*प्रधानमंत्री से की विश्व व्यापार संगठन छोड़ने की मांग*
संयुक्त किसान मोर्चा मध्यप्रदेश से जुड़े किसान संगठनों द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा के आवाहन पर 26 फरवरी 24 को किसानों मजदूरों के देशव्यापी संघर्ष के हिस्से के रूप में पूरे देश में ‘भारत सरकार डब्ल्यू टी ओ छोड़ो दिवस’ मनाया गया तथा विरोध प्रदर्शित करने के लिए डब्लू टी ओ का पुतला दहन भी किया है। केन्द्र सरकार से खेती को विश्व व्यापार संगठन से बाहर निकलने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए।

प्रधानमंत्री को भेजे गए ज्ञापन पत्र में कहा गया है कि हमारा संघर्ष आपकी केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार द्वारा किसानों के आंदोलन पर पुलिस दमन को रोकने और 9 दिसंबर 2021 को एसकेएम के साथ हस्ताक्षरित समझौते को लागू करने की मांग के लिए भी है, जिसमें सभी फसलों के लिए एमएसपी@सी2+50% के साथ कानूनी गारंटी वाली खरीद और सम्पूर्ण कर्ज़ा मुक्ति भी शामिल है।
ज्ञापन में मोदी सरकार से मांग की है कि 26-29 फरवरी को अबू धाबी में होने वाले विश्व व्यापार संगठन के 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में कृषि को डब्ल्यू टी ओ से बाहर रखने के लिए विकसित देशों पर दबाव डाला जाए।
भा ज पा – एन डी ए के गत दस वर्षों के कार्यकाल में बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी और गांवों से शहरों की ओर प्रवास ने ग्रामीण इलाकों में संकट और अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है। इसलिए भारत सरकार को अपने किसानों की सुरक्षा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने अधिकारों की दृढ़ता से रक्षा करनी चाहिए।
संयुक्त किसान मोर्चा मानता है कि इसमें किसी अंतर्राष्ट्रीय संस्था या समझौते को बाधा बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
भारत सरकार को, अपवाद के रूप में, वर्ष 2014 में डब्लू टी ओ द्वारा 5 वर्षों के लिए एक छूट दी गई थी, जिससे उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को नकद हस्तांतरण में परिवर्तित न करने की अनुमति मिल गई थी। पीडीएस के लिए भारत के खाद्य भंडारण कार्यक्रम को अस्थायी शांति खंड के तहत विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों द्वारा चुनौती से छूट दी गई है। इसके उलटे जाने की संभावना है और यदि ऐसा होता है, तो भारत को डब्ल्यू टी ओ के नियमों को अपने खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों और कृषि उत्पादन में हस्तक्षेप करने से रोकने के लिए विश्व व्यापार संगठन को छोड़कर उससे बाहर आने की जरूरत है।
विश्व व्यापार संगठन कृषि क्षेत्र में मिलने वाली सब्सिडी योजना, एमएसपी और जन वितरण प्रणाली को समाप्त करने तथा आयात की जाने वाली फसलों, दूध और फलों पर आयात शुल्क को समाप्त करने का पक्षधर है अर्थात एमएसपी, सरकारी खरीद तथा राशन प्रणाली पर पाबंदी लगाने का भारत सरकार पर दबाव बना रहा है। इसलिए भारत सरकार को विश्व व्यापार संगठन से बाहर आना चाहिए।
मुक्त व्यापार समझौते से फसलों के दाम कम हो जाएंगे तथा दूध कौड़ियों के भाव बिकने लगेगा, जिससे देश के करोड़ों किसान, खेत मजदूर तथा पशुपालक कर्ज के जाल में फंस जाएंगे। उनकी लागत तो वहीं रहेगी, परन्तु फसलों और दूध के दाम बहुत नीचे आ जाएंगे, कुल मिलाकर खेती में घाटा और बढ़ जाएगा। राशन प्रणाली खत्म होने से देश की आधी जनसंख्या बाजार के हवाले हो जाएगी और भयंकर महंगाई का सामना करना पड़ेगा। कृषि क्षेत्र पर यूरोप और अमेरिका के कॉर्पोरेट का कब्जा हो जाएगा। इसी कारण भारत के किसान संघर्ष कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है भारत की खाद्य सुरक्षा और मूल्य समर्थन कार्यक्रम डब्ल्यू टी ओ में बार-बार विवाद का विषय रहा हैं। प्रमुख कृषि निर्यातक देशों ने 2034 के अंत तक कृषि को समर्थन देने के लिए डब्ल्यू टी ओ सदस्यों के अधिकारों में वैश्विक स्तर पर 50% की कटौती का प्रस्ताव दिया है।
सार्वजनिक स्टॉक-होल्डिंग का मुद्दा भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, खासकर एमएसपी को सी 2+50% स्तर पर तय करने और सभी किसानों के लिए एमएसपी की वैधानिक गारंटी के लिए किसानों और मजदूरों के चल रहे देशव्यापी संघर्ष को देखते हुए। वास्तव में भारत में 90% किसान ए-2+एफएल+50% पर आधारित एमएसपी की वर्तमान प्रणाली के दायरे से भी बाहर हैं और गंभीर कृषि संकट और ऋणग्रस्तता का सामना कर रहे हैं। जिसके कारण किसानों द्वारा रोजाना 30 आत्महत्याएं की जा रही हैं, यह संख्या गत 20 वर्षों में साढ़े सात लाख तक पहुंच गई है।
संयुक्त किसान मोर्चा से संबद्ध मध्यप्रदेश के किसान संगठनों द्वारा रीवा जिले में तहसील गुढ़ तथा सेमरिया, पांती में ट्रेक्टर परेड तथा पुतला दहन किया गया । भोपाल में भाकियू द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल रैली निकाली गई। देपालपुर (इंदौर), ग्वालियर, जबलपुर, मुलताई, दमोह, सतना, अशोकनगर, मुरैना, राजगढ़, नर्मदापुरम, सागर, उज्जैन, श्योपुर, भिंड, इटारसी सहित अन्य जिलों में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर 26 फरवरी का दिन “डब्लूटीओ छोड़ो” दिवस के रूप में डब्ल्यू टी ओ का पुतला दहन, ट्रैक्टर मार्च निकालकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
इंदौर जिले में बुधवार को भी सांवेर तहसील के बालोदा, टाकुन, हातोद, महू, मानपुर, मालवा मिल चौराहे,सिमरोल सहित जिले में 15 से ज्यादा स्थानों पर डब्ल्यू टी ओ का पुतला जलाया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा, मध्यप्रदेश
8447715810, 9425006716, 9131776606





