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4 जिलों की पुलिस का इस्तेमाल कर 1387दिन से चल रहे शान्तिपूर्ण आंदोलन को कुचलना अलोकतांत्रिक कदम

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20 श्रमिक और महिलाओं को आई गंभी चोटों ने पुलिस के अमानवीय चेहरे को उजागर किया

किसान सँघर्ष समिति के अध्यक्ष एवम पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने मेधा पाटकर और उनके साथ 700 सेंचुरी के श्रमिकों के साथ गिरफ़्तार किये जाने पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि 1387 दिनों से शान्तिपूर्ण तरीके से चल रहे सत्याग्रह को पुलिस बल लगाकर अभद्र तरीके से खत्म कराना अलोकतांत्रिक है।विशेष तौर पर तब जबकि मुद्दा उच्च न्यायालय में लंबित है।
उन्होंने बताया कि किसान सँघर्ष समिति एवम प्रदेश के जन संगठनों के द्वारा 30 जिलों में मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर श्रमिको के पक्ष में हस्तक्षेप करने की मांग की गई थी।लेकिन श्रमिको को न्याय देने की बजाए सरकार ने पुलिस दमन का रास्ता अपनाया।
डॉ सुनीलम ने बताया कि रोज की तरह सेंचुरी सत्याग्रह पंडाल में सेंचुरी के श्रमिक, महिलाएं और बच्चे पंडाल में बैठे हुए थे। अचानक अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार और सैकड़ों की संख्या में पुलिस और महिला पुलिस ने आंदोलनकारियों पर हमला बोल दिया। जबरजस्ती घसीटकर सबको गाड़ियों में ठूस दिया। सेंचुरी सत्याग्रह पंडाल से लगभग 700 से अधिक श्रमिकों और महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। जिसमें से 200 से अधिक को कसरावद फाटे के पास उतार दिया गया। कुछ को रास्ते में जबरजस्ती उतारा गया।
पुरुष पुलिसवालों ने महिलाओं को डंडों से मारा। सैकड़ों श्रमिकों के कपडे फाड़ दिए । महिला और पुरुषों को एक ही गाड़ी में जानवरों की तरह ठूंसा गया।
करीबन 350 से अधिक श्रमिको को आईटीआई स्कूल कसरावद में दिनभर भूखे रखा गया ।
100 से अधिक महिलाओं को शासकीय महाविद्यालय कसरावद ले जाया गया। कुछ महिलाओं के साथ मेधा पाटकर जी के साथ एनवीडीए रेस्ट हाउस में रखा गया।
शाम को 5:00 बजे भोजन के पैकेट लाये गए।श्रमिको ने गिरफ्तार महिलाओं और श्रमिक जनता संघ की अध्य्क्ष मेघा पाटकर को श्रमिकों के बीच पहले लाने की मांग की जिसे प्रशासन के द्वारा नहीं माने जाने पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया गया।
पुलिस द्वारा बल प्रयोग के कारण 20 से अधिक महिलाओं और पुरुषों को गंभीर चोट आई, जिसमें 5 महिलाओं को खरगोन अस्पताल रेफर किया गया। शेष का इलाज कसरावद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों द्वारा किया गया ।
गिरफ्तारी के बाद श्रमिकों के बच्चों के द्वारा मिल गेट के सामने धरना दिया गया।
डॉ सुनीलम ने कहा कि कुमार मंगलम ने 450 करोड़ रुपये का मुनाफा कोरोना काल में कमाया है। लेकिन पहले 426 करोड़ की मिल को ढाई करोड़ में बेचने का नाटक किया गया। रजिस्ट्री फर्जी साबित हुई। अब 62 करोड़ में मनजीत ग्लोबल को रजिस्ट्री का दावा किया जा रहा है।
डॉ सुनीलम ने कहा कि पहले धारा 144 की आड़ में श्रमिकों को हटाने का प्रयास किया गया।
फिर कहा गया कि श्रमिकों ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है ,इसलिए अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई है।
देर रात श्रमिकों पर 107 ,109,151 की धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए तथा 20 हज़ार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया गया।
किसान सँघर्ष समिति ,जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय ने
श्रमिको के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने ,फर्जी रजिस्ट्री को रद्द करने ,1000 श्रमिकों को रोजगार प्रदान करने की मांग की है ।

डॉ सुनीलम

Ramswaroop Mantri

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