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कोरोना में गाय के मल-मूत्र का इस्तेमाल !

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सुसंस्कृति परिहार

गाय  भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है ।उसको मां का दर्जा प्राप्त है उसका तमाम शरीर और उससे सृजित दूध,मूत्र और मल भी अनमोल है। आजकल कोरोना वायरस से बचाव के लिए उसके मल मूत्र को लेकर काफी चर्चाएं चल रहीं हैं। वैसे यह तो अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि इसके बचाव के लिए कोई कारगर दवा बन चुकी है फलत:कई तरीकों से इलाज चल रहा है।प्लाज़मा थैरेपी को कुछ चिकित्सक कारगर मानकर इलाज कर रहे थे पर अब उस चिकित्सा पर भी विराम लगा दिया गया है ।रेमडिसीवर के प्रयोग से भी नुकसान बताया गया ।स्टेराईड का अधिक उपयोग भी घातक है।यानि सिर्फ़ वैक्सीन को ही अब तक कोरोना बचाव के लिए उपयोगी माना गया बाकी जो कोरोना जंग जीत रहे हैं,लगता है ये उनके मनोबल ही जीत है ।ऐसे असमंजस के दौर मेंआयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ जो गोमूत्र को जीवन का अमृत मानते हैं। गोमूत्र और गोबर पंचगव्य की पांच सामग्रियों में से एक हैं, जो गाय (मूत्र, दूध, घी, दही और गोबर) से प्राप्त होती है। गाय आधारित उपचार को पंचगव्य चिकित्सा कहा जाता है। अब गाय के उत्पादों का ही एकमात्र सहारा लोगों को परोसा जा रहा है और इसका इतना व्यापकता के साथ सोशल मीडिया पर प्रचार हो रहा है कि लोग इस थैरेपी के ना केवल दीवाने हुए जा रहे हैं बल्कि गौ मूत्र और गोबर की दूकानों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। साध्वी  प्राचीजी तो कहती हैं कि रोटी पर बटर की तरह गोबर लगा कर खाने से कोरोना नहीं होगा। वहीं मध्यप्रदेश के भोपाल से बीजेपी की सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने अपने बयान में कहा है कि देशी गाय का गौमूत्र फेफड़ों की बीमारी दूर करता है.

प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, मैं हर रोज गौ मूत्र का सेवन करती हूं जिसके कारण मुझे कोरोना नहीं हुआ और अब तक मैं इस बीमारी से बची हुई हूं. उनके इस बयान का समर्थन मध्यप्रदेश की पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर ने समर्थन किया है वे एक बार फिर चर्चा में हैं. पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि गोबर के कंडों के इस्तेमाल से कोरोना दूर होगा.  अपनी फिटनेस को लेकर काफी एक्टिव रहते हैं. अक्षय कुमार की फिटनेस का हर कोई दिवाना है. 53 की उम्र में भी अक्षय अपनी फिटनेस को लेकर काफी सतर्क रहते हैं. वहीं इस बढ़ती उम्र में उनकी फिटनेस का एक राज सामने आया है. हाल ही में अक्षय कुमार ने एक लाइव चैट शो में बताया कि वह हर रोज गोमूत्र का सेवन करते हैं ।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया कि गुजरात के श्री स्वामीनारायण गुरुकुल विश्वविद्या प्रतिष्ठानम (एसजीवीपी) की ओर से संचालित गोशाला में यह इलाज लेने वालों में कुछ अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी और दवा की दुकानों पर काम करने वाले लोग हैं।वे लोग हफ्ते में एक बार गौशालाओं में जाते हैं और अपने शरीर पर गौमूत्र तथा गोबर का लेप करते हैं, ताकि इससे उन्हें कोरोनावायरस से बचने या उससे ठीक होने में सहायता मिलेगी.’भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की महिला शाखा की अध्यक्ष और शहर की एक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोना देसाई ने इस उपचार को ‘पाखंड और अप्रमाणित’ बताया. उन्होंने कहा, ‘उपयोगी साबित होने के बजाए गाय के गोबर से आपको म्यूकोरमाइकोसिस समेत दूसरे संक्रमण हो सकते हैं.’वर्तमान समय में कोरोना महामारी की वजह से यह फिर से प्रचलन में आ गया है, परंतु यदि हम विज्ञान की दृष्टि से देखें तो चिकित्सक इसे मूर्खतापूर्ण बताते हैं। कोरोना महामारी में भी लोग गोमूत्र पीने की सलाह देते हैं। हालांकि गौमूत्र के कई फायदे हैं मगर कोविड – 19 जैसी बीमारी से लड़ने के लिए यह निहायती अवैज्ञानिक और दकियानूसी उपाय है।

सवाल इस बात का है इन साध्वियों ,मंत्राणी जी और सेलिब्रिटी अक्षय कुमार के इन बयानों पर आपत्ति दर्ज़ क्यों नहीं की जाती जो कोरोना जैसी गंभीर मामले में भ्रामक चिकित्सा का प्रचार कर लोगों में भ्रांतियां फैला रहे हैं। जिससे लोगों की जान का ख़तरा हो।साथ ही साथ यह भी करें कि ऐसे तमाम केन्द्रों पर त्वरित कार्रवाई कर ना केवल उन्हें बंद करें बल्कि दंड का भी प्रावधान करें।

यदि इस चिकित्सा को सरकार की अनुमति है तो उसे ज़ाहिर किया जाए ताकि सनद रहे। जैसे यज्ञ और हनुमान चालीसा के पाठ को सरकारी अनुमति है। बहरहाल,यदि गौ मूत्र और मल चिकित्सा कारगर है तो उसका प्रचार सरकारी स्तर पर करें ताकि विदेशों में हमारा डंका बजे , गौमूत्र और गोबर को दुनियां भर के बाजार में बेच कर अपने राजस्व में बढ़ोतरी कर सकें । बेरोजगार भी इस मुहिम से कम होंगे तथा हम  कोरोना गुरु कहलाएंगे सो अलग।

Ramswaroop Mantri

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