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*पेरेंरिंग : समझें टीनेजर्स मन की उथल-पुथल* 

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       डॉ. नेहा 

इन दिनों 4 भागों वाली वेबसीरीज़ ‘एडोलेसंस’ काफी चर्चा में है जो स्कूल में पढ़नेवाले 13 साल के किशोर की कहानी है। बढ़ती उम्र में दिमाग और शरीर तेजी से विकसित हो रहे होते हैं। मन में विचारों की उथल-पुथल चलती रहती है। 

     दोस्ती, प्यार, ब्रेकअप और सेक्स जैसे तमाम मुद्दों पर उनके सवालों के सही जवाब देने जरूरी होते हैं। 

*रिश्ते और ब्रेकअप :*

    रिश्ते हमारे जीवन का आधार होते हैं। हर रिश्ता, चाहे वह परिवार, दोस्त, साथ में काम करने वाला या रोमांटिक पार्टनर हो, हमारे लिए अहम होता है। कई बार हम अपने रिश्तों को खो देते हैं। इसकी वजह उस करीबी की मौत हो सकती है, दोस्त से झगड़ा, लव रिलेशनशिप का ब्रेकअप भी हो सकता है।

     उस वक्त हम गहरे दुख की स्थिति में होते हैं। यह दुख सिर्फ इसलिए नहीं होता कि वह चला गया तो उसकी गैर-मौजूदगी रहेगी, बल्कि हमारी उन उम्मीदों और प्लानिंग को धक्का लगता है जो हमें अपने फ्यूचर के लिए बनाई थीं। 

    कुछ वक्त के लिए हम भारी दबाव महसूस कर सकते हैं। अगर उस वक्त सही तरीके से चीजों को संभाला नहीं गया तो लंबे वक्त के लिए डिप्रेशन हो सकता है। 

अवंतिका 11वीं क्लास (ह्यूमैनिटी सब्जेक्ट) की स्टूडेंट है। वह ड्रामा, डिबेट और डांस में सबसे आगे रहती है। स्कूल के कॉम्पिटिशन में वह अपनी टीम की जान होती है। आमतौर पर उसकी टीम ही जीतती है। सारे टीचर्स उसे पसंद करते हैं और ज्यादातर क्लासमेट भी उसकी तारीफ करते हैं। 

     इस वजह से उसके बहुत-से दोस्त हैं। कीर्ति भी 11 वीं में पढ़ती है और अवंतिका की सबसे करीबी दोस्त रही है। यह दोस्ती पिछले 4-5 साल से है। कीर्ति पढ़ाई में बहुत अच्छी है और उसने साइंस सब्जेक्ट चुने हैं। लेकिन अब कीर्ति का बहुत सारा वक्त उसकी पढ़ाई और कोचिंग में ही चला जाता है। वह अपने बैचमेट्स के साथ भी ज्यादा वक्त गुजारने लगी है। 

     इससे वह अवंतिका से दूर होने लगी जो कई साल से उससे इमोशनली जुड़ी रही है। लेकिन अवंतिका के लिए दोस्ती खोने के डर से अपनी भावनाओं को संभालना मुश्किल हो गया। न सिर्फ उसकी पढ़ाई पर असर पड़ा बल्कि उसने स्कूल के इवेंट्स से भी खुद को दूर करना शुरू कर दिया। 

   आखिरकार उसने इस बारे में साइकॉलजिस्ट से बात की। साइकॉलजिस्ट ने दोस्ती खोने के दुख से उबरने में उसकी मदद की। अवंतिका सारी गलती खुद पर डाल रही थी कि शायद वह इतनी अच्छी नहीं है और इस वजह से दोस्ती में यह बदलाव आया।

     साइकॉलजिस्ट ने उसे फिर से उसकी अहमियत बताई और लोगों पर भरोसा करने व उनकी तारीफ जीतने का जज्बा जगाया। इससे अवंतिका के मन में एक्सेप्टेंस यानी स्वीकृति का बोध हुआ और वह इस बदलाव को समझ सकी। रिश्ते ऐसे ही होते हैं। किसी रोलर कोस्टर की तरह, उतार-चढ़ाव वाले। 

    हमेशा सब कुछ ठीक चलता रहे, यह जरूरी नहीं है। कई बार ब्रेकअप गिल्ट, दुख और असुरक्षा की भावना पैदा कर देते हैं। उसमें कई स्टेज आती हैं। 

    लोग ब्रेकअप से उबरने में अपने हिसाब से वक्त लेते हैं और इन स्थितियों से गुज़रते हैं। सबका अपना तरीका होता है। यह वाकई मुश्किल दौर होता है लेकिन इसे संभाला जा सकता है। ब्रेकअप भले ही दर्दनाक होते हैं, लेकिन सही समझ और सपोर्ट से हम बिनी किसी बड़े नुकसान ही इससे बाहर आ सकते हैं। 

