~ अमृता शर्मा (कोलकाता)
आजकल अधिकांश महिलाओं में बच्चेदानी ( UTERUS), गर्भाशय, योनिमार्ग (OVERY), सर्विक्स (CERVIX) में रसौली- गांठ- ट्यूमर या CYST सिस्ट की समस्या बहुत देखने को मिलती है. प्रत्येक 10 में से दो महिलाओं को उपरोक्त में से किसी ना किसी समस्या से ग्रस्त पाया जा सकता है।
इसका मुख्य कारण अनुचित खानपान, शारीरिक श्रम का अभाव, सेक्सुअल अतृप्ति या दुराचारी भोगवृत्ति से उपजा हार्मोनल डिस्आर्डर, मोटापा है।
यदि प्रारम्भिक अवस्था में बच्चेदानी की गांठ या रसौली का पता लग जाता है तो घबराने की और आपरेशन कराने की आवश्यकता नहीं है।
कुछ आयुर्वेदिक उपाय हम बता रहे हैं जो चेतना मिशन द्वारा परीक्षित हैं. ये शत प्रतिशत असरदार हैं. इनके नियमित सेवन से इस प्रकार की रसौली या गांठो से छुटकारा पाया जा सकता है.
अगर रोग प्राथमिक स्टेज से आगे बढ़ गया है, यहाँ बताये गए उपचार काम नहीं करते, डॉक्टर ऑपरेशन बताया है ; तो 15 दिन के लिए खुद को चेतना विकास मिशन को दें. आपको अल्टर्नेटिव थेरेपी से कम्प्लीटली ठीक किया जाएगा : बिना आपसे कुछ लिए.
औषधि निर्माण :
1-कांचनार की छाल-100 ग्राम
2- खदिर (खैर) की छाल-100 ग्राम
3- नागकेशर- 100 ग्राम
4- गोरखमुंडी – 100 ग्राम
5- कांचनार गुग्गुल (इसको पूर्वॉक्त के साथ नहीं, अलग पीसना हे.
ये सारी बस्तुएं आपको पंसारी की दुकान पर मिल जाएंगी
इन सभी को साफ करके मिक्सर ग्राइंडर या खरल में कूटकर महीन चूर्ण बना लें। तथा किसी ढक्कनदार कांच के जार में रख लें।
सेवन विधि :
एक- एक चम्मच चूर्ण सुबह खाली पेट, और रात्रि सोने से पहले दो-दो गोली कांचनार गुग्गुल के साथ गरम पानी के साथ 3 माह तक सेवन करें।
यदि चूर्ण सेवन करने में या निगलने में परेशानी हो तो एक कप पानी में एक चम्मच चूर्ण डालकर धीमी आंच पर उबालना है जब पानी आधा कप रह जाय तो हल्का गुनगुने अवस्था में दो गोली कांचनार गुग्गुल के साथ सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले तीन माह तक सेवन करें।
3 माह के पश्चात आवश्यक रूप से सोनोग्राफी जरूर करबाएं जिससे पता लग सके कि रसौली के आकार में कमी आई है या नहीं।
कपालभाति योग प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट तक नियमित रूप से करें।
रहेज:- खटाई, मिर्च, तली हुई चीजें, तेल घी का सेवन ना करें।
(चेतना विकास मिशन)





