इंदौर
भूमाफिया के खिलाफ प्रशासन का अभियान छह एफआईआर से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। 18 में से सिर्फ दो आरोपी गिरफ्त में हैं, एक की मौत हो चुकी है। शेष 15 आरोपियों के बारे में कोई सुराग नहीं है। ऐसे में पूरा मामला गोल-गोल घूमकर वहीं आ गया है।
हद यह है कि सहकारिता के अफसर जांच में मदद करने तक को तैयार नहीं हैं। एमआईजी टीआई विनोद दीक्षित के अनुसार, 18, 19 और 20 फरवरी को सहकारिता अफसरों से मौखिक मदद मांगी, लेकिन उन्होंने निरीक्षक तक नहीं भेजा। एसडीएम से गुहार का भी नतीजा नहीं निकला। रिकॉर्ड पर लाने के लिए गुरुवार को चिट्ठी लिखी, उसका भी जवाब नहीं आया। एसपी पूर्व आशुतोष बागरी के अनुसार, पुलिस फरार भूमाफियाओं की लिस्टिंग कर रही है। उनकी फाइलें खुलवाएंगे। प्रॉपर्टी जब्त करेंगे। अवैध हुई तो नष्ट भी करेंगे।
नौकर-कर्मचारी के नाम हैं कागज
कई मामलों में भूमाफिया ने सौदे नौकर, कर्मचारियों के नाम कर रखे हैं। इनके खुलासे के लिए संस्थाओं की पूरी कुंडली चाहिए जो सहकारिता अफसरों के पास है।
आयकर व ईडी को शिकायत
फरार और पुराने भूमाफियाओं की शिकायत आयकर और ईडी विभाग को की है। प्रॉपर्टी खंगाल रहे हैं। जांच आगे बढ़ाने उनके सारे कनेक्शन चाहिए।
पर्ची व डायरियां भी खोलेंगी राज
भूमाफियाओं के घर से मिले कच्चे दस्तावेज, डायरियां और चिट्ठों की पड़ताल के लिए भी पुलिस को एक्सपर्ट की जरूरत है। ये अहम सबूत हो सकते हैं।
सबूत कम होने से ही बच जाते हैं
शातिर भूमाफिया हर बार कमजोर सबूतों की वजह से ही बच निकलते हैं। इसमें सहकारिता अफसरों की मदद चाहिए, ताकि वे पहले ही चेक कर सके।
पुलिस के पत्र की जानकारी नहीं
उपायुक्त एमएल गजभिये का कहना है कि पुलिस की चिट्ठी की जानकारी नहीं। अभी भोपाल में हूं, लेकिन पुलिस को पूरा सहयोग करेंगे।