    शायद पहले से भी ज्यादा स्ट्रॉन्ग बन सकते हैं। कई बार टॉक्सिक रिलेशनशिप से बाहर आना मुश्किल लगता है। कुछ लोग स्टॉकहोम सिंड्रोम का शिकार हो जाते हैं और खुद से बुरा बर्ताव करने वाले साथी से ही प्यार करने लगते हैं। लेकिन जो लोग इससे बाहर निकल पाते हैं, वे खुद को फ्री महसूस करते हैं और कुछ वक्त के बाद उनका आत्मसम्मान और कॉन्फिडेंस लौट आता है।

*ब्रेकअप के बाद ऐसे संभलें :*

1. यह मान लें कि रिश्ता खत्म हो चुका है: 

बार-बार इसके बारे में सोचने से नतीजा नहीं बदल सकता। रिश्ता किसी न किसी वजह से खत्म हुआ है और इसे मान लेना ही बेहतर है।

2. वजह स्वीकार करें: 

अगर रिश्ता खत्म हुआ है तो यह किसी वजह से हुआ होगा। अगर एक-दूसरे के अनुकूल नहीं थे तो बेहतर है कि जल्दी अलग हो जाएं, जिससे बाद में दुख न पहुंचे। 

3. अपनी फीलिंग बताएं:

 अपनी भावनाओं को अंदर न दबाएं। इन्हें लिखकर या किसी भरोसेमंद शख्स से बात करके जता देना बेहतर है। जितना ज्यादा इन्हें मन में रखेंगे, उतना ही उबरना मुश्किल होगा।

4. अपना रुटीन बनाए रखें: 

अकेले बैठना और लोगों से दूरी बनाना हालात को मुश्किल बना सकता है। दोस्तों के साथ वक्त बिताएं और सोशल ऐक्टिविटी में खुद को बिजी रखें। 

5. खुद को प्रॉयोरिटी दें

अच्छा खाना खाएं, खूब नींद लें और कोई सार्थक ऐक्टिविटी करें। भूख और नींद की कमी चिड़चिड़ा बना सकती है।

6. अच्छे तरीके अपनाएं: 

मानसिक मजबूती बढ़ाने के लिए पॉजिटिव कामों में शामिल हों, जैसे कोई नया शौक अपनाने की कोशिश करें।

7. गलत आदतों से बचें:

 शराब, नशा या जरूरत से ज्यादा खाने जैसी आदतों से दूर रहें। ऐसी चीजें आपको ज्यादा दुखी कर सकती हैं।

8. एक्सरसाइज़ या खेल अपनाएं:

 जब हम एक्सरसाइज करते हैं या खेलते हैं तो शरीर में एंडोर्फिन नाम का हार्मोन निकलता है, जिससे हम पॉजिटिव और खुश महसूस करते हैं। लेकिन इसके लिए धीरे-धीरे शुरुआत करें, खुद को ज्यादा थकाएं नहीं।

9. पॉजिटिव चीजों को याद करें:

 अपने ज़िंदगी की उन सभी अच्छी बातों के बारे में सोचें जो आपके पास हैं। इनमें स्कूल की अचीवमेंट्स और आपको प्यार करने वाली फैमिली की बातें हो सकती हैं।

10. इस अनुभव से सीखें: 

आपने अपने रिश्ते में जो भी चैलेंज देखे हैं, उनसे सीखने की कोशिश करें। उन कमियों को पहचानें और खुद में सुधार करें। 

———–

*सेक्स, सेक्शुऐलिटी और सेक्शुअल ओरिएंटेशन :*

     जरा फ्लैशबैक में जाएं, जब 8वीं में बायोलॉजी की क्लास में रिप्रोडक्टिव हेल्थ के बारे में पढ़ाया जाता तो स्टूडेंट्स उत्साह और घबराहट से भरे होते थे, उन्हें पेट में गुदगुदी महसूस होती थी। 

   वे मुस्कुराने, हंसने या टीचर से नजरें मिलाने से बचने की कोशिश करते रहते थे। टीचर भी अलर्ट रहते थे कि इस दौरान कौन-सा स्टूडेंट फुसफुसा रहा है या हंसी-मजाक कर रहा है।

लेकिन क्या यह ऐसा ही होना चाहिए? 

