आशीष तेलंग
एक दौर था जब इस्लाम और क्रिश्चियनिटी कट्टरता में एक दूसरे से मुकाबले में थे। आपस में लड़ते ही रहते थे। एक का जिहाद था, एक का क्रूसेड।
फिर पंद्रहवीं शताब्दी के आसपास यूरोपियन साइंटिफिक रेवोल्यूशन का दौर शुरू हुआ और इसकी नींव डली जब कॉपरनिकस ने रेवोल्यूशन्स ऑफ द हैवेनली स्फेयर्स की अपनी थ्योरी विश्व के सामने प्रस्तुत की।
वहीं से आधुनिक विज्ञान युग शुरू हुआ और उसने पूरे यूरोप को अनेक शताब्दियों के अंधकार युग से निकाल कर एक विकसित वैज्ञानिक सभ्यता में ला खड़ा किया। ये इसीलिए हुआ क्योंकि उन्होंने क्रिश्चियनिटी को पीछे रख कर विज्ञान के दिखाए हुए रास्ते का चुनाव किया। आज पूरा यूरोप ही नहीं, बल्कि उसके उपनिवेश जैसे अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड इत्यादि देश सब विकसित देशों की सूची में आते हैं। क्रिश्चियनिटी में भी अब कट्टरता का एलिमेंट करीब करीब नगण्य रह गया है।
दूसरी तरफ इस्लाम के कर्णधार हैं। ये इस्लाम, जो पैगम्बर साहब के समय एक लचीला और ओपन धर्म था, को हर बीते युग के साथ अपने फायदे के लिए कट्टर बनाते गए और इसी का नतीजा है कि मेसोपोटामिया जैसी प्राचीन सभ्यताओं के गौरवशाली इतिहास समेटे देश इराक और सीरिया आज खंडहर हैं। वे बर्बाद हैं। पाकिस्तान भी उसी रास्ते पर चला और आज वो भी बर्बाद है। जो बची खुची कसर थी वो इस्लामिक आतंकवादियों ने पूरी कर दी।
धार्मिक कट्टरता केवल और केवल बर्बाद करती है। पर लगता है कि इस इतिहास से भी हम कोई सबक नहीं ले सके हैं और मैं कम से कम आज के इस नारे से बिलकुल सहमत हूँ कि हिन्दू खतरे में है। हिन्दू बिलकुल खतरे में है क्योंकि हिन्दू धर्म, जो वास्तव में सनातन धर्म है, वो खतरे में है।
सनातन धर्म एक अद्भुत धर्म है जो अपने आलोचक को भी अपने में ही समाहित कर लेता है। जिस धर्म में उपनिषद सत्य की विवेचना नेति नेति यानि नकार के रूप में करते हैं, जिस धर्म में नास्तिकता को भी एक दर्शन के रूप में अंगीकार किया हो, उसमें कट्टरता सर्वाइव ही नहीं कर सकती।
ये धर्म प्राणशक्ति है, सांस है इस देश की और भविष्य में भी यही धर्म पूरे विश्व को विनाश से बचाने का सामर्थ्य रखता है। पर विडंबना ये कि इसी को कट्टर बनाने की कोशिश की जा रही है क्योंकि किसी पार्टी को वोट ज़्यादा चाहिए। वो भी इस तर्क पर कि देखिए, उन लोगों की कट्टरता का जवाब कट्टर हो कर ही दिया जा सकता है। वाह! क्या मूर्खता का जवाब भी कभी मूर्खता हो सकती है?
ये निर्णायक घड़ी है कि धर्म के नाम पर चलाई जा रही राजनीति को समझें और वास्तविक धर्म को भी समझें।
आशीष तेलंग





