*क्या शासकीय शिक्षा विभाग में निष्पक्ष जॉच हो पायेगी ?*
मंदसौर के गुरुनानंक स्पोर्ट के दो लाख तक के फर्जी बील लगाए , कई संस्थाएं परेशान ।
राजपाल सिंह परिहा
*नीमच शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का मुख्य आरोपी राजेश गुजेठिया* , राजेश गुजेठिया की मार्कशीट को लोग फर्जी बता रहे है जिस दिन ग्वालियर में एग्जाम दे रहे थे उस दिन नीमच में अपने कार्य स्थल पर भी हस्ताक्षर और ग्वालियर में भी हस्ताक्षर ये क्या अवतारी पुरुष है ? क्या नीमच नेता नगरी जिसके साथ रहने से बहुत प्रसिद्ध है के पूर्ण सहयोग से आज ये आलम है ? जिला शिक्षा विभाग नीमच के लिए इससे बड़ी शर्मनाक बात नही हो सकती की एक चपरासी अर्जुन सिंह के सुसाइड नोट में ये लिखा की गोयल बाबू को 60 हजार दे चुका हु पर मेरे एरियर के रुपए नही निकाल रहे है ,परेशान होकर आत्महत्या कर ली । जिला शिक्षा अधिकारी नीमच सी.के. शर्मा का कितना रोल है ये जांच का विषय है । बहरहाल किसी भी विभाग में कोई बाबू तब तक रिश्वत नही मांगता जब तक उसके उच्च अधिकारियों का ग्रीन सिग्नल न हो , सूत्रों की माने तो चपरासी के एरियर निकालने के लिए एक लाख की चर्चाएं बाजार में है जिसमे चपरासी अर्जुन सिंह अपने सुसाइट नोट में ये बयान लिखा, बताया जा रहा है की 60 हजार रुपए गोयल बाबू को दे चुका हु , जो सूत्रों की माने तो अर्जुन सिंह ने ब्याज पर उठाकर दिए थे । जिला शिक्षा अधिकारी सी. के. शर्मा हमेशा राजेश गुजेठिया के प्रबल पक्षधर रहे है ,प्राप्त शिकायतों के निराकरण में राजेश गुजेठिया दोषी पाए गए पर उनपर कोई कार्यवाही नही हुई । सलग्न दस्तावेज देखिए जिसमे स्कूलों से ली जानकारी में स्कूल ने मना किया है की लिस्ट में दर्शाए बच्चे हमारे स्कूल के नही है फिर भी राजेश गुजेठिया ने अपने स्वयं के बच्चे चिराग राजेश और अपने भाई के बेटे नयन राजेंद्र को हाई स्कूल खजुरी का बता कर उज्जैन खेलने के लिए मात्र लिस्ट में ले गए , कई बच्चो का हक मार कर 69 बच्चो को खेलने लेजाने की लिस्ट और उसके हिसाब से रुपए भी खर्च कर दिए जबकी आरटीआई में जानकारी सामने आई की 20 बच्चे स्कूलों ने क्रीड़ा में बाहर जाने से अनुपस्थित बताए जिनकी स्कूलों में उपस्थिति के प्रमाणित प्रति उपलब्ध है । एक खेल प्रतियोगिता मात्र दो दिन की थी पर श्रीमान ने पांच दिनों तक आर.ओ. के पानी के बिल लगाए , ये पानी किसको पिलाया? ,एक प्रतियोगिता में होटल को रेंट पर लिया पर उसके साथ रुकने के लिए टेंट का भी उल्लेख सामने आया ? बच्चो को लाने लेजाने के लिए गाड़ियों के बील भी अति संगधिकत है , एक गंभीर मामले में राजेश गुजेठिया भोपाल से 15 मार्च को बहाल हुए जबकि उससे पहले 2 मार्च को ही निर्वाचन में ड्यूटी का आदेश लगा दिया गया ? ये सब कृपा कैसे और क्यों ? क्या नेता नगरी का सरक्षणं है ? नीमच जिला शिक्षा विभाग ने बहुत जद्दोजहद के बाद हमे जानकारी दी परंतु इसी क्रीड़ा शुल्क में हमे मध्यप्रदेश में कोई जानकारी दे ही नही रहा है , उज्जैन भी सूत्रों की माने तो इस बार राज्यस्तरी मलखंब जिम्नास्टिक प्रतियोगिताओं में 11 लाख से अधिक का बील लगाया हुआ बताया जा रहा है जबकि पूर्व में 5 से 6 खेल वाली प्रतियोगिताएं 3 से 4 लाख में होना बताया जाता है । खेल के मैदान की साइज और व्यय रुपयों पर कई लोगो को संदेह बरकरार है । रिटायर्ड क्रीड़ा अधिकारी अरविंद भी बहुत सुर्खियों और चर्चा में है, सच्चाई तो तभी सामने आएगी जब हमारी जानकारी सूचना अधिकार में प्राप्त हो पायेगी ,





