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समझ …..!

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शशिकांत गुप्ते

कच्चे माल की कीमत बढ़ने से उत्पादन महंगा होगा। कच्चा माल मतलब Raw material.
कच्चे माल से तात्पर्य अपरिष्कृत माल, जो साफ न किया गया हो।
अनगढ़,अनिर्मित सामग्री।
जब कच्चा माल ही महंगा होगा तब पूर्ण रूप से निर्मित माल भी स्वाभाविक रूप से महंगा होगा ही।
उपर्युक्त गणित को समझने के लिए मानसिक रूप से परिपक्व होना जरूरी है। मानसिक रूप से परिपक्व होने की आयु निश्चित नहीं होती है। बहुत से नोनिहाल कच्ची उम्र में ही परिपक्व हो जातें हैं। कइयों को उम्र के अंतिम पड़ाव पर पहुँचने तक समझ नहीं आती है।
एक व्यंग्यकार का कहना है कि, मानव के दिमाग में स्थित समझदानी के आकार पर समझ निर्भर है। यदि किसी की समझदानी हो छोटी होती होती है,वह बनावटी बातों पर जल्दी विश्वास कर लेता है । कारण छोटी समझदानी उसका सोच व्यापक बनने ही नहीं देती है।
बहुत से लोग भ्रमवश स्वयं की छोटी सी समझदानी को बड़ी समझ लेतें हैं। इसीलिए ऐसे लोगों को विज्ञापनों का सहारा लेना पड़ता है।
विज्ञापन भी गोरे होने की क्रीम के विज्ञापन।
जिनकी समझदानी बड़ी होती है,वे लोग काले गोरे में भेद ही नहीं करतें हैं। ये लोग सदा गुनगुनाते हैं।
काले-गोरे का भेद नहीं
हर दिल से हमारा नाता है
जिन लोगों की समझदानी प्राकृतिक रूप से बड़ी होती है,वे लोग देश की मूलभूत धारणा अनेकता में एकता को आत्मसात करतें हैं।
जिन लोगों की समझदानी बड़ी है, वे पर देश की आन-बान-शान का प्रतीक तिरंगे झंडे का सम्मान करते है।
विश्व विजयी तिरंगा प्यारा
झण्डा ऊंचा रहे हमारा

इस राष्ट्रीय गीत ने स्वतंत्रता संग्राम की अगुवाई की।
सन 1947 में हमारा देश स्वतंत्र हुआ।
सन 1947 में हमारे देश के रहबरों के समक्ष बहुत बड़ी चनौती थी।
तात्कालिक रहबर कच्चे माल की एहमियत और कीमत भी बखूबी जानते थे।
इसीलिए भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते गया। तात्कालिक रहबरों ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रियता से शिरकत की थी।
आज देश की स्थिति भिन्न है।
एक अकाट्य कथन है।
चूहें अपने अथक प्रयास से बिल बनातें है। जमीन को कुरेद कर बिल मनातें हैं। इन बिलों को निर्मित करने में चूहें अपनी सारी ऊर्जा लगा देतें हैं। धूर्त सर्प इन रेडीमेड बिलों में रहतें हैं।
उपर्युक्त कथन का आशय समझने के लिए समझदानी का बड़ा होना जरूरी है।
हमारे देश में बहुत से लोग नकली उत्पादनों में अपनी धूर्तता पूर्ण समझ का इस्तेमाल करतें हैं।
इनलोगों की छोटी से समझ नकली खाद्य पदार्थ, नकली सौदर्यप्रसाधन,अन्य नकली वस्तुओं को निर्मित कर अपने देश के अपनो को ही बेंचते हैं।
जिनकी समझदानी व्यापक होती है वे लोग हमेशा यही नारा बुलंद करतें हैं। हम सब एक हैं। भारतीय भाई भाई।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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