     किसी समाज के तौर पर हमें इन मुद्दों पर ज्यादा खुले मन से और सहज ढंग से बात करनी चाहिए। जितना जल्दी हम इसकी शुरुआत करेंगे, उतना ही अच्छा होगा। पिछले कई दशकों में यह बदलाव आया है कि टीनएजर्स में फिजिकल और सेक्शुअल मैच्योरिटी जल्दी आ रही है। तकनीकी बदलावों ने टीनएजर्स के सेक्शुअल बिहेवियर में जो बदलाव किए हैं, उसके अपने खतरे भी हैं और कुछ फायदे भी। 

      आमतौर पर आज भी परिवारों और स्कूलों में सेक्स एजुकेशन जैसे मुद्दे पर बात करना असहज माना जाता है। लेकिन पैरंट्स को समझना होगा कि उनके बच्चे बड़े हो रहे हैं। यदि टीनएजर्स को इस सब्जेक्ट पर सही जानकारी मिलेगी तो वे खुद को सेफ रख सकेंगे। 

*पैरंट्स के लिए अहम सुझाव :*

1. बच्चों को एक्सेप्टेंस, सपोर्ट और गाइडेंस की जरूर होती है। उन्हें उनके शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में सहज महसूस कराएं। उनके सवालों का तसल्ली से जवाब दें। इन बदलावों से निपटने में उनकी मदद करें। उन्हें साफ-सफाई रखना और अपनी जरूरत का ध्यान रखना सिखाएं लेकिन बिना अपराधबोध या शर्म महसूस कराए। साथ ही उन्हें ज्यादा प्राइवेसी भी दें।

2. कम्युनिकेशन और भरोसा बनाएं। पैरंट्स और बच्चों के बीच खुलकर बातचीत होनी चाहिए। बच्चों की सोसाइटी और कल्चर के बारे में जानकारी लेते रहें। 

3. बच्चे पैरंट्स की सुनने और समझने की क्षमता पर भरोसा करते हैं। उन्हें स्वीकार करें और सपोर्ट दें, लेकिन अलर्ट भी रहें। यह दौर थोड़ा मुश्किल होता है। इस दौरान बच्चे को आपकी जरूरत होती है, भले ही वे इस बात को खुलकर न मानें।

4. यह जरूरी है कि पैरंट्स अपने बच्चों के साथ कम्युनिकेशन का ऐसा माहौल बनाएं कि वे सेफ सेक्शुअल प्रैक्टिस के बारे में जान सकें। वे बिना झिझक मदद मांग सकें। 

5. पैरंट्स कंप्यूटर और मोबाइल फोन के लिए इंटरनेट सेफ्टी प्लान भी तैयार करें ताकि छोटे बच्चे घर में पैरंट्स के मौजूद न होने पर सेक्शुअल मटिरियल तक न पहुंच सकें। छोटे बच्चों के लिए अकेले और बिना निगरानी वाले इंटरनेट इस्तेमाल की सीमा तय करें। इंटरनेट का इस्तेमाल घर में सबके सामने हो। हालांकि, बड़े बच्चों और किशोरों पर ज्यादा पाबंदी लगाने से वे अपनी ऑनलाइन ऐक्टिविटी के बारे में ज्यादा नहीं बताते, इस बात का भी ध्यान रखना पड़ेगा। 

6. मैस्टरबेट करना हेल्दी सेक्शुअल ऐक्टिविटी है। इसके लिए बच्चे को डांटने या शर्मिंदा करने की जगह इसे सेक्शुअल हेल्थ के बारे में बात करने का मौका समझें। 

7. छोटे बच्चे को गुड और बेड टच के बारे में बता देना चाहिए। अगर बच्चा ऐसी किसी घटना का इशारा करता है या शिकायत करता है तो उसे कभी भी नजरअंदाज न करें। बच्चों का सपोर्ट करें क्योंकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। भले ही यह शिकायत किसी दोस्त या रिश्तेदार के खिलाफ हो, जरूरी कदम उठाने का हिम्मत दिखाएं।

8. हर बच्चा अलग वक्त पर फिजिकल और इमोशनल मैच्योरिटी पर पहुंचता है। अगर किसी बच्चे में प्यूबर्टी से जुड़े बदलाव आने में असामान्य रूप से देरी हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लें। फैमिली डॉक्टर, यूरोलॉजिस्ट या गायनेकॉलजिस्ट से मिलकर बात करने से टीनएजर्स को अपने सवालों के जवाब मिल सकते हैं। वक्त पर ऐक्शन लेने से उन्हें भविष्य में कोई गलत तरीका अपनाने से रोका जा सकता है। 

9. दुर्भाग्य से कभी-कभी कुछ गलत चीजें भी हो जाती हैं, जैसे मैस्टरबेशन से परेशानी, ज्यादा पोर्न देखना या इंफेक्शन वाली सेक्शुअल बीमारी (STD) आदि। ऐसे में सायकायट्रिस्ट या साइकॉलजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए ताकि खुद को और बच्चे को सहारा मिल सके। 

10. अपने टीनएजर बच्चे के साथ मजबूत, प्यारभरा, डिसिप्लिन वाला और अच्छे कम्युनिकेशन वाला रिश्ता बनाएं। जिसमें आपसी भरोसे और सम्मान पर ज्यादा जोर हो।

Ramswaroop Mantri

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