठा
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री उदय सावंत ने कहा है कि उद्धव गुट ने झूठा हलफनामा दिया है। उसकी शिकायत हम चुनाव आयोग से करेंगे। असल में हमारे साथ ही अन्याय हुआ है, क्योंकि 4 बार उन लोगों ने दस्तावेज जमा करने के लिए वक्त मांगा और जमा नहीं किया। शिवसेना का चुनाव चिन्ह तीर कमान सीज होने का हमें दुख है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस संबंध में निर्णय लेने को कहा था और अब चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार निर्णय लिया है।

उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री कार्यकाल में ढाई साल हम लोग जिस परिस्थिति से गुजरे इसकी उन्हें पूरी जानकारी है। शिंदे ने पद की लालच में बगावत नहीं की। कांग्रेस और NCP के साथ महा विकास अघाड़ी में रहना हमारे सिद्धांतों के खिलाफ था। शिवसेना और भाजपा का गठबंधन नैसर्गिक है और हमें उस नैसर्गिक गठबंधन के साथ रहना चाहिए। हमने कभी यह नहीं कहा कि हम शिवसेना से अलग हुए हैं। हम आज भी शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे का आदर और सम्मान करते हैं।

पवार बोले- शिवसेना खत्म नहीं होगी, सिंबल से फर्क नहीं पड़ेगा
इधर, औरंगाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए शरद पवार ने कहा- चुनाव आयोग का फैसला चौंकाने वाला नहीं है। मुझे इसकी आशंका थी। आयोग के फैसले से शिवसेना खत्म नहीं होगी बल्कि शिवसेना के कार्यकर्ताओं में नया जोश आएगा। उन्होंने कहा- पांच बार मेरी पार्टी का भी सिंबल बदला गया, लेकिन असर नहीं हुआ।

ठाकरे परिवार के लिए लकी रहा है तीर-कमान का चिन्ह

महाराष्ट्र की सत्ता में 1995 में पहली बार शिवसेना सरकार में आई। उस वक्त मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बनाए गए थे।

महाराष्ट्र की सत्ता में 1995 में पहली बार शिवसेना सरकार में आई। उस वक्त मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बनाए गए थे।

19 जून 1966 को बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की थी, लेकिन शुरुआत में ये सिर्फ एक सोशल ऑर्गेनाइजेशन के रूप में काम कर रही थी। 1968 में पहली बार पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन के रूप में शिवसेना का रजिस्ट्रेशन कराया गया। पहला चुनाव पार्टी ने 1971 में लड़ा, उस वक्त सिंबल था- खजूर का पेड़।

शिवसेना ने इसके बाद रेलवे इंजन और ढाल-तलवार भी पार्टी का सिंबल रहा, मगर सफलता नहीं मिली। 1985 में सीनियर ठाकरे ने तीर-कमान का सिंबल लिया और मुंबई नगरपालिका का चुनाव लड़ा। पार्टी को इसमें भारी मार्जिन से जीत मिली और कांग्रेस के सहयोग से सरकार बना ली।

शिवसेना विवाद में पिछले 2 दिन का घटनाक्रम जानिए…

1. उद्धव गुट के नेताओं के पास से फर्जी एफिडेविट मिला, FIR दर्ज- शिवसेना के सिंबल फ्रीज होने के बाद रविवार को शिंदे गुट ने उद्धव ठाकरे खेमे के खिलाफ फर्जी तरीके से एफिडेविट बनाने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई पुलिस के निर्मलनगर थाने में इसकी FIR भी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने जांच में अब तक 4682 झूठे एफिडेविट जब्त किए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ये सभी एफिडेविट चुनाव आयोग में जमा कराने की तैयारी थी।

2. शिवसेना का सिंबल फ्रीज, 4 घंटे की मीटिंग के बाद EC का फैसला- उद्धव-शिंदे गुट के बीच लड़ाई में शनिवार को चुनाव आयोग ने शिवसेना के सिंबल तीर-धनुष को फ्रीज कर दिया। 13 पन्नों के जारी आदेश में आयोग ने कहा कि दोनों गुटों में से कोई भी उपचुनाव में चुनाव चिन्ह तीर-धनुष का उपयोग नहीं कर सकेगा। यह आदेश मुंबई की अंधेरी ईस्ट विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के लिए है।

चुनाव आयोग ने शिवसेना विवाद में 13 पन्नों का एक आदेश 9 अक्टूबर को जारी किया था। सबसे अंतिम पेज पर शिवसेना के सिंबल फ्रीज करने की बात कही गई थी।

चुनाव आयोग ने शिवसेना विवाद में 13 पन्नों का एक आदेश 9 अक्टूबर को जारी किया था। सबसे अंतिम पेज पर शिवसेना के सिंबल फ्रीज करने की बात कही गई थी।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि दोनों गुट अपने लिए नए नाम का चुनाव कर सकते हैं और ये नाम शिवसेना से मिलता-जुलता हो सकता है। उपचुनावों में दोनों गुट अपने लिए चुनाव आयोग की दी गई लिस्ट में से कोई चिन्ह चुन सकते हैं। उन्हें 10 अक्टूबर तक उनमें से एक चिन्ह चुनकर आयोग को बताना होगा।

शिंदे गुट ने किया है पार्टी पर दावा
ठाकरे से बगावत कर भाजपा के सहयोग से सरकार बनाने वाले एकनाथ शिंदे गुट ने चुनाव आयोग के सामने धनुष-बाण पर दावा किया था। वहीं, ठाकरे की ओर से कहा गया था कि शिंदे पार्टी छोड़ चुके हैं, इसिलए उनका पार्टी या उसके चुनाव चिन्ह पर कोई दावा नहीं बनता। हाल ही में आयोग ने ठाकरे और शिंदे से शिवसेना के चुनाव चिन्ह पर अधिकार के दावे को लेकर जवाब दाखिल करने को कहा था। ठाकरे ने शुक्रवार को चुनाव आयोग में अपना जवाब दाखिल किया। उद्धव गुट ने 5 लाख से ज्यादा पार्टी पदाधिकारियों और सदस्यों के समर्थन वाला हलफनामा भी दाखिल किया है।

20 जून से शुरू हुआ था शिवसेना का विवाद
शिवसेना का विवाद 20 जून से शुरू हुआ था, जब शिंदे के नेतृत्व में 20 विधायक सूरत होते हुए गुवाहाटी चले गए थे। इसके बाद शिंदे गुट ने शिवसेना के 55 में से 39 विधायक के साथ होने का दावा किया, जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा दे दिया था।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें