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*एनपीएफएएम को निरस्त करने और   9 दिसंबर, 2021 को एसकेएम के साथ किए लिखित वायदे को पूरा करने के लिए सरकार पर दवाब बनाने का आग्रह* 

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*संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े सगठनों ने सांसद शंकर  लालवानी को सोपा ज्ञापन*

*इंदौर संयुक्त किसान मोर्चा क्या वहां पर आज इंदौर इंदौर के मोर्चे से जुड़े हुए किसान संगठनों के नेताओं ने सांसद शंकर लालवानी के कार्यालय पहुंचकर संयुक्त किसान मोर्चे द्वारा तैयार किए गए प्रतिवाद ज्ञापन को सोपा तथा 

शंकर लालवानी ,संसद सदस्य इंदौर लोकसभा क्षेत्र से अनुरोध है किया कि वे किसानों की वास्तविक मांगों का समर्थन करें, जिसमें प्रस्तावित किसान विरोधी, राज्य सरकार विरोधी ‘कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति प्रारूप’ (एनपीएफएएम) को निरस्त करना और  प्रधान मंत्री से एनडीए2 सरकार द्वारा हस्ताक्षरित 9 दिसंबर, 2021 को एसकेएम के साथ किए लिखित वायदे को पूरा करने का आग्रह करना शामिल है।*

इसे प्रतिवाद ज्ञापन पर किसान संघर्ष समिति अखिल भारतीय किसान सभा किसान सभा अजय भवन अखिल भारतीय किसान मजदूर संगठन भारतीय किसान मजदूर सेवा सहित संयुक्त किसान मोर्चे से जुड़े विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी ने हस्ताक्षर किए थे। हस्ताक्षर करने वालों में रामस्वरूप मंत्री, संयोजक, संयुक्त किसान मोर्चा इंदौर एवं  किसान संघर्ष समिति ,मालवा निमाड़ ,बबलू जाधव ,अध्यक्ष ,भारतीय किसान मजदूर सेना,अरूणचौहान,अध्यक्ष,अ.भा.किसान‌सभा,सोनू शर्मा,भारत सिंह चौहान,अ.भा.किसान मजदूर संगठन

*चंदनसिंह बडवाया,शैलेंद्र पटेल,आदि शामिल थे।

ज्ञापन में सांसद से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार की निरंतर उदासीनता पर गहरी चिंता के साथ, हम आपसे कृषक समुदाय की समस्याओं को संबोधित करने के लिए प्रधान मंत्री और भारत सरकार से समाधान की मांग करने का अनुरोध करते हैं।  हम यह बताना चाहते हैं कि 1 फरवरी, 2025 को वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट में भी किसानों और खेत मजदूरों की बुनियादी मांग को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। हमें उम्मीद है कि आप इन मुद्दों को भारत सरकार, खासकर  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाने में हमारा समर्थन करेंगे।

1. केंद्र सरकार ने कृषि विपणन पर एक नया राष्ट्रीय नीति ढांचा का प्रारूप, एनपीएफएएम जारी किया है, जो 3 कृषि कानूनों की पुनर्वापसी है, जिन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए वापस लिया गया था कि किसानों का ऐतिहासिक 13 महीने का आंदोलन समाप्त हो।

इस मसौदे का उद्देश्य सभी कृषि गतिविधियों को निजी निगमों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण में लाना है। यह सभी एपीएमसी मार्केट यार्ड को एक एकीकृत विपणन संरचना के तहत एकजुट करने का प्रस्ताव करता है, जिसमें उन्हें पीपीपी मोड के तहत पुनर्विकास किया जाना है और डिजिटल मोड के तहत जोड़ा जाना है। कॉरपोरेट नियंत्रण के तहत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए क्लस्टर खेती विकसित करने के लिए, यह एफपीओ के माध्यम से अनुबंध खेती शुरू करने का प्रस्ताव करता है, जो सभी श्रेणियों के किसानों को कॉरपोरेट नियंत्रित खुदरा विपणन, मूल्य संवर्धन श्रृंखलाओं और खाद्य निर्यात के नेटवर्क से आपूर्ति के लिए बांध देगा।  यह किसानों की स्वतंत्रता के लिए एक गंभीर खतरा है और यह अनुबंध खेती के माध्यम से कॉरपोरेट अधिग्रहण की सुविधा देकर कृषि उत्पादन, प्रसंस्करण उद्योग और बाजार के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए राज्य सरकारों की जिम्मेदारियों को कमजोर करेगा। कॉरपोरेटीकरण और निजीकरण के लिए इस तरह के बड़े पैमाने पर प्रयास धीरे-धीरे सब्सिडी वाले बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने, सिंचाई और विपणन बुनियादी ढांचे के प्रावधान की किसान कल्याण योजनाओं को नष्ट कर देंगे। यह किसानों को और अधिक गरीब और कर्जदार बना देगा और उन्हें उनकी जमीन और आजादी दोनों से वंचित करेगा।

एनपीएफएएम एमएसपी और कानूनी रूप से गारंटीशुदा खरीद के साथ-साथ पीडीएस राशन वितरण पर भी, इसकी किसान विरोधी, मजदूर विरोधी और गरीब विरोधी प्रवृत्ति को उजागर किया है। 

हम आपसे आग्रह करते हैं कि कृपया इस जनविरोधी, कॉरपोरेट समर्थक नीति पर गौर करें और एक जनप्रतिनिधि के रूप में इसके खिलाफ अपनी मजबूत आवाज उठाएं। 

  भारत के किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर 3 कृषि कानूनों के खिलाफ 13 महीने से चल रहे किसान संघर्ष के अंत में केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मांगा था। सरकार ने 9 दिसंबर, 2021 को अपने पत्र में एमएसपी@सी2+50% की गंभीर मांगों को संबोधित करने के लिए लिखित रूप से निर्दिष्ट किया था, जिसमें गारंटीकृत खरीद और बिजली का निजीकरण न करने सहित अन्य मांगें शामिल थीं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार न केवल इन समस्याओं को हल करने में विफल रही है, बल्कि वर्तमान बजट ने एमएसपी की लंबे समय से लंबित मांग की क्रूरतापूर्वक उपेक्षा की है। कॉरपोरेट मुनाफे में अनियंत्रित मूल्य वृद्धि के संदर्भ में इसे गंभीरता से देखने की जरूरत है जो 2022-23 में 10, 88,000 करोड़ रुपये और 2023-24 में बढ़कर 14, 11,000 करोड़ रुपये हो गई। केंद्रीय बजट लाभकारी मूल्य के आधार पर खरीद के लिए बाजार तंत्र सुनिश्चित करके प्राथमिक उत्पादकों, किसानों और खेत मजदूरों तक पहुंचने के लिए कॉरपोरेट लाभ का उचित हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए तैयार नहीं है।

दूसरी ओर इसने एसकेएम के साथ हुए समझौते का उल्लंघन करते हुए टैरिफ बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर आदि जैसे विद्युत अधिनियम के प्रावधानों को लागू किया है। एसकेएम ट्यूबवेल को मुफ्त बिजली और सभी ग्रामीण उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त 300 यूनिट की मांग कर रहा है।  सरकारों को सभी स्मार्ट मीटर हटा देने चाहिए।

 हम आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया प्रधानमंत्री को भारत के किसानों से किए गए लिखित वादे के बारे में याद दिलाएँ और उनसे आग्रह करें कि वे कृषि, किसानों और खेत मजदूरों पर नीतियों और लगातार केंद्रीय बजटों में प्रस्तावों के माध्यम से किए गए हमलों को उलटने की आवश्यकता पर बल दें।

मनरेगा मजदूरों को 200 दिन, 600 रूपये प्रतिदिन की मजदूरी देने, अनावारी की इकाई पटवारी हल्का की जगह किसान का खेत बनाने, आवारा पशुओं से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग करते रहे हैं ।

भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में वादा किया था कि गेहूं की समर्थन मूल्य पर 2700 रुपए प्रति क्विंटल से खरीदी की जाएगी। लेकिन सरकार बनने के बाद सरकार ने यह वादा पूरा नहीं किया है अतः मांग करते हैं कि मध्य प्रदेश की सभी मंडियों में गेहूं की खरीदी 2700 रुपए प्रति क्विंटल पर ही की जाए।

*ज्ञापन में इंदौर जिले के किसानों की स्थानीय मांगे एवं समस्याएं हल करने की भी मांग की गई है जो इस प्रकार है 

वर्ष 2019 से 186 किसानों  के बकाया 2 करोड़ 74 लाख रुपए मंडी निधि से भुगतान किया जाए,

इंदौर जिले की हाईटेक मंडी इंदौर में किसानों को भोजन कैंटीन की सुविधा नहीं मिल रही है तुरंत कैंटीन सुविधा चालू की जाए ,चोइथराम मंडी में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं ,

.मुख्यमंत्री खेत सड़क योजना चालू की जाए, पूरे मध्य प्रदेश में सोसायटी के एवं मंडी के चुनाव जल्द से जल्द कराएं जायें।

 2019 से प्याज, सोयाबीन के बकाया  भावांतर राशि तथा गेहूं बोनस राशि का भुगतान तत्काल किया जाए।

इकोनामिक कॉरिडोर, रिंग रोड, इंदौर बुधनी रेल लाईन सहित सभी योजनाओं में खेती की जमीन का अधिग्रहण बगैर किसानों की सहमति से नहीं किया जाए।अहिल्या पथ योजना रद्द की जाए जिसमें इंदौर विकास प्राधिकरण पूरी तरह से भूमिया बन चुका है अहिल्या पथ योजना में किसानो की सैकड़ो बीघा जमीन स्कीम लगाकर हड़पी जा रही है  ।

घोड़ा रोज़ जंगली सुअरों तथा आवारा पशुओं के आतंक को रोकने संबंधित समाधान तत्काल किए जाएं घोड़ा रोज़ जंगली जानवरों द्वारा फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है घोड़ा रोज़ को समूल नष्ट किया जाए। तथा नर घोड़ा रोज़ की नसबंदी की जाए तथा किसानों को हुई फसल नुकसान का सर्वे कर तत्काल किसानों को नियम आरबीसी 6(4) के अंतर्गत मुआवजा उनके खातो में डाला जाए ।

रोजडा के आतंक से खेती को बचाने के लिए वन विभाग को सख्त निर्देश दिए जाएं तथा प्रत्येक वन विभाग की रेंज में वन कर्मियों को गस्त करने का आदेश दिया जाए ।

2017 का फसल बीमा इंदौर जिले के 628 किसानों का अब तक बकाया है बकाया फसल बीमा किसानों को तत्काल दिया जाए दोषी जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। ्सोयाबीन का भाव ₹8000 प्रति कुंतल किया जाए इससे कम पर खरीदी ना हो ।निरंजन पुर सब्ज़ी मंडी को उप मडी घोषित करें।

